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Lucknow News: एनीमेशन सेंटर में दो वर्ष पहले भी सुलगी थी मौत की चिंगारी
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आग्निकांड में घायल मोहम्मद आसिफ।
- फोटो : अमर उजाला
लखनऊ। अलीगंज स्थित एनिमेशन कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड की चिंगारी दो वर्ष पहले ही सुलग चुकी थी। सेंटर के भीतर पहले भी शॉर्ट सर्किट हो चुका था, फिर भी जिम्मेदार सोए रहे। शॉर्ट सर्किट की जानकारी आला अधिकारियों को भी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। न ही घटना से सबक लेते हुए सेंटर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
अलीगंज अग्निकांड में बाल-बाल बचे आशियाना निवासी मोहम्मद आसिफ ने खुलासा किया कि वर्ष 2024 के मई-जून के महीने में दोपहर के वक्त सेंटर में शॉर्ट सर्किट हुआ था। इस घटना से पूरे सेंटर में धुआं फैलने से अफरातफरी मच गई थी। उस वक्त सेंटर प्रबंधन ने हम लोगों की छुट्टी कर दी थी। दो दिन बाद स्थिति सामान्य होने पर दोबारा बुलाया था।
मोहम्मद आसिफ ने बताया कि दो वर्ष पहले भी सेंटर में आने-जाने का केवल एक रास्ता था। छत पर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी, वहां लोहे का मजबूत दरवाजा लगाकर ताला जड़ दिया गया था। उस वक्त शॉर्ट सर्किट से कोई हताहत तो नहीं हुआ, लेकिन वहां काम करने वाले कर्मचारियों और छात्रों के अंदर डर का माहौल जरूर बन गया था।
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उस वक्त घटना से सबक लेकर आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था कर दी गई होती तो 15 साथियों की जान नहीं जाती। इस हादसे के लिए प्रशासन भी बराबर का जिम्मेदार है क्योंकि उन्होंने कभी सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने या निर्देश देने की जहमत नहीं उठाई।
शवों को निकालने तक का रास्ता नहीं था
आसिफ ने रूंधे गले से बताया कि अलीगंज अग्निकांड में महज 30 मिनट के अंदर ही उनके 15 साथियों की मौत हो गई। हालात इतने बदतर थे कि जिंदा लोगों को बचाना तो दूर, मौत के बाद शवों को बाहर निकालने के लिए भी कोई रास्ता नहीं बचा था। सेंटर का मुख्य द्वार बायोमीट्रिक था, जो फेस डिटेक्शन और पंच करने के बाद ही खुलता या बंद होता था। आग लगते ही बायोमेट्रिक सिस्टम अपने आप लॉक हो गया, जिससे कोई भी साथी गेट से बाहर नहीं निकल सका।
दो मिनट के अंदर ही करीब आ गई थी मौत
आसिफ कहते हैं कि मेरी किस्मत अच्छी थी कि किसी तरह जान बच गई। घटना के दो मिनट के अंदर ही मौत हमारे बेहद करीब आ गई थी। मुख्य दरवाजा बंद हो चुका था। हमने किसी तरह खिड़की का शीशा तोड़ा और इंटरनेट के केबल के सहारे नीचे कूदने का फैसला किया। नीचे भारी भीड़ जमा थी और लोग चिल्ला रहे थे कि बस नीचे कूद जाओ, जिंदगी बच जाएगी। हमारे पांच से छह साथी ही किसी तरह नीचे कूदकर मौत के मुंह से बाहर निकल पाए। अन्य साथी भीतर फंस गए और दम तोड़ दिया।
इसी महीने सबका नेपाल घूमने का था प्लान
मोहम्मद आसिफ बताते हैं कि एनिमेशन सेंटर में काम करते हुए करीब पांच वर्ष हो चुके हैं। वहां काम करने वाले सभी साथी एक परिवार का हिस्सा बन चुके थे। साथ में लंच करना और एक साथ कहीं घूमने जाना हमारी आदत थी। इसी महीने हम सभी ने छुट्टियों में नेपाल घूमने का प्लान बनाया था। आग में दोस्तों की मौत ने एक पल में हमारी सारी खुशियां छीन लीं।
दिसंबर में होने वाली थी अम्मार की शादी
आसिफ ने बताया कि अग्निकांड में जान गंवाने वाले बाराबंकी निवासी उनके साथी मोहम्मद अम्मार की दो महीने पहले ही सगाई हुई थी। इसी वर्ष दिसंबर में उसकी शादी तय थी। हादसे में पश्चिम बंगाल के रहने वाले एक और साथी की भी मौत हो गई, जिसकी पिछले वर्ष नवंबर में शादी हुई थी। आसिफ ने बताया कि पिछले वर्ष नवंबर में मेरी भी शादी हुई थी, जिसमें सेंटर के सभी दोस्त शामिल हुए थे। आसिफ ने कहा कि हमारे 25 साथियों में से 15 की मौत हो जाना और मेरा बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
