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हिजबुल मुजाहिद्दीन के दो आतंकियों ने नौ महीने ट्रेनिंग लेकर रची आतंकी साजिश
Mon, 11 Mar 2019 11:03 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Mon, 11 Mar 2019 11:03 PM IST
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यूपी को धमाकों से दहलाने की साजिश रचने के मामले में हिजबुल मुजाहिद्दीन के दो आतंकियों के खिलाफ नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को लखनऊ की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इसमें दावा किया गया कि कमरुज जमां और ओसामा बिन जावेद ने नौ महीने की ट्रेनिंग लेकर यह साजिश रची थी। इनमें से कमरुज जमां गिरफ्तार है जबकि ओसामा भगोड़ा बना हुआ है।
इस मामले में एटीएस यूपी ने 12 सितंबर 2018 में दोनों आतंकियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसमें उन पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, यूपी के विभिन्न हिस्सों में आतंकी धमाके की साजिश रचने व अन्य आरोपों में धाराएं लगाई गई थीं। आतंकी संगठन हिजबुल इस हमले की तैयारी कर रहा था। बाद में एनआईए ने 24 सितंबर को फिर से यह दर्ज करते हुए जांच शुरू की थी।
कमरुज जमा (39) के अन्य नाम डॉ. हुरैराह व कमरुद्दीन भी हैं। वह असम के होजाई जिले में जमुनामुख का रहने वाला बताया जा रहा है। दूसरा आरोपी ओसामा बिना जावेद (23) भगोड़ा है और जम्मू-कश्मीर के दक्षिण किश्तवार का रहने वाला है।
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इस मामले में एटीएस यूपी ने 12 सितंबर 2018 में दोनों आतंकियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसमें उन पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, यूपी के विभिन्न हिस्सों में आतंकी धमाके की साजिश रचने व अन्य आरोपों में धाराएं लगाई गई थीं। आतंकी संगठन हिजबुल इस हमले की तैयारी कर रहा था। बाद में एनआईए ने 24 सितंबर को फिर से यह दर्ज करते हुए जांच शुरू की थी।
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कमरुज जमा (39) के अन्य नाम डॉ. हुरैराह व कमरुद्दीन भी हैं। वह असम के होजाई जिले में जमुनामुख का रहने वाला बताया जा रहा है। दूसरा आरोपी ओसामा बिना जावेद (23) भगोड़ा है और जम्मू-कश्मीर के दक्षिण किश्तवार का रहने वाला है।
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चार्जशीट में दावा : किश्तवार के जंगलों में दी गई आतंक की ट्रेनिंग
अदालत में दायर चार्जशीट के मुताबिक दोनों आतंकियों ने हिजबुल में शामिल होकर जून 2017 से मार्च 2018 के दौरान हथियारों की ट्रेनिंग ली। इसमें हिजबुल के सदस्यों किश्तवार निवासी मोहम्मद अमीन उर्फ जहांगीर सुरुरी और हजारी उर्फ रियाज अहमद ने मदद की थी। ट्रेनिंग किश्तवार के जंगलों में हुई थी। इसके बाद कमरुज जमां को यूपी और असम में आतंकी हमले के टारगेट निर्धारित करने और छिपने का स्थान तलाशने का काम दिया गया।
फेसबुक पर एके-47 के साथ दिखा, फिर भाग गया
कमरुज की एक फोटो 8 अप्रैल 2018 को एके-47 राइफल के साथ सोशल मीडिया पर दिखी। इसे हिजबुल के आतंकी मन्नान वानी फेसबुक अकाउंट से पोस्ट किया गया था। मन्नान मारा जा चुका है। कमरुज को गिरफ्तारी का डर था, इस वजह से बांग्लादेश भाग गया। हालांकि वह ओसामा और एक अन्य रियाज नाइकू के संपर्क में था। नाइकू कश्मीर में हिजबुल मुजाहिद्दीन का ऑपरेशन कमांडर बताया जाता है। आपस में संपर्क के लिए आतंकी ब्लैकबेरी मैसेंजर चैट का उपयोग कर रहे थे।
फेसबुक पर एके-47 के साथ दिखा, फिर भाग गया
कमरुज की एक फोटो 8 अप्रैल 2018 को एके-47 राइफल के साथ सोशल मीडिया पर दिखी। इसे हिजबुल के आतंकी मन्नान वानी फेसबुक अकाउंट से पोस्ट किया गया था। मन्नान मारा जा चुका है। कमरुज को गिरफ्तारी का डर था, इस वजह से बांग्लादेश भाग गया। हालांकि वह ओसामा और एक अन्य रियाज नाइकू के संपर्क में था। नाइकू कश्मीर में हिजबुल मुजाहिद्दीन का ऑपरेशन कमांडर बताया जाता है। आपस में संपर्क के लिए आतंकी ब्लैकबेरी मैसेंजर चैट का उपयोग कर रहे थे।
भारत लौटा और कानपुर में मंदिरों की ली टोह
अगस्त के पहले हफ्ते में कमरुज भारत लौटा और कुछ समय असम में रहा। 25 अगस्त 2018 को ओसामा और नाइकू के निर्देश पर वह कानपुर पहुंचा। यहां कुछ पुराने मंदिरों की टोह ली ताकि आतंकी हमला किया जा सके। वह हथियार और विस्फोटक भी जमा कर रहा था, ताकि आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जा सके। यहीं से उसे गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा एनआईए ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच भगोड़े आतंकियों जहांगीर, हजारी व अन्य के खिलाफ भी जारी है।