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UP: बिहार नतीजों से सपा को भी लेना होगा सबक, भाजपा की रणनीति और कांग्रेस से दोस्ती पर पार्टी को करना होगा मंथन
Sat, 15 Nov 2025 08:55 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 15 Nov 2025 08:55 AM IST
सार
बिहार के नतीजों से समाजवादी पार्टी को भी सबक लेना होगा। भाजपा की रणनीति और कांग्रेस से दोस्ती पर सपा को मंथन करना होगा। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था पर चुनाव से पहले जनता का भरोसा जीतना सपा के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
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अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार में महागठबंधन के फ्लॉप होने पर सपा को भी इससे सबक लेना होगा। भाजपा की रणनीति पर जहां गहराई से गौर करना होगा, वहीं कांग्रेस से दोस्ती पर मंथन भी जरूरी है। बिहार के नतीजों के बाद सपा के अंदर से ही ये बातें उठने लगी हैं। हालांकि, सपा नेतृत्व ने बिहार के नतीजों के लिए एसआईआर को जिम्मेदार ठहराया है।
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के प्रो. संजय गुप्ता कहते हैं कि भाजपा दोतरफा मार कर रही है। एक, मुफ्त में लाभ वाली योजनाओं पर उसका जोर है, तो दूसरा विपक्षी पार्टियों पर कानून-व्यवस्था को लेकर चोट कर रही है।
सपा को इन दोनों बातों को ध्यान में रखना होगा। उसे खुलकर कहना होगा कि जो कानून के साथ, पार्टी उनके साथ। बिहार चुनाव में भाजपा नेतृत्व ने लालू राज की अराजकताओं को याद दिलाकर वोटरों को अपने पक्ष में करने में सफलता हासिल की।
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बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस के साथ काफी असहज स्थिति रही। कई जगह पर दोनों दल आमने-सामने आ गए।
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उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र के प्रो. संजय गुप्ता कहते हैं कि भाजपा दोतरफा मार कर रही है। एक, मुफ्त में लाभ वाली योजनाओं पर उसका जोर है, तो दूसरा विपक्षी पार्टियों पर कानून-व्यवस्था को लेकर चोट कर रही है।
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सपा को इन दोनों बातों को ध्यान में रखना होगा। उसे खुलकर कहना होगा कि जो कानून के साथ, पार्टी उनके साथ। बिहार चुनाव में भाजपा नेतृत्व ने लालू राज की अराजकताओं को याद दिलाकर वोटरों को अपने पक्ष में करने में सफलता हासिल की।
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बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस के साथ काफी असहज स्थिति रही। कई जगह पर दोनों दल आमने-सामने आ गए।
'अधिकांश राज्यों में कांग्रेस का न संगठन बचा है और न ही जनाधार'
जबकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अधिकांश राज्यों में कांग्रेस का न संगठन बचा है और न ही जनाधार। बिहार चुनाव ने एक बार फिर इसे साबित कर दिया। अब यह दीगर है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को लेकर यही बात नहीं कही जा सकती है।
जबकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अधिकांश राज्यों में कांग्रेस का न संगठन बचा है और न ही जनाधार। बिहार चुनाव ने एक बार फिर इसे साबित कर दिया। अब यह दीगर है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को लेकर यही बात नहीं कही जा सकती है।
'जनता का भरोसा जीतना सपा के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं'
इसलिए उत्तर प्रदेश के लिए अपनी रणनीति तय करते समय कांग्रेस को लेकर सपा नेतृत्व को इन बातों को ध्यान में रखना होगा। पूर्व में रहीं सपा सरकारों के काम जनता के मन में पार्टी के लिए सकारात्मक भाव पैदा कर सकते हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था के सवाल पर चुनाव से पहले जनता का भरोसा जीतना सपा के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
इसलिए उत्तर प्रदेश के लिए अपनी रणनीति तय करते समय कांग्रेस को लेकर सपा नेतृत्व को इन बातों को ध्यान में रखना होगा। पूर्व में रहीं सपा सरकारों के काम जनता के मन में पार्टी के लिए सकारात्मक भाव पैदा कर सकते हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था के सवाल पर चुनाव से पहले जनता का भरोसा जीतना सपा के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
जेएनयू के सेवानिवृत्त प्रो. रवि श्रीवास्तव कहते हैं कि विगत लोकसभा चुनाव में सपा बेहतर परिणाम देकर खुद की रणनीति की सफलता साबित कर चुकी है, लेकिन ध्यान रखना होगा कि कानून-व्यवस्था लोकसभा चुनाव का नहीं, बल्कि राज्यों के चुनाव का विषय ज्यादा होता है।
बिहार में 16% रहा अखिलेश का स्ट्राइक रेट
बिहार में राजद ने जितनी सीटें जीतीं, उसमें सपा का 16 प्रतिशत योगदान रहा। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 25 विधानसभा क्षेत्रों में आठ दिन लगातार जनसभाएं कीं। इसमें से महज चार सीटों पर ही राजद जीती। शेष 21 सीटों पर एनडीए की आंधी चली।
बिहार में राजद ने जितनी सीटें जीतीं, उसमें सपा का 16 प्रतिशत योगदान रहा। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 25 विधानसभा क्षेत्रों में आठ दिन लगातार जनसभाएं कीं। इसमें से महज चार सीटों पर ही राजद जीती। शेष 21 सीटों पर एनडीए की आंधी चली।
दिलचस्प संयोग यह है कि बिहार में राजद ने 25 सीटें जीती हैं और अखिलेश यादव ने भी 25 सीटों पर ही चुनाव प्रचार किया। हालांकि, राजद ने जो 25 सीटें जीती हैं और जहां अखिलेश ने प्रचार किया, उनमें 4 सीटें ही कॉमन हैं।
इस तरह से कह सकते हैं कि जहां अखिलेश का स्ट्राइक रेट 16 प्रतिशत रहा, वहीं बिहार में राजद को सीट दिलाने में भी सपा अध्यक्ष का 16 प्रतिशत योगदान रहा। अखिलेश जिन सीटों पर प्रचार में गए, उनमें से रघुनाथपुर, बोधगया, रफीगंज और बिसफी में राजद के उम्मीदवार जीते। हालांकि, अखिलेश यादव ने बिहार में महागठबंधन की हार के लिए एसआईआर को जिम्मेदार ठहराया है।