हाथ में आई गंभीर चोटें
हादसे में मोहम्मद आसिफ के हाथ में गंभीर चोटें आई हैं। वह बिस्तर से भी बड़ी मुश्किल से उठ पा रहे हैं। हालांकि, घर पर पड़ोसी, रिश्तेदारों के लगातार आने-जाने से आसिफ और उनका परिवार थोड़ा परेशान भी नजर आया।
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अलीगंज अग्निकांड में बाल-बाल बचे आशियाना निवासी मोहम्मद आसिफ ने खुलासा किया कि वर्ष 2024 के मई-जून के महीने में दोपहर के वक्त सेंटर में शॉर्ट सर्किट हुआ था। इस घटना से पूरे सेंटर में धुआं फैलने से अफरातफरी मच गई थी। उस वक्त सेंटर प्रबंधन ने हम लोगों की छुट्टी कर दी थी। दो दिन बाद स्थिति सामान्य होने पर दोबारा बुलाया था।
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मोहम्मद आसिफ ने बताया कि दो वर्ष पहले भी सेंटर में आने-जाने का केवल एक रास्ता था। छत पर किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी, वहां लोहे का मजबूत दरवाजा लगाकर ताला जड़ दिया गया था। उस वक्त शॉर्ट सर्किट से कोई हताहत तो नहीं हुआ, लेकिन वहां काम करने वाले कर्मचारियों और छात्रों के अंदर डर का माहौल जरूर बन गया था।
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उस वक्त घटना से सबक लेकर आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था कर दी गई होती तो 15 साथियों की जान नहीं जाती। इस हादसे के लिए प्रशासन भी बराबर का जिम्मेदार है क्योंकि उन्होंने कभी सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने या निर्देश देने की जहमत नहीं उठाई।
शवों को निकालने तक का रास्ता नहीं था
आसिफ ने रूंधे गले से बताया कि अलीगंज अग्निकांड में महज 30 मिनट के अंदर ही उनके 15 साथियों की मौत हो गई। हालात इतने बदतर थे कि जिंदा लोगों को बचाना तो दूर, मौत के बाद शवों को बाहर निकालने के लिए भी कोई रास्ता नहीं बचा था। सेंटर का मुख्य द्वार बायोमीट्रिक था, जो फेस डिटेक्शन और पंच करने के बाद ही खुलता या बंद होता था। आग लगते ही बायोमेट्रिक सिस्टम अपने आप लॉक हो गया, जिससे कोई भी साथी गेट से बाहर नहीं निकल सका।
दो मिनट के अंदर ही करीब आ गई थी मौत
आसिफ कहते हैं कि मेरी किस्मत अच्छी थी कि किसी तरह जान बच गई। घटना के दो मिनट के अंदर ही मौत हमारे बेहद करीब आ गई थी। मुख्य दरवाजा बंद हो चुका था। हमने किसी तरह खिड़की का शीशा तोड़ा और इंटरनेट के केबल के सहारे नीचे कूदने का फैसला किया। नीचे भारी भीड़ जमा थी और लोग चिल्ला रहे थे कि बस नीचे कूद जाओ, जिंदगी बच जाएगी। हमारे पांच से छह साथी ही किसी तरह नीचे कूदकर मौत के मुंह से बाहर निकल पाए। अन्य साथी भीतर फंस गए और दम तोड़ दिया।
इसी महीने सबका नेपाल घूमने का था प्लान
मोहम्मद आसिफ बताते हैं कि एनिमेशन सेंटर में काम करते हुए करीब पांच वर्ष हो चुके हैं। वहां काम करने वाले सभी साथी एक परिवार का हिस्सा बन चुके थे। साथ में लंच करना और एक साथ कहीं घूमने जाना हमारी आदत थी। इसी महीने हम सभी ने छुट्टियों में नेपाल घूमने का प्लान बनाया था। आग में दोस्तों की मौत ने एक पल में हमारी सारी खुशियां छीन लीं।
दिसंबर में होने वाली थी अम्मार की शादी
आसिफ ने बताया कि अग्निकांड में जान गंवाने वाले बाराबंकी निवासी उनके साथी मोहम्मद अम्मार की दो महीने पहले ही सगाई हुई थी। इसी वर्ष दिसंबर में उसकी शादी तय थी। हादसे में पश्चिम बंगाल के रहने वाले एक और साथी की भी मौत हो गई, जिसकी पिछले वर्ष नवंबर में शादी हुई थी। आसिफ ने बताया कि पिछले वर्ष नवंबर में मेरी भी शादी हुई थी, जिसमें सेंटर के सभी दोस्त शामिल हुए थे। आसिफ ने कहा कि हमारे 25 साथियों में से 15 की मौत हो जाना और मेरा बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
हाथ में आई गंभीर चोटें
हादसे में मोहम्मद आसिफ के हाथ में गंभीर चोटें आई हैं। वह बिस्तर से भी बड़ी मुश्किल से उठ पा रहे हैं। हालांकि, घर पर पड़ोसी, रिश्तेदारों के लगातार आने-जाने से आसिफ और उनका परिवार थोड़ा परेशान भी नजर आया।