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यूपी: शून्य पर सिमटी बसपा, 80 सीटों पर किसी भी सीट पर नंबर दो पर भी नहीं, जानिए हार की सात बड़ी वजहें

Tue, 04 Jun 2024 03:37 PM IST
रोहित मिश्र अशोक मिश्र, उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अशोक मिश्र, उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 04 Jun 2024 03:37 PM IST
सार

बहुजन समाज पार्टी यूपी की 80 की 80 सीटों में तीसरे नंबर पर रही। ऐसा पहला मौका है जब बसपा का प्रदर्शन किसी चुनाव में इतना दयनीय रहा होगा। 

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UP: BSP reduced to zero, not even at number two on any of the 80 seats, know the seven reasons for the defeat
बसपा ने किया अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बहुजन समाज पार्टी को लोकसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद उसकी वजहों को तलाशा जाने लगा है। पूरे दम-खम के साथ अकेले चुनाव लड़ने की बसपा की रणनीति का उल्टा असर रहा और पार्टी को अपने इतिहास की सबसे करारी हार का सामना करना पड़ गया। बसपा यूपी की 80 में से 80 सीटें हार गई है। अब इन हार की वजहों को तलाश जा रहा है। 

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गठबंधन को लेकर मायावती की हठ ने दलित वोट को बिखरने पर मजबूर कर दिया, जिसका फायदा विपक्षी दलों को हुआ। बसपा की हार की सात वजहों पर गौर करें तो तस्वीर साफ हो जाती है।
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दरअसल, बसपा की हार की पहली वजह कार्यकर्ताओं से दूरी है। पार्टी के शीर्ष नेता पांच साल तक खुद को बंद कमरे में समेटे रहे, जिसकी वजह से कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ कमजोर पड़ती गयी।
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 पार्टी का चुनाव अकेले लड़ना दूसरी वजह माना जा सकता है। बसपा ने बदलते चुनावी समीकरणों से सबक नहीं लेते हुए अकेले दम पर चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई, जो उसकी जीत की राह का रोड़ा बन गयी। 

तीसरी वजह पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले का फेल होना बताया जा रहा है। भाजपा विजय रथ को यूपी में रोकने और सपा प्रत्याशियों की जीत में रोड़ा अटकाने के लिए जिन प्रत्याशियों का चयन किया गया, वह चुनाव में नाकाम साबित हुए। 

चौथी वजह बसपा के युवा चेहरे आकाश आनंद को चुनावी परिदृश्य से बाहर करना है। आकाश की जनसभाओं में भीड़ उमड़ रही थी, लेकिन उनके एक भड़काऊ भाषण ने उसकी सियासी तकदीर को बदल दिया। इसका असर युवा कार्यकर्ताओं पर हुआ और वह आजाद समाज पार्टी को बतौर विकल्प देखने लगे। 

पांचवीं वजह बसपा का अपने सांसदों पर भरोसा नहीं करना मानी जा सकती है। बसपा ने अपने आठ वर्तमान सांसदों को टिकट नहीं दिया, जिसकी वजह से वह अन्य दलों में चले गए। 


छठी वजह पार्टी शीर्ष नेतृत्व का चंद पदाधिकारियों पर भरोसा करना रहा। जोनल कोआर्डिनेटर टिकट फाइनल करते रहे और शीर्ष नेतृत्व बिना साेचे-समझे उस पर मुहर लगाता रहा। 

सातवीं वजह से वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से सबक नहीं लेना रहा। पार्टी ने यह चुनाव भी अकेले ही लड़ा था, जिसके बाद उसका केवल एक विधायक ही जीत सका था।

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