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अंगदानकर्ताओं और अंगदान करने वालों का डाटा तैयार करेगा एसजीपीजीआई

Sun, 13 Oct 2019 01:39 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Oct 2019 01:39 AM IST
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sgpgi will prepare the data of organ donater
लखनऊ। एसजीपीजीआई अंगदान करने वालों और इन अंगों को जरूरतमंदों में वक्त पर प्रत्यारोपण के लिए आर्गन रजिस्ट्री की व्यवस्था शुरू करने जा रहा है। इससे विभिन्न अंगों के जरूरतमंदों और दानदाताओं का मुकम्मल डाटा तैयार हो सकेगा। वहीं, राज्य स्तर पर प्रत्यारोपण के लिए पॉलिसी भी तैयार की जाएगी। इससे अंग उपलब्ध होने पर प्राथमिकता के हिसाब से जरूरतमंद को समय पर उसे प्रत्यारोपित किया जा सकेगा। अभी राज्य स्तर पर ऐसे डाटा की व्यवस्था नहीं है।
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प्रदेश में क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एसओटीटीओ) स्थापित किया गया है। यूपी में एसजीपीजीआई को इसका केंद्र बनाया गया है और यहां के डॉ. राजेश हर्षवर्धन को इसका नोडल अधिकारी बनाया गया है। उनके मुताबिक अंग प्रत्यारोपण को लेकर तीन स्तरीय तंत्र विकसित किया गया है। पहला राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ), पांच राज्यों को मिलाकर क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (आरओटीटीओ) एवं राज्य स्तर पर (एसओटीटीओ) का गठन किया गया है। राज्य केलिए 2017 में प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिस पर अगस्त 2019 में अंतिम मुहर लगी।
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अभी यह है व्यवस्था
अभी राज्य स्तर पर ऐसे डाटा की व्यवस्था नहीं है। लिवर, किडनी सहित अन्य अंगों के प्रत्यारोपण की सूची राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एनओटीटीओ) और पांच राज्यों को मिलाकर बनाए गए क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (आरओटीटीओ) के पास रहती है। राज्य स्तर पर वरीयता सूची बनने से मरीजों को अंग मिलने में जल्दी होगी।
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ऐसे काम करेगा सिस्टम
व्यवस्था के लिए अलग-अलग कमेटियां बनेंगी। यही अंग निकालने, उसे प्रत्यारोपित करने, जरूरतमंदों को देने सहित सभी पहलुओं की निगरानी करेंगी। इसके लिए एनओटीटीओ की ओर से पहले से पॉलिसी है। डाटा के अध्ययन और जरूरतों को देखते हुए उस पॉलिसी को प्रदेश की जरूरतों और यहां के हालात के मुताबिक बदला या लचीला किया जा सकेगा।
यह होगा फायदा
वक्त पर लिया जा सकेगा अंगदान
ऑर्गन रजिस्ट्री शुरू होने से जरूरतमंदों और दानदाताओं के बारे में एसओटीटीओ के पास पहले से पूरी जानकारी रहेगी। यदि कोई व्यक्ति जिंदा रहते अंगदान की घोषणा करता है तो उसकी मृत्यु के बाद टीम तत्काल मौके पर पहुंचेगी और अंगदान की प्रक्रिया पूरी कराएगी। समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता के लिए कॉलेजों, सार्वजनिक स्थलों पर अभियान भी चलाया जाएगा।
जरूरतमंद का पूरा रिकॉर्ड होगा
रजिस्ट्री होने से लिवर, किडनी, हार्ट सहित अंगदान में मिलने पर किसे सबसे ज्यादा प्रत्यारोपण की जरूरत है, उसका रिकॉर्ड होगा। साथ ही जरूरतमंद का पूरा ब्यौरा होगा, जिससे वक्त की भी बचत होगी।
ऑर्गन बैंक भी बनाने का प्रस्ताव होगा तैयार
अभी तक सिर्फ आई बैंक है। अन्य ऑर्गन बैंक नहीं हैं। दानदाताओं की संख्या बढ़ी तो नेत्र के साथ स्किन, लिवर, किडनी, हार्ट को सुरक्षित रखने की जरूरत पड़ेगी। हालांकि इन्हें अल्प समय के लिए ही रखना होता है। भविष्य में उत्तर प्रदेश में ऑर्गन बैंक बनाने का भी प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
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कितनी देर तक रखे जा सकते हैं दान में मिले अंग
आमतौर पर लिवर को 12 घंटे, किडनी को 24 घंटे, कॉर्निया को 14 दिन, हार्ट को चार घंटे तक रखा जा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि दानदाता से लिया अंग जितनी जल्दी प्रत्यारोपित कर दिया जाए, उसके परिणाम उतने बेहतर आते हैं।

जानिए, अंग प्रत्यारोपण को लेकर देश में हालात
भारत में हर साल करीब 1.8 लाख लोगों को गुर्दे के प्रत्यारोपण की जरूरत होती है, पर सिर्फ छह हजार का प्रत्यारोपण हो पाता है।
- करीब 1 लाख लोग लिवर फेल होने की स्थिति में होते हैं, पर 1500 का ही ट्रांसप्लांट हो पाता है।
- करीब 50 हजार हार्ट फेल होने के केस आते हैं, जिनमें 10 से 15 लोगों का ही प्रत्यारोपण हो पाता है।
- हर साल एक लाख से अधिक कॉर्निया की जरूरत होती है, लेकिन 25 हजार का ही प्रत्यारोपण हो पाता है।
(आंकड़े डॉ. राजेश हर्षवर्धन के मुताबिक)
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प्रत्यारोपण के विभिन्न पहलुओं पर मंथन
राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन का मुख्यालय बनने के बाद शनिवार को एसजीपीजीआई में प्रत्यारोपण को लेकर मंथन हुआ। कंवेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण की दिशा में चिकित्सा संस्थानों में चल रहे कार्यों और बारीकियों के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान डॉ. राजेश हर्षवर्धन, डॉ. सौरभ सिंह, डॉ. डिम्पी सिंह, डॉ. भाविनी वाजपेयी आदि थे।
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