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सबकी मदद करने को हमेशा तैयार रहती थीं सुषमा स्वराज, ट्रोलर्स का भी करती थीं सामना

Wed, 07 Aug 2019 07:30 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Wed, 07 Aug 2019 07:30 AM IST
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sushma swaraj always keen to help people and face trolers with courage
सुषमा स्वराज फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज आज भले ही हमारे बीच न रहीं, लेकिन सबकी मदद करने की उनकी इच्छाशक्ति से हमारे दिलों में उनकी जगह बनी हुई है। मदद चाहे देश के अंदर हो या विदेश में, वह हमेशा लोगों की समस्यओं पर दूर करती थीं। 
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साल 2018 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हिंदू-मुस्लिम दंपती के पासपोर्ट को लेकर विवाद पैदा हुआ था जिसका संज्ञान लेते हुए पूर्व मंत्री ने उस दंपती की मदद की और उन्हें पासपोर्ट दिलाया। इसके बाद विवाद थम गया, लेकिन सोशल मीडिया में इसे लेकर खूब हंगामे हुआ। मामले के बाद से ही ट्विटर पर कई लोग विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को निशाना बनाने रहे। 
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उन लोगों ने सुषमा स्वराज को लेकर कई तरह के ट्वीट किए। कुछ में भद्दी भाषा का प्रयोग किया गया लेकिन इस बीच सुषमा ने बड़ी ही दिलेरी से इन ट्रोलर्स का सामना किया और खुद ही इनका स्वागत कर दिया।
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सुषमा ने ट्विटर पर लिखा था कि ‘मैं 17 से 23 जून 2018 के बीच भारत से बाहर थी। मैं नहीं जानती कि मेरी अनुपस्थिति में क्या हुआ। हालांकि, मुझे कुछ ट्वीट से सम्मानित किया गया। मैं इसे आपके साथ साझा कर रही हूं। इसलिये मैंने उन्हें पसंद किया है।’

सुषमा की इस दिलेरी से न सिर्फ ट्रोलर्स शांत हो गए थे बल्कि लोगों ने उनकी एक नई खासियत को भी पहचाना कि वे अपनी आलोचना होने पर कई उसे स्वीकार करती थीं। उससे भागती या चिढ़ती नहीं थीं। हलाकि उस दौरान ट्रोलर्स ने ट्विटर पर ना सिर्फ मीम बनाकर सुषमा को निशाना हनाया था बल्कि उनकी बीमारी और निजी जिंदगी को लेकर भी ट्वीट किए थे। 

ये था मामला

दरअसल, पासपोर्ट सेवा केंद्र के एक अधिकारी विकास मिश्र का लखनऊ से तब तबादला कर दिया गया था जब एक हिंदू-मुस्लिम दंपती ने आरोप लगाया था कि पासपोर्ट आवेदन के साथ कार्यालय जाने पर उन्होंने उन्हें अपमानित किया। 

वहीं पासपोर्ट सेवा केंद्र के अधिकारी विकास मिश्र ने अपने बचाव में कहा था कि वह धर्म निरपेक्ष हैं और उन्होंने महिला से कहा था कि उनके निकाहनामे में उनका नाम सादिया अनस दिखाया गया है, जिसका उनकी फाइल में विवरण होना चाहिए था।

सुषमा स्वराज के हस्तक्षेप से नोएडा निवासी विदेशी कंपनी में अधिकारी अनस और उनकी पत्नी तन्वी सेठ का पासपोर्ट एक घंटे में बन गया था। तन्वी का मामला सोशल मीडिया में काफी चर्चा में रहा था। मालूम हो कि गोमतीनगर स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट सेवा केंद्र में कैसरबाग निवासी व वर्तमान में नोएडा में रह रहे अनस अपनी पत्नी तन्वी के साथ बीते वर्ष जून में पासपोर्ट बनवाने गए थे जहां वरिष्ठ अधीक्षक विकास मिश्र ने निकाहनामे व अन्य दस्तावेजों पर सवाल उठाए। 

उन्होंने आवेदन में स्थानीय आवास के तौर पर ससुराल का पता डाला था। हालांकि, जांच में वह पासपोर्ट के नियमों के मुताबिक एक साल से वहां रहते हुए नहीं पाई गई थीं। इससे तन्वी का पासपोर्ट अटक गया जिससे वह भड़क उठीं और वरिष्ठ अधीक्षक पर धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट कर शिकायत कर दी। इस गंभीर शिकायत पर विदेश मंत्रालय ने विकास मिश्रा का गोरखपुर स्थानांतरण करने का आदेश जारी कर दिया जिसके बाद क्षेत्रीय कार्यालय ने एक घंटे में तन्वी का पासपोर्ट बनाकर उन्हें सौंपा था।
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