यूपी: उच्च वेतनमान के इंतजार में 21 एमओसीएच सेवानिवृत्त, पांच का हो चुका देहांत
यूपी में 350 एमओसीएच को वर्ष 2025 में दूसरे एसीपी का लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन अभी पहला ही नहीं मिला है। इनकी सभी पत्रावलियां सालभर पहले आयुर्वेद निदेशालय को भेजी जा चुकी हैं। इसके बाद भी मामला लंबित हैं।
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उत्तर प्रदेश में कार्यरत चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य (एमओसीएच) आयुर्वेद एवं एलोपैथ विभाग के बीच झूल रहे हैं। हालत यह है कि इन्हें वर्षों से समयबद्ध उच्च वेतनमान (एसीपी) नहीं मिला है। तीसरे एसीपी के इंतजार कर 21 एमओसीएच सेवानिवृत्ति हो चुके हैं, जिसमें कई का देहांत भी हो चुका है।
प्रदेश में एमओसीएच की नियुक्ति आयुर्वेद विभाग में होती है, लेकिन वे कार्य एलोपैथ विभाग में मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन करते हैं। ऐसे में इनका कॅरिअर भी दोनों विभागों के बीच झूल रहा है। वे पूरी तरह से एलोपैथ में जाने की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर दोनों विभागों के बीच कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन अभी तक फैसला नहीं हुआ है। इतना ही नहीं इन्हें एसीपी का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
प्रदेश में 350 एमओसीएच को वर्ष 2025 में दूसरे एसीपी का लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन अभी पहला ही नहीं मिला है। इनकी सभी पत्रावलियां सालभर पहले आयुर्वेद निदेशालय को भेजी जा चुकी हैं। इसके बाद भी मामला लंबित हैं। इसी तरह 35 एमओसीएच में कुछ को एक भी नहीं मिला है, जबकि कुछ को दूसरे एसीपी का इंतजार है। वहीं तीसरे एसीपी के दावेदार 21 एमओसीएच सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिसमें पांच की मौत हो चुकी है। एसीपी का लाभ नहीं मिलने से चिकित्साधिकारियों में आक्रोश है।
क्या है नियम: नियमानुसार 10 वर्ष की नियमित सेवा पर पहले, 16 वर्ष में दूसरे और 26 वर्ष में तीसरे एसीपी का लाभ मिलना चाहिए। इसके बाद भी एमओसीएच को यह लाभ नहीं मिल रहा है।
एमओसीएच ने दी चेतावनी
सामुदायिक स्वास्थ्य चिकित्साधिकारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रवि भारती का कहना है कि एसीपी लाभ नहीं मिलने से चिकित्सकों में आक्रोश है। एसीपी से जुड़ी फाइलें निदेशालय में धूल फांक रही हैं। दिसंबर माह तक सभी एसीपी जारी नहीं होती है तो आंदोलन शुरू करना विवशता होगी, जिसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
आयुर्वेद विभाग के निदेशक डॉ. नारायण दास का कहना है कि एमओसीएच को एसीपी लाभ देने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें कई दौर की बैठकें होती हैं। कुछ चिकित्सकों का विवरण सीएमओ कार्यालय से देर से मिला था। इसलिए थोड़ी देरी हुई है।