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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Akhilesh Yadav says using abusive language against Shankaracharya is a sin; will make a 'faltering atoneme

यूपी: अखिलेश बोले- शंकराचार्य जी के बारे में अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा और पाप; ‘लड़खड़ाता प्रायश्चित’ करेंगे

Sat, 14 Feb 2026 09:56 AM IST
आकाश द्विवेदी डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Sat, 14 Feb 2026 09:56 AM IST
सार

अखिलेश यादव ने शंकराचार्य पर की गई टिप्पणी को शाब्दिक हिंसा और पाप बताया। उन्होंने भाजपा पर महाकुंभ मौतों के आंकड़ों व मुआवजे में पारदर्शिता न रखने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने ‘लड़खड़ाता प्रायश्चित’ जैसी टिप्पणी करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला।

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UP: Akhilesh Yadav says using abusive language against Shankaracharya is a sin; will make a 'faltering atoneme
अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार को X पर पोस्ट की। उन्होंने लिखा- पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’ पर उसकी वाणी पोल खोले। परम पूज्य शंकराचार्य जी के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी। ऐसा कहने वाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा, जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं। जब भाजपा के विधायक सदन के बाहर जाएंगे और जनता का सामना करेंगे तो जनता सड़क पर उनका सदन लगा देगी।

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जो महाकुंभ की मौतों पर सच्चे आंकड़े नहीं बताते हैं, कैश में मुआवजा देकर उसमें भी भ्रष्टाचार का रास्ता निकाल लेते हैं; जिन तक मुआवजा नहीं पहुंचा, उनका पैसा कहां गया, ये नहीं बताते हैं; अपने ऊपर लगे मुकदमे हटवाते हैं; वो किसी और के ‘धर्म-पद’ पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखते हैं। 
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एक टांग पर खड़े होकर ‘लड़खड़ाता प्रायश्चित’ करेंगे

अपने बयान में उन्होंने ‘कानून का शासन’ बोल दिया, जैसे ही इस बात पर उनका ध्यान जाएगा वो ‘विधि का शासन’ बोलने के लिए क्या दुबारा सदन बुलाएंगे या इसके लिए एक टांग पर खड़े होकर ‘लड़खड़ाता प्रायश्चित’ करेंगे।  जब इंसान नहीं, अहंकार बोलता है तो यही होता है। अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है। वो व्यक्ति समाज में मान-सम्मान खो देता है, जिसके बारे में ये कहावत प्रचलित हो जाती है कि ’जब मुंह खोला, तब बुरा बोला।’



‘हाता नहीं भाता’ का ये विस्तारित रूप है, यही सच्ची सच्चाई है। जिस समाज के ख़िलाफ़ रहकर उन्होंने हमेशा अपनी नफ़रत की राजनीति की है, उसे धर्म के मामले में भी अपमानित-पराजित करने का ये उनका अंहकार है। 



इनका बस चले तो जो विवादित फिल्म आई है उसका नाम बदले बिना ही रिलीज भी कर दें और टैक्स फ़्री भी कर दें। अगले चुनाव में वो समाज एक-एक वोट उनके खिलाफ डालकर अपने अपमान और उनके प्रदेश अध्यक्ष के नोटिस का सही जवाब देगा, उनकी सरकार हटाकर नयी सरकार बनाएगा फिर इत्मीनान-आराम से मिलजुलकर बेधड़क दाल-बाटी खाएगा।  शंकराचार्य जी पर दिया गया अभद्र बयान सदन में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। उनके इस बयान को हम निंदनीय कहें तो निंदनीय शब्द को भी निंदनीय महसूस होगा।

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