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किडनैपिंग से बचने के लिए 'गायब' हो गए थे कृषि सचिव, 21 दिन बाद घर लौटे
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 23 Nov 2017 12:16 AM IST
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हजरतगंज थाने में नेकराम से पूछताछ करती पुलिस।
- फोटो : amar ujala
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प्रमुख सचिव कृषि के निजी सचिव 21 दिन बाद लखनऊ लौट आए। मंगलवार शाम हजरतगंज थाने में उनसे पूछताछ हुई। नेकराम ने पड़ोसियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह मेरा अपहरण कराना चाहते थे।
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इसकी जानकारी होने पर सचिवालय से चुपचाप भाग गए। पुलिस के मुताबिक इस दौरान नेकराम हैदराबाद और नागपुर में धार्मिक संस्थाओं से जुड़े रहे। पूछताछ के बाद उन्हें परिवारीजनों को सुपुर्द कर दिया गया।
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कानपुर रोड एचएसडीए कॉलोनी निवासी 48 वर्षीय नेकराम प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद के निजी सचिव हैं। 31 अक्तूबर की सुबह 11 बजे वह विभागीय कार्य से एनेक्सी गए थे।
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देर शाम तक कार्यालय नहीं आए तो उनकी तलाश शुरू की। एनेक्सी में भी कर्मचारी भेजकर पता लगाया पर निराशा ही हाथ लगी। पत्नी सरोजनी ने आशंका जताई कि उनके पति का बदमाशों ने अपहरण कर लिया है।
हालांकि, पत्नी ने किसी से विवाद से इंकार किया। इंस्पेक्टर हजरतगंज आनंद शाही ने बताया कि उसी रात सरोजनी की तहरीर पर अपहरण का केस दर्ज कर लिया गया था।
ई-रिक्शे पर बैठते दिखे थे नेकराम
हजरतगंज इंस्पेक्टर आनंद शाही ने बताया कि नेकराम 31 अक्तूबर को कार्यालय से एनेक्सी गए। वहां कुछ देर रहने के बाद 11.20 बजे बाहर निकले और ई-रिक्शा पर बैठ गए। सारा वाकया एनेक्सी में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया था।
पुलिस को उसी समय संदेह हो गया था कि नेकराम का अपहरण नहीं हुआ। पुलिस परिवार और कार्यालय में हुए विवादों के संबंध में छानबीन कर रही थी। पुलिस के मुताबिक ई-रिक्शा चारबाग स्टेशन की तरफ गया था।
लखनऊ से दिल्ली और फिर हैदराबाद गए
सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि नेकराम ट्रेन से नई दिल्ली पहुंचे। दूसरे दिन वहां से हैदराबाद चले गए और होटल में ठहरे रहे। यहां से रोज चर्च में जाते थे। दस दिन तक यहां रहने के बाद नागपुर चले गए। यहां भी होटल में ठहरे थे, जिसका बिल उन्होंने पुलिस को दिखाया।
सीओ ने बताया कि यहां पर वह अम्बेडकर विचार मंच के मुख्यालय जाते थे। नेकराम के मुताबिक वह आध्यात्म की तरफ अग्रसर थे। इसी बीच मोबाइल ऑन किया तो भाई का फोन आ गया।
भाई के आश्वासन के बाद लौटे
नेकराम ने बताया कि भाई ने उन्हें आश्वासन दिया कि सब ठीक है। अब पड़ोसी भी डर गए हैं। वह कुछ नहीं करेंगे। आप वापस आ जाइए। इस पर नेकराम रकेरल एक्सप्रेस से सोमवार शाम को नागपुर से झांसी पहुंचे। मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे वह लखनऊ पहुंचे।
पुलिस को उसी समय संदेह हो गया था कि नेकराम का अपहरण नहीं हुआ। पुलिस परिवार और कार्यालय में हुए विवादों के संबंध में छानबीन कर रही थी। पुलिस के मुताबिक ई-रिक्शा चारबाग स्टेशन की तरफ गया था।
लखनऊ से दिल्ली और फिर हैदराबाद गए
सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि नेकराम ट्रेन से नई दिल्ली पहुंचे। दूसरे दिन वहां से हैदराबाद चले गए और होटल में ठहरे रहे। यहां से रोज चर्च में जाते थे। दस दिन तक यहां रहने के बाद नागपुर चले गए। यहां भी होटल में ठहरे थे, जिसका बिल उन्होंने पुलिस को दिखाया।
सीओ ने बताया कि यहां पर वह अम्बेडकर विचार मंच के मुख्यालय जाते थे। नेकराम के मुताबिक वह आध्यात्म की तरफ अग्रसर थे। इसी बीच मोबाइल ऑन किया तो भाई का फोन आ गया।
भाई के आश्वासन के बाद लौटे
नेकराम ने बताया कि भाई ने उन्हें आश्वासन दिया कि सब ठीक है। अब पड़ोसी भी डर गए हैं। वह कुछ नहीं करेंगे। आप वापस आ जाइए। इस पर नेकराम रकेरल एक्सप्रेस से सोमवार शाम को नागपुर से झांसी पहुंचे। मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे वह लखनऊ पहुंचे।
पुलिस चारबाग में, मानकनगर से पहुंच गए घर
नेकराम के मोबाइल की लोकेशन हैदराबाद में मिलते ही हजरतगंज और साइबर सेल की टीम वहां तक पहुंच गई। हालांकि तीन दिन तलाश करने के बाद खाली हाथ लौट आई।
उनके घर वापसी की सूचना मिली तो पुलिस हरकत में आ गई और चारबाग स्टेशन पर डेरा जमा लिया। लेकिन नेकराम मानकनगर स्टेशन पर ही उतर गए। ट्रेन चारबाग पहुंची तो पुलिस ने पूरी गाड़ी छान डाली लेकिन वह नहीं मिले। इसकी जानकारी अधिकारियों को दी गई।
दूसरी टीम ने उनके आशियाना स्थित घर पहुंचने की सूचना दी तो पुलिस ने राहत की सांस ली। कुछ देर बाद पुलिस नेकराम को घर से हजरतगंज थाने ले आई।
धर्म-कर्म में लगे रहे 21 दिन
एक ओर लखनऊ में परिवारीजन, सचिवालय के कर्मचारी व अधिकारी और पुलिस नेकराम की तलाश कर रही थी तो वहीं वह हैदराबाद और नागपुर में धर्म-कर्म में जुटे थे। 21 दिनों तक वह सिर्फ धार्मिक संस्थाओं के संपर्क में रहे।
उनके घर वापसी की सूचना मिली तो पुलिस हरकत में आ गई और चारबाग स्टेशन पर डेरा जमा लिया। लेकिन नेकराम मानकनगर स्टेशन पर ही उतर गए। ट्रेन चारबाग पहुंची तो पुलिस ने पूरी गाड़ी छान डाली लेकिन वह नहीं मिले। इसकी जानकारी अधिकारियों को दी गई।
दूसरी टीम ने उनके आशियाना स्थित घर पहुंचने की सूचना दी तो पुलिस ने राहत की सांस ली। कुछ देर बाद पुलिस नेकराम को घर से हजरतगंज थाने ले आई।
धर्म-कर्म में लगे रहे 21 दिन
एक ओर लखनऊ में परिवारीजन, सचिवालय के कर्मचारी व अधिकारी और पुलिस नेकराम की तलाश कर रही थी तो वहीं वह हैदराबाद और नागपुर में धर्म-कर्म में जुटे थे। 21 दिनों तक वह सिर्फ धार्मिक संस्थाओं के संपर्क में रहे।