संजय गांधी अस्पताल निलंबन मामला: हाईकोर्ट से नहीं मिली तत्काल राहत, अब तीन अक्तूबर को होगी सुनवाई
अमेठी में विवादों में आए संजय गांधी अस्पताल के मामले में हाईकोर्ट से फौरी राहत नहीं मिली है। उधर अस्पताल के बाहर कर्मचारियों का सत्याग्रह जारी है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से अमेठी के संजय गांधी अस्पताल का लाईसेंस निलंबन मामले में बुधवार को अस्पताल प्रबंधन को राहत नहीं मिली।कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अक्तूबर को नियत कर राज्य सरकार से पूछा है कि इस मामले की जाँच कब पूरी होगी?
न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ के समक्ष बुधवार को अस्पताल प्रबंधन की ओर से मुख्य संचालन अधिकारी अवधेश शर्मा द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में लाईसेंस निलंबन को चुनौती दी गई है। दरसल, पहले सर्जरी के दौरान एक महिला की मृत्यु होने पर अस्पताल का लाईसेंस निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में अभी जाँच भी चल रही है। इसको लेकर कोर्ट ने सरकारी वकील से पूछा कि जाँच कब तक पूरी होगी।
सरकारी वकील ने मामले में सरकार से पूरी जानकारी लेने को तीन दिन का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने देते हुए मामले को 3 अक्तूबर को शीर्ष 10 केसों में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान बहस में पता चला कि अस्पताल को सर्जरी के लिए लाईसेंस नहीं मिला था। इसके बावजूद अस्पताल में सर्जरी की जा रही थी।
कोतवाली क्षेत्र मुसाफिरखाना के गांव पांडेय का पुरवा मजरे रामशाहपुर निवासी दिव्या शुक्ला की मौत के मामले में लापरवाही के आरोप में मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल का लाइसेंस 18 सितंबर को निलंबित कर दिया गया था। जिसके अस्पताल पूरी तरह बंद हो गया है। इससे अस्पताल के 400 से अधिक कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में हो गया है।
संजय गांधी मेमोरियल ट्रस्ट के हायर अथॉरिटी के निर्णय पर संजय गांधी अस्पताल के चीफ ऑपरेशन ऑफीसर अवधेश शर्मा की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई थी। बुधवार को हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई हुई। सीओओ अवधेश शर्मा ने बताया कि डबल बेंच की ओर से सुनवाई की गई, पक्ष सुनने के बाद न्यायालय की ओर से कुछ और अभिलेख मांगे गए हैं। तीन अक्तूबर को सुनवाई होगी। उन्होंने बताया कि उन्हें न्यायालय का पूरा भरोसा है, जनहित में उन्हें न्याय मिलेगा।
कई बार हुई वार्ता
सत्याग्रह पर बैठे नेताओं व प्रशासन के अफसरों के बीच सुबह से लेकर शाम तक कई चक्र में वार्ता हुई। सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह से लेकर एसडीएम ने भी सत्याग्रह पर बैठे नेताओं के साथ बातचीत की। पुलिस अधिकारियों ने भी संवाद किया।
सुरक्षा के रहे कड़े प्रबंध
सीएमओ कार्यालय में बुधवार को सुरक्षा के कड़े प्रबंध रहे। सीओ मयंक द्विवेदी खुद डटे रहे। कई थानों की पुलिस के साथ ही पीएसी के भी जवान भी लगाए गए थे।
सत्याग्रह को लेकर दिन भर चला मान मनौव्वल का दौर
संजय गांधी अस्पताल के लाइसेंस बहाली की मांग को लेकर बुधवार को चल रहे सत्याग्रह में दोपहर बाद एकाएक रायबरेली सांसद सोनिया गांधी के निजी सचिव केएल शर्मा भी दलबल के साथ पहुंच गए। हालांकि पूर्व एमएलसी दीपक सिंह की अगुवाई में अमेठी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले सत्याग्रह में सपा, बसपा, आम आदमी व किसान संगठन ने भारी संख्या में पहुंच कर समर्थन दिया।
सत्याग्रह में पूर्व एमएलसी ने कहा कि देश के सांसद, विधायक, एमएलसी व अन्य कोई भी जन प्रतिनिधि हो जनहित में अस्पताल, उद्योग धंधे एवं अन्य विकास कार्य कराए जाने के लिए जाने जाने जाते हैं। उन्होंने अस्पताल बंद होने पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर तंज कसा। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई अन्य गंभीर आरोप लगाए।
दोपहर बाद रायबरेली की सांसद सोनिया के निजी सचिव केएल शर्मा भी सत्याग्रह में पहुंच गए। सत्याग्रह में रायबरेली कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी, नगर धीरज श्रीवास्तव, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मो इलियास, सुल्तानपुर जिलाध्यक्ष अभिषेक सिंह राणा, आम आदमी पार्टी के शिव प्रसाद कश्यप, सपा नेता मोहम्मद नईम, पूर्व विधायक राधेश्याम कनौजिया, पूर्व जिला अध्यक्ष योगेंद्र मिश्र, धर्मेंद्र शुक्ल, कुलवंत, अनुराग सिंह, राम प्रसाद गुप्त, राम नरायण कन्नौजिया, बसपा नेता राम लखन शुक्ल, अनिल सिंह, फिरोज आलम, ब्लॉक प्रमुख सदाशिव यादव समेत भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।
लाइसेंस बहाली के लिए आरपार की लड़ाई लड़ेंगे कर्मचारी
मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल बंद होने के बाद ज्वाइंट फोरम ऑफ डाॅक्टर्स पैरामेडिकल स्टॉफ एवं कान्ट्रैक्ट वर्कर्स ऑफ संजय गांधी अस्पताल के बैनर तले बेरोजगार आक्रोशित स्टाफ का क्रमिक सत्याग्रह अनशन बुधवार को जारी रहा। दूसरे दिन बुधवार को सत्याग्रह अनशन पर बैठे कर्मियों ने नारेबाजी करते हुए लाइसेंस बहाली एवं संचालन की आवाज बुलंद की।
मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल के लाइसेंस बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलित कर्मचारियों का कहना है जनता की समस्या सुलझाने के बजाय राजनीति कर इसे उलझाया जा रहा है। अस्पताल को बंद कर कर्मियों, मरीजों एवं जनता के साथ विश्वासघात किया गया है।
अस्पताल के ऑपरेशन मैनेजर मनोकर्णिका मिश्र ने कहा कि शासन व प्रशासन की ओर से जल्दबाजी में की गई कार्रवाई न्यायोचित नहीं है। अस्पताल प्रशासन का पक्ष लेने के बाद ही इस पर निर्णय लेना चाहिए था। सरकार और न्यायालय पर उन्हें पूरा भरोसा है इसका संचालन जल्द शुरू होगा।
अस्पताल के वरिष्ठ कर्मचारी अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि अस्पताल डेढ़ करोड़ प्रतिवर्ष के घाटे में रहकर भी लोगों को लखनऊ जैसी उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। यहां 35 वर्षों से कार्यरत हैं लाखों गंभीर से गंभीर मरीज यहां से ठीक होकर गए हैं। अस्पताल का संचालन शुरू कराया जाना चाहिए। कर्मचारी संघ अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि यदि संजय गांधी अस्पताल का लाइसेंस बहाल नहीं होता तो हम लोग अपनी अंतिम सांस तक आर पार की लड़ाई लड़ेंगे।
इस मौके पर संजय सिंह, अरविंद श्रीवास्तव, चंद्रभान पांडेय, विनोद कुमारी सिंह, विपिन श्रीवास्तव, बृजेश कुमार सिंह, सीमा यादव, अवधेश तिवारी, सूरज शुक्ल, शिवांशु, मंजू नायर, शिव प्रकाश, साधना, कामाख्या, गुड्डी देवी, ममता समेत कर्मचारी संघ पैरामेडिकल स्टाफ नर्सिंग स्टाफ समेत कॉन्ट्रैक्ट वर्कर मौजूद रहे।