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पहली बार लखनऊ में रालोद का बड़ा सम्मेलन: अखिलेश को जयंत की चुनौती, जाट व गुर्जर के साथ ब्राह्मणों को साधेंगे

Sun, 30 Aug 2026 10:09 AM IST
Sharukh Khan अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Sharukh Khan Updated Sun, 30 Aug 2026 10:09 AM IST
सार

आज लखनऊ में रालोद में शक्ति प्रदर्शन होगा। जयंत चौधरी का पहली बार यह बड़ा सम्मेलन होगा। पूर्वाचल के ब्राह्मण नेता बीके शुक्ला के साथ 1500 ब्राह्मण जुटेंगे।

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RLD show of strength in Lucknow Jayant Yadav first major rally
uttar pradesh assembly election - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट राजनीति के जरिये अपनी पहचान बनाने वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने अब ब्राह्मण मतदाताओं के बीच भी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच बढ़ती तल्खी के बीच 30 अगस्त को लखनऊ में होने वाला रालोद का राष्ट्रीय सम्मेलन इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सम्मेलन में करीब 1500 ब्राह्मणों को जुटाने की तैयारी है।
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पूर्वांचल के कद्दावर ब्राह्मण नेता बीके शुक्ला की मौजूदगी के साथ रालोद राजधानी से सपा को सियासी चुनौती देगा। यह पहली बार है जब जयंत चौधरी लखनऊ में इतने बड़े स्तर पर पार्टी का सम्मेलन कर रहे हैं। हाल में सपा ने जनेश्वर मिश्र की जयंती के जरिये ब्राह्मण समाज को राजनीतिक संदेश दे चुकी है। ऐसे