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Lucknow News: दिन भर बेटे की राह तकती रही मां, शाम को पहुंचा शव
Sun, 21 Sep 2025 02:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 21 Sep 2025 02:49 AM IST
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अतुल का शव देख रोते-बिलखते परिजन व घर के बाहर जुटी भीड़। घटनास्थल।
लखनऊ। कैफे संचालक अतुल कुमार जैन की मौत की खबर घटना के बाद से लेकर शाम तक उनकी मां कमला देवी से छुपाकर रखी गई थी। परिवार के लोग उन्हें इस हृदय विदारक घटना की सूचना देने से डर रहे थे।
सुबह छह बजे घर से निकले अतुल के बारे में मां कमला देवी बार-बार पति और छोटे बेटे आशीष से सवाल कर रही थीं। हर कोई उनके सवाल का गोलमोल जवाब दे रहा था। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे मोहल्ले वालों की भीड़ घर के बाहर एकत्र होने लगी तो वह घबरा उठीं। शाम करीब चार बजे अतुल का शव घर पहुंचा। बड़े बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां कमला देवी दहाड़े मारकर बेसुध हो गईं। वहीं, पिता वीरेंद्र कुमार जैन भी बेटे का शव देखते ही फूट-फूटकर रो पड़े। छोटे भाई और दो बड़ी बहनों ने किसी तरह बुजुर्ग माता-पिता को संभाला। इसके बाद अतुल का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पिता दान करना चाहते थे बेटे की आंख
वीरेंद्र बेटे अतुल की आंख दान करना चाहते थे। पोस्टमार्टम के बाद जब उनका शव घर पहुंचा तो रिश्तेदारों ने बताया कि सिर व आंख के पास अतुल को गंभीर चोट लगी है। ऐसे में उनकी आंख दान नहीं की जा सकती है।
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पर्यावरण प्रेमी थे अतुल, कॉलोनी में लगवाए थे कई पेड़
अतुल मिलनसार स्वभाव के थे। पूरे मोहल्ले में हर कोई उन्हें सम्मान देता था। मोहल्ले के निवासी मार्कंडेय ने बताया कि अतुल पर्यावरण प्रेमी थे। उन्होंने कॉलोनी में काफी पेड़ लगवाए थे। सुबह जब उनकी मौत की खबर मिली तो पल भर के लिए यकीन नहीं हुआ। उनकी अंतिम यात्रा में पूरा मोहल्ला उमड़ पड़ा।
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सुबह छह बजे घर से निकले अतुल के बारे में मां कमला देवी बार-बार पति और छोटे बेटे आशीष से सवाल कर रही थीं। हर कोई उनके सवाल का गोलमोल जवाब दे रहा था। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे मोहल्ले वालों की भीड़ घर के बाहर एकत्र होने लगी तो वह घबरा उठीं। शाम करीब चार बजे अतुल का शव घर पहुंचा। बड़े बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां कमला देवी दहाड़े मारकर बेसुध हो गईं। वहीं, पिता वीरेंद्र कुमार जैन भी बेटे का शव देखते ही फूट-फूटकर रो पड़े। छोटे भाई और दो बड़ी बहनों ने किसी तरह बुजुर्ग माता-पिता को संभाला। इसके बाद अतुल का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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पिता दान करना चाहते थे बेटे की आंख
वीरेंद्र बेटे अतुल की आंख दान करना चाहते थे। पोस्टमार्टम के बाद जब उनका शव घर पहुंचा तो रिश्तेदारों ने बताया कि सिर व आंख के पास अतुल को गंभीर चोट लगी है। ऐसे में उनकी आंख दान नहीं की जा सकती है।
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पर्यावरण प्रेमी थे अतुल, कॉलोनी में लगवाए थे कई पेड़
अतुल मिलनसार स्वभाव के थे। पूरे मोहल्ले में हर कोई उन्हें सम्मान देता था। मोहल्ले के निवासी मार्कंडेय ने बताया कि अतुल पर्यावरण प्रेमी थे। उन्होंने कॉलोनी में काफी पेड़ लगवाए थे। सुबह जब उनकी मौत की खबर मिली तो पल भर के लिए यकीन नहीं हुआ। उनकी अंतिम यात्रा में पूरा मोहल्ला उमड़ पड़ा।

अतुल का शव देख रोते-बिलखते परिजन व घर के बाहर जुटी भीड़। घटनास्थल।

अतुल का शव देख रोते-बिलखते परिजन व घर के बाहर जुटी भीड़। घटनास्थल।

अतुल का शव देख रोते-बिलखते परिजन व घर के बाहर जुटी भीड़। घटनास्थल।

अतुल का शव देख रोते-बिलखते परिजन व घर के बाहर जुटी भीड़। घटनास्थल।

अतुल का शव देख रोते-बिलखते परिजन व घर के बाहर जुटी भीड़। घटनास्थल।

अतुल का शव देख रोते-बिलखते परिजन व घर के बाहर जुटी भीड़। घटनास्थल।