दो और पदाधिकारियों को टीपू ने दी 'हार की सजा'
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लोकसभा चुनाव में हार के बाद सपा का 'सफाई अभियान' जारी है, पार्टी का शीर्ष नेतृत्व हर स्तर पर समीक्षा कर हार के कारण बने पदाधिकारियों पर कार्रवाई कर रहा है।
इसी कड़ी में सीतापुर जिले के दो विधानसभा क्षेत्र के प्रभारियों पर गाज गिरी। सपा प्रांतीय नेतृत्व के निर्देश पर पार्टी जिलाध्यक्ष ने लहरपुर और हरगांव के विधानसभा प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष शमीम कौसर सिद्दीकी के मुताबिक वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में सीतापुर में सात विधायक निर्वाचित हुए थे। दो सीटें पार्टी ने हारी थीं।
बताया जा रहा है कि पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों की भूमिका पर शीर्ष नेतृत्व गहराई से समीक्षा कर कार्रवाई कर रहा है।
हटाए गए प्रभारी
लोकसभा चुनाव के लिए हरगांव से पार्टी प्रत्याशी आरपी चौधरी व लहरपुर से प्रत्याशी जहीर अब्बास को विधानसभा का प्रभारी नियुक्त किया था, मगर लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। दोनों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।
इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि सपा नेतृत्व अब उन नेताओं के खिलाफ सख्ती के मूड में है, जिनके बारे में प्रत्याशियों को सहयोग न करने या भितरघात की शिकायतें मिली हैं।
अखिलेश यादव सरकार के लगभग डेढ़ दर्जन मंत्री पार्टी नेतृत्व के निशाने पर हैं जबकि चुनाव से ठीक पहले संगठन में शामिल किए गए सवा सौ से ज्यादा पूर्व पदाधिकारियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की भी तैयारी है।
जल्द ही मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे जिसके बाद मंत्रिमंडल से उन मंत्रियों की छुट्टी की जाएगी जिनके बारे में बड़े पैमाने पर शिकायतें मिली हैं साथ ही कुछ और दर्जाप्राप्त मंत्रियों पर भी गाज गिर सकती है।
सरकार के निशाने पर कई और मंत्री
लोकसभा चुनाव में हार के बाद 36 दर्जाप्राप्त मंत्रियों की छुट्टी की जा चुकी है। करीब डेढ़ दर्जन और दर्जाप्राप्त मंत्री सरकार के निशाने पर हैं।
अखिलेश सरकार के लगभग डेढ़ दर्जन मंत्रियों के बारे में भी पार्टी नेतृत्व को शिकायतें मिली हैं। इनकी भूमिका की छानबीन के साथ ही फीडबैक तैयार कराया जा रहा है।
चुनाव में इन मंत्रियों की जो भूमिका रही है, उसके पूरे ब्यौरे के साथ मुलायम और अखिलेश 28 मई के बाद उनसे रू-ब-रू होंगे और सभी से जवाब मांगा जाएगा।
माना जा रहा है कि इसके बाद लगभग डेढ़ दर्जन मंत्रियों की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है। इनमें पूर्वांचल के मंत्री ज्यादा हैं। कुछ मंत्रियों के बारे तो यहां तक फीडबैक मिला है कि उन्होंने पार्टी प्रत्याशियों का सहयोग करने के बजाय हराने में ज्यादा ताकत लगाई।
अपनी बात रखने का दिया जाएगा मौका
पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिनके खिलाफ कार्रवाई की जानी है, उनकी फेहरिस्त तैयार कर ली गई है। मंत्रियों को हटाने से पहले पार्टी नेतृत्व एक बार उनसे बातचीत करना चाहता है ताकि यह साफ हो सके कि जो फीडबैक मिला है, उसके बारे में उन्हें क्या कहना है।
इसी सप्ताह मंत्रियों की बैठक बुलाकर निर्णय किया जाएगा ताकि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नए सिरे से सरकार और संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने का काम शुरू किया जा सके।
अगले महीने से सपा जिला से लेकर ब्लॉक स्तर तक सम्मेलनों का आयोजन करने जा रही है। इससे पहले ही सारी कार्रवाई होने की संभावना है।