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Lucknow News: मायण में दिखी दिव्यांगों की प्रतिभा, शहरी और ग्रामीण संस्कृतियों के संगम में लगाई डुबकी

Mon, 17 Feb 2025 02:05 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 17 Feb 2025 02:05 AM IST
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Talent of disabled people seen in Maayan, took a dip in the confluence of urban and rural cultures
गजल की प्रस्तुति पर झूमे लोग।
बख्शी का तालाब। इटौंजा के गदेला गांव स्थित कमला कुटीर में हर साल होने वाले मायण महोत्सव में इस बार का आयोजन थोड़ा अलग रहा। यह महोत्सव दृष्टिबाधित दिव्यांगों को समर्पित किया गया, जिसमें मीत वेलफेयर फाउंडेशन के बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी का मन जीत लिया। प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने एक ही मंच पर शहरी और ग्रामीण परिवेश के संगम को खूब सराहा।
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महोत्सव की शुरुआत राष्ट्रपति वीरता पदक प्राप्त बीएसएफ के जांबाज योद्धा संदीप मिश्रा के स्वागत गीत जीना सिखा दे... से हुई। प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच अधिक सार्थक संगम की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महोत्सव से दिव्यांगों की भलाई के लिए एक बड़ी सामाजिक प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया गया, यह प्रयास सराहनीय है।
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मायण महोत्सव के संस्थापक और सीआरपीएफ के पूर्व डीजी रहे आनंद प्रकाश माहेश्वरी ने बताया कि इस दौरान अतिथियों और प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया। मीत वेलफेयर फाउंडेशन से रोहित ने बताया कि दृष्टिबाधित बच्चों के लिए आवश्यक संस्थागत सुविधाएं और सामाजिक अवसर प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। दिव्यांग योद्धाओं के सम्मान में गायिका डॉ. प्रभा श्रीवास्तव ने गजलों से समा बांध दिया। इस दौरान ग्रामीण परिवेश में देसी व्यंजनों का भी उपस्थित लोगों ने लुफ्त उठाया।
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इस दौरान अखिलेश और वंदना अग्रवाल, राजेश और सीमा बंसल, दया और मधु माहेश्वरी, विमल व आरती माहेश्वरी, अरुण व निशा अग्रवाल, परितोष और कनक चौहान, रोहित मीत, चंद्रशेखर वर्मा आदि मौजूद रहे। इतिहासकार रवि भट्ट, विजय प्रताप साही, कीर्ति नारायण, गोपाल सिन्हा, रश्मि मिश्रा, अनुपम श्रीवास्तव, अरविंद मिश्रा, अजय जायसवाल, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. विनय गर्ग, डॉ. पंकज गुप्ता, कनक चौहान, पद्मश्री रूना बनर्जी, विनीता मिश्रा, फकरे आजम, विपुल वार्ष्णेय, नवीन जोशी, डॉ. संदीप कुमार, कुमकुम रे, कर्नल नीरज श्रीवास्तव, सुधांशु मणि, एयर मार्शल अमित तिवारी, अनुराग डिडवानिया और जय कृष्ण अग्रवाल आदि लोग मौजूद रहे। लखनऊ एक्सप्रेशन सोसाइटी और लखनऊ साहित्य मंच का भी सहयोग रहा।


आंखों की रोशनी खोई, पर हौसला रहा बरकरार
बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट रहे संदीप मिश्रा बहुमुखी प्रतिभा के धनी होने के साथ बैडमिंटन, हॉकी और फुटबॉल जैसे खेलों में भी चैंपियन रहे हैं। 13 दिसंबर 2000 को राइनो-2 ऑपरेशन के दौरान उल्फा उग्रवादियों की गोली से उनकी बायीं आंख चली गई थी। उनके शरीर पर नौ गहरे घाव भी लगे थे। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और ब्रेल के साथ कंप्यूटर सीखा। अब स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर का उपयोग करके बीएसएफ अकादमी में कंप्यूटर पाठ्यक्रम पढ़ा रहे हैं।
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