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UP: सीएम योगी बोले- सदियों तक आक्रमण झेल कर भी दृढ़ता से खड़ी है सनातन आस्था, जबकि आक्रांता मिट गए

Sun, 19 Apr 2026 06:13 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Sun, 19 Apr 2026 06:13 PM IST
सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत लखनऊ में आयोजित "सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा उत्तर प्रदेश" का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमलावर कभी भारत की आस्था को न तो तोड़ पाए और न ही झुका पाए।

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CM Yogi Adityanath inaugrated Somnath Swabhiman Yatra Uttar Pradesh.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत लखनऊ में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा उत्तर प्रदेश का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी गौरवशाली सनातन विरासत और आधुनिक विकास के नए युग में एक साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सदियों के आक्रमणों के बावजूद सनातन आस्था अडिग रही और आज “यतो धर्मस्ततो जयः” के भाव के साथ पुनः अपने स्वाभिमान के शिखर पर स्थापित हो रही है।

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मुख्यमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक पुनरुत्थान का उल्लेख करते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल और राजेंद्र प्रसाद के योगदान को याद किया और कहा कि आज वही सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अभियान नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुका है। इस अवसर पर उन्होंने सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा को रवाना करते हुए इसे भारत की आस्था, एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया।
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सनातन आस्था भी अजर-अमर पथ का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि आज पूरा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और दृढ़ नेतृत्व में अपनी गौरवशाली विरासत के साथ-साथ आधुनिक विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है। आज का यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि भारत के शास्त्रों की मान्यता के अनुसार जैसे आत्मा अजर-अमर है, वैसे ही सनातन आस्था भी इस अजर-अमर पथ का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सबने देखा है कि भारत की सनातन संस्कृति पर सदियों से हमले होते रहे, लेकिन हमलावर भारत की आस्था को न तो तोड़ पाए और न ही झुका पाए। लगभग 1000 वर्ष पहले द्वादश ज्योतिर्लिंगों में देवाधिदेव महादेव के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ भगवान के मंदिर पर विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी के नेतृत्व में कायराना हमला किया गया। 

आक्रांताओं ने भारत की धन-संपदा लूटी, मंदिरों को अपवित्र किया और सनातन आस्था पर प्रहार किया। लेकिन भारत के सनातन धर्म की अटूट आस्था भगवा पताका के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ी रही। आज 1000 वर्ष बाद जब हम देखते हैं तो भारत की सनातन आस्था पूरी दृढ़ता से विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही है, जबकि आक्रांताओं का कोई नामोनिशान इस धरती पर नहीं बचा है। यही है “यतो धर्मस्ततो जयः” का शंखनाद। आक्रांताओं की बर्बरता जिसे रोक नहीं पाई, तोड़ नहीं पाई और झुका नहीं पाई, वही सनातन आस्था आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के रूप में मनाई जा रही है।


 

सरदार पटेल के प्रयासों से मंदिर का निर्माण पूरा हुआ

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्र भारत में हर भारतवासी की यह अभिलाषा थी कि देश को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्वाधीनता भी प्राप्त हो। इसके लिए लगातार प्रयास किए गए और अनेक स्वर उठाए गए। भारत माता के सपूत, भारत की अखंडता के शिल्पी और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर की दुर्दशा देखकर संकल्प लिया था कि इस मंदिर का पूर्ण जीर्णोद्धार होगा और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के मंदिर की गरिमामयी पुनर्स्थापना की जाएगी। लेकिन इस मार्ग में बाधक बने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू। उनकी इच्छा थी कि यह कार्य न हो, परंतु सरदार पटेल की दृढ़ संकल्प शक्ति के सामने नेहरू की नहीं चली। सरदार पटेल के प्रयासों से मंदिर का निर्माण पूरा हुआ। प्राण प्रतिष्ठा के भव्य आयोजन को आगे बढ़ाने के लिए आयोजन समिति ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी को आमंत्रित किया। तभी कांग्रेस सरकार और पंडित जवाहरलाल नेहरू फिर बाधक बन गए।

उन्होंने लिखित रूप से कहा कि राष्ट्रपति को इस आयोजन में भाग नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह धर्मनिरपेक्षता की भावना के विपरीत होगा। एक ओर कांग्रेस की सरकार कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू कर तुष्टिकरण की पराकाष्ठा कर रही थी और आतंकवाद की नींव रख रही थी, वहीं दूसरी ओर सनातन आस्था के प्रतीक सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार और प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का विरोध कर रही थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम कृतज्ञ हैं डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी के प्रति, जिन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री के विरोध की परवाह किए बिना सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के भव्य कार्यक्रम को अपने हाथों से संपन्न किया।

अयोध्या का नाम आते ही गूंजता है "जय श्री राम"

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो कार्य आजाद भारत में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने आगे बढ़ाया था, उसी अभियान को आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा रहा है। यह भारत के स्वाभिमान को, सनातन आस्था के गौरव को और हमारी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का कार्यक्रम है।

उन्होंने कहा कि 10-11 वर्ष पहले कोई सोच भी नहीं सकता था कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो पाएगा। आज हर भारतवासी, देश या दुनिया के किसी भी कोने में जाए हर जगह एक ही आवाज गूंजती है और वह है जय श्री राम। कोई भी भारतीय चाहे देश में हो या विदेश में, जब अयोध्या का नाम सुनता है तो स्वतः उसके मुंह से “जय श्री राम” निकलता है और वह तुरंत कहता है कि उसे अयोध्या जाने की बहुत इच्छा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 500 वर्ष पहले जिन आक्रांताओं ने अयोध्या के राम मंदिर को अपवित्र किया और हिंदुओं की आस्था पर कुठाराघात किया था, आज उनका नाम तक लेने वाला नहीं बचा है। लेकिन सनातन की अटूट आस्था आज भी आकाश की ऊंचाइयों पर है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन चुका है और केसरिया ध्वज-पताका वहां लहरा रही है। इसी प्रकार काशी में काशी विश्वनाथ धाम और भव्य कॉरिडोर बन गया है। मां विंध्यवासिनी मंदिर का भव्य कॉरिडोर बन चुका है। प्रयागराज की पावन धरती पर गत वर्ष का महाकुंभ हो या 2019 का कुंभ, दुनिया को यह दिखा दिया गया है कि सांस्कृतिक आयोजन किस भव्य और समरसता भरे रूप में हो सकते हैं।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, मंत्री डॉ संजय निषाद, विधायक डॉ नीरज बोरा, ओपी श्रीवास्तव, विधान परिषद सदस्य पवन चौहान, मुकेश शर्मा, लाल जी प्रसाद निर्मल और अपर मुख्य सचिव पर्यटन एवं संस्कृति विभाग अमृत अभिजात उपस्थित रहे।

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