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सौतल झील में फिर हो गए अवैध कब्जे
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लखनऊ के इटौंजा के ग्राम पंचायत अलदमपुर, जलालपुर, उसरना, परसहिया, उनई भडसर व किशुनपुर की 400 बीघा जमीन में फैली सौतल झील में फिर से अवैध कब्जे शुरू हो गए हैं। इस झील को तहसील प्रशासन ने तीन माह पहले अभियान चलाकर अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया था। झील के चारों ओर कराया गया पौधरोपण भी रखरखाव के अभाव में बदहाली का शिकार हो गया है। पौधे सूख गए हैं।
अधिकारियों की उपेक्षा के चलते यह झील पूरी तरीके से सूखी पड़ी है। ग्रामीणों ने बताया कि इस झील को तीन साल पहले शासन द्वारा अवैध कब्जों से मुक्त कराकर पक्षी बिहार के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी लेकिन अधिकारियों की मनमानी के चलते यह घोषणा सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई। कुछ लोगों ने झील की जमीन पर कब्जा कर खेती करना शुरू कर दिया था।
ग्रामीणों द्वारा जब इसकी शिकायतें सीएम सहित आला अधिकारियों से की गईं तो तहसील प्रशासन ने करीब तीन माह पहले अभियान चलाकर जमीन को फिर से अवैध कब्जों से मुक्त कराया था और जेसीबी से झील के चारों तरफ गड्ढे खुदवा कर पौधरोपण कराया था। अब यहां पर फिर से झील की जमीन पर अवैध कब्जे हो गए हैं। ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि झील को योजना बनाकर स्थायी रूप से अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाए और इसे पक्षी विहार के रूप में विकसित किया जाए।
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तहसीलदार बख्शी का तालाब विवेकानंद मिश्रा ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, जांच कराकर अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कहा, झील को विकसित करने के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है, शासन से बजट की स्वीकृति मिलते ही काम कराया जाएगा।
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अधिकारियों की उपेक्षा के चलते यह झील पूरी तरीके से सूखी पड़ी है। ग्रामीणों ने बताया कि इस झील को तीन साल पहले शासन द्वारा अवैध कब्जों से मुक्त कराकर पक्षी बिहार के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी लेकिन अधिकारियों की मनमानी के चलते यह घोषणा सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई। कुछ लोगों ने झील की जमीन पर कब्जा कर खेती करना शुरू कर दिया था।
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ग्रामीणों द्वारा जब इसकी शिकायतें सीएम सहित आला अधिकारियों से की गईं तो तहसील प्रशासन ने करीब तीन माह पहले अभियान चलाकर जमीन को फिर से अवैध कब्जों से मुक्त कराया था और जेसीबी से झील के चारों तरफ गड्ढे खुदवा कर पौधरोपण कराया था। अब यहां पर फिर से झील की जमीन पर अवैध कब्जे हो गए हैं। ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि झील को योजना बनाकर स्थायी रूप से अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाए और इसे पक्षी विहार के रूप में विकसित किया जाए।
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तहसीलदार बख्शी का तालाब विवेकानंद मिश्रा ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, जांच कराकर अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कहा, झील को विकसित करने के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है, शासन से बजट की स्वीकृति मिलते ही काम कराया जाएगा।