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UP: बिहार चुनाव के नतीजे तय करेंगे प्रदेश में कांग्रेस-सपा के रिश्तों का भविष्य, चुनावों में प्रतिष्ठा दांव पर
Sun, 19 Oct 2025 09:35 PM IST
रोहित मिश्र
अजीत बिसारिया, अमर उजाला लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sun, 19 Oct 2025 09:35 PM IST
सार
Bihar elections: बिहार चुनाव का यूपी से तो वैसे कोई सीधा संबंध नहीं है लेकिन सूत्रों की मानें तो यदि महागठबंधन के रिश्ते बहुत हद तक यूपी के चुनाव परिणाम पर तय होंगे।
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राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव।
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
राजद और कांग्रेस के बीच दरार ने बिहार के बाहर भी इंडिया गठबंधन के घटक दलों को सजग कर दिया है। बिहार में कई सीटों पर घटक दलों के आमने-सामने आने से खराब संदेश गया है। सपा के रणनीतिकार भी मानते हैं कि यूपी में कांग्रेस और सपा के रिश्ते काफी हद तक बिहार के परिणामों पर न सिर्फ निर्भर करेंगे, बल्कि सपा नेतृत्व महागठबंधन की मौजूदा स्थितियों से काफी कुछ सबक भी ले रहा है।
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बिहार के विधानसभा चुनाव में पहले चरण के लिए नामांकन की तिथि समाप्त हो चुकी है, जबकि दूसरे चरण के नामांकन के लिए अंतिम तिथि 20 अक्तूबर है। स्थिति का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि जिस कुटुंबा सीट पर कांग्रेस ने अपने प्रदेश अध्यक्ष को उतारने की घोषणा की है, वहां से राजद ने भी प्रत्याशी उतारने का निर्णय लिया है। इस तरह की करीब 11 सीटें हैं, जहां महागठबंधन के घटक दल आमने-सामने हैं।
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सपा सूत्रों का कहना है कि बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर वैसा प्रबंधन नहीं दिखा, जिसकी अपेक्षा थी। इसमें किसकी और कहां खामी रही यह तो समीक्षा का विषय है। इंडिया गठबंधन को लेकर सपा की नीति एकदम साफ है कि जो क्षेत्रीय दल जिस राज्य में मजबूत है, कांग्रेस को वहां उसकी बात को तवज्जो देनी चाहिए। कांग्रेस ने अपने खराब प्रबंधन के कारण इससे पहले हरियाणा का आसान चुनाव भी हारा है।
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एमएलसी की सीटों पर भी तालमेल नहीं
सूत्र बताते हैं अब सपा यूपी में कांग्रेस को लेकर फूंक-फूंककर कदम आगे बढ़ाएगी। अभी प्रदेश में एमएलसी की 11 सीटों पर भी दोनों दलों के बीच कोई तालमेल नहीं है। दोनों ही पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं। भविष्य में भी सपा, कांग्रेस के उन्हीं प्रत्याशियों पर विचार करेगी, जो उसकी नजर में जिताऊ साबित हो सकते हैं। सीट बंटवारे को लेकर सपा यहां किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएगी।