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UP: फर्जी फर्मों से जुड़े जालसाज कारोबारी होंगे गिरफ्तार, अकेले यूपी में 3000 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी
Thu, 15 Aug 2024 01:23 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 15 Aug 2024 01:23 AM IST
सार
16 अगस्त से शुरू होने वाले अभियान के लिए सेंट्रल जीएसटी और राज्य कर विभाग की टीमें तैयार हैं। केंद्र तथा राज्य जीएसटी अधिकारी संदिग्ध जीएसटीआईएन (जीएसटी पहचान संख्या) का तय समय में सत्यापन करेंगे।
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- फोटो : istock
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विस्तार
बोगस फर्में सरकारी राजस्व का मोटा चूना लगा रही हैं। अकेले यूपी में 3000 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी का अनुमान है। 16 अगस्त से शुरू होने वाले वृहद जांच अभियान के दौरान जालसाजी में लिप्त कारोबारियों को गिरफ्तार किया जाएगा। प्रत्येक टीम के कामकाज की समीक्षा होगी, जिसमें टैक्स चोरी की रकम के साथ-साथ गिरफ्तारी की संख्या बतानी होगी।
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राज्य कर विभाग को इस वर्ष 1.56 लाख करोड़ रुपये टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य दिया गया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सबसे बड़ी चुनौती टैक्स चोरी करने वालों का संगठित सिंडीकेट है। पिछले साल दो महीने तक चले जांच अभियान का असर दिखाई दिया था। करीब 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध जीएसटी चोरी से जुड़े करीब 29,273 फर्जी पंजीकरणों का खुलासा हुआ था। इस खुलासे से सरकार को पांच हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने से बच गया। इसे देखते हुए वरिष्ठ केंद्र और राज्य कर अधिकारियों वाली राष्ट्रीय समन्वय समिति ने दोबारा विशेष अभियान शुरू करने का फैसला किया।
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16 अगस्त से शुरू होने वाले अभियान के लिए सेंट्रल जीएसटी और राज्य कर विभाग की टीमें तैयार हैं। केंद्र तथा राज्य जीएसटी अधिकारी संदिग्ध जीएसटीआईएन (जीएसटी पहचान संख्या) का तय समय में सत्यापन करेंगे। अगर यह पाया गया कि जीएसटीआईएन फर्जी है या मौजूद ही नहीं है, तो कर अधिकारी पंजीकरण को निलंबित करने और रद्द करने तथा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को रोकने की कार्रवाई शुरू करेंगे।
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एआई के साथ मशीन लर्निंग जैसे हाईटेक टूल्स का इस्तेमाल
जांच टीमों के कई अधिकारियों से लैस किया गया है। फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही गिरफ्तारी के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। पिछले वर्ष के अभियान के दौरान 121 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जीएसटी अधिकारियों के मुताबिक इस बार ये संख्या बढ़ने की संभावना है, क्योंकि इस एक वर्ष में विभाग में तकनीकी रूप से काफी बदलाव आए हैं। विशेष जांच टीम (एसआईटी) डाटा एनालिसिस कर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के साथ-साथ मशीन लर्निंग जैसे हाईटेक टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।