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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Buying a new mobile is not mandatory for free rations; misleading reports refuted—get the full update.

यूपी: मुफ्त राशन के लिए नया मोबाइल खरीदना जरूरी नहीं, भ्रामक खबरों का खंडन; जानें पूरा अपडेट

Sat, 10 Oct 2026 07:40 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 10 Oct 2026 07:40 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुफ्त राशन लेने के लिए नया मोबाइल खरीदना जरूरी नहीं है। ओटीपी से राशन वितरण की सुविधा वर्ष 2017 से लागू है और यह विशेष परिस्थितियों में वैकल्पिक व्यवस्था है। फिंगरप्रिंट न मिलने पर आइरिस स्कैन या परिवार के दूसरे सदस्य से सत्यापन कराया जा सकता है।

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UP: Buying a new mobile is not mandatory for free rations; misleading reports refuted—get the full update.
राशन को लेकर ये नियम बदला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग ने सोशल मीडिया पर मुफ्त राशन प्राप्त करने के लिए नया मोबाइल खरीदने और ओटीपी सत्यापन अनिवार्य किए जाने को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर विराम लगा दिया है।  विभाग के अपर आयुक्त सत्यदेव की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि मुफ्त राशन प्राप्त करने के लिए किसी भी लाभार्थी को नया मोबाइल खरीदने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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विभाग ने आमजन से ऐसी भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न देने की अपील की है। खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार, प्रदेश में उचित दर दुकानों पर स्थापित ई-पॉस मशीनों से इलेक्ट्रॉनिक वेइंग स्केल के जरिए तौलकर पहले की तरह ही पारदर्शी तरीके से राशन वितरित किया जा रहा है। 
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यदि किसी लाभार्थी का फिंगरप्रिंट पहली बार में मैच नहीं होता, तो उसे उसी दिन दो अतिरिक्त मौके दिए जाते हैं। इसके बाद भी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण न होने पर आइरिस (आंखों की पुतली) स्कैन का विकल्प उपलब्ध है। इसके अलावा, राशन कार्ड में दर्ज परिवार का कोई भी अन्य सदस्य सत्यापन कराकर खाद्यान्न प्राप्त कर सकता है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि ओटीपी आधारित वितरण की सुविधा कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद वर्ष 2017 से ही निरंतर प्रभावी है। यह सुविधा केवल उन अत्यंत वृद्ध, दिव्यांग या गंभीर रूप से बीमार राशन कार्ड धारकों के लिए एक वैकल्पिक उपाय है, जिनका किसी भी तरह से बायोमीट्रिक या आइरिस मिलान संभव नहीं हो पाता।

आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 3.41 करोड़ से अधिक राशनकार्डों में से मात्र 83,093 कार्डों पर ही ओटीपी आधारित वितरण हुआ है, जो कुल लेनदेन का नगण्य हिस्सा है। इसलिए इसके लिए नया मोबाइल खरीदने की बात पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक है।

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