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राजकीय बालगृह के किचन की छत से कूदकर भाग निकले दो बच्चे
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Wed, 14 Dec 2016 12:58 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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प्राग नारायण रोड स्थित राजकीय बालगृह शिशु से मंगलवार सुबह 9 बजे दो बच्चे भाग गए। पर बच्चों की तलाश आसपास ही की जाती रही। सुबह 11 बजे हजरगंज पुलिस और जीआरपी को इसकी सूचना दी गई।
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देर रात तक बच्चों का कोई पता नहीं चल सका। बालगृह के अधीक्षक हरीश श्रीवास्तव का कहना है कि बच्चे किचन की छत पर चढ़कर समाज कल्याण परिसर में कूदे और भाग निकले।
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मंगलवार को बालगृह शिशु में एक बच्चे का बर्थडे मनाने की तैयारी चल रही थी। सभी सुबह का नाश्ता कर रहे थे कि इस बीच बच्चों ने बालगृह अधीक्षक हरीश श्रीवास्तव को इसकी जानकारी दी।
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बालगृह अधीक्षक ने सब बच्चों को लाइन में खड़ाकर गिनती करवाई तो दो बच्चे नहीं मिले। इस सबमें दो घंटे बीत गए। अधीक्षक का कहना है कि इसकी सूचना पुलिस के साथ सभी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है।
साथ ही चारबाग में जीआरपी को भी अलर्ट कर दिया गया है, लेकिन बच्चों का देर रात तक कोई पता नहीं चला है। उम्मीद है कि बच्चे लखनऊ में ही हैं और जल्द ही उन्हें तलाश लिया जाएगा।
आखिर क्यों भाग रहे बच्चे
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- फोटो : demo pic
राजकीय बालगृह शिशु से इसके पूर्व 2014 में तीन बच्चे भाग चुके हैं। इनमें से दो बच्चों को चारबाग ट्रेन में पकड़ कर वापस लाया गया था। वहीं एक बच्चे का पता नहीं चला।
इसी साल की शुरुआत में पांच बच्चे यहां से एक साथ भाग निकले थे, जिन्हें बाद में पकड़ा गया था। इनमें से एक बच्चे ने बताया था कि बाल गृह में उसकी पिटाई की जा रही थी और दिन भर काम कराया जाता था।
इसकी वजह से वह भागा था। हर बार यही कहा जाता है कि किचन की छत से कूदकर बच्चे भाग गए। इसके बावजूद यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए।बालगृह शिशु में 12 साल से छोटे बच्चों के लिए बनाया गया है।
इनमें उन बच्चों को रखा जाता है जो लावारिस मिलते हैं। इसमें 40 से 50 बच्चे रहते हैं। इनकी देखभाल के नाम पर जो स्टाफ लगाया गया है, वह बच्चों से अपनी देखभाल करवाता है। अधिकतर बच्चों ने समय समय पर स्टाफ की शिकायतें की हैं कि उनसे सफाई, कपड़े धोने, बर्तन मांजने आदि के काम करवाए जाते हैं।
इसी साल की शुरुआत में पांच बच्चे यहां से एक साथ भाग निकले थे, जिन्हें बाद में पकड़ा गया था। इनमें से एक बच्चे ने बताया था कि बाल गृह में उसकी पिटाई की जा रही थी और दिन भर काम कराया जाता था।
इसकी वजह से वह भागा था। हर बार यही कहा जाता है कि किचन की छत से कूदकर बच्चे भाग गए। इसके बावजूद यहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए।बालगृह शिशु में 12 साल से छोटे बच्चों के लिए बनाया गया है।
इनमें उन बच्चों को रखा जाता है जो लावारिस मिलते हैं। इसमें 40 से 50 बच्चे रहते हैं। इनकी देखभाल के नाम पर जो स्टाफ लगाया गया है, वह बच्चों से अपनी देखभाल करवाता है। अधिकतर बच्चों ने समय समय पर स्टाफ की शिकायतें की हैं कि उनसे सफाई, कपड़े धोने, बर्तन मांजने आदि के काम करवाए जाते हैं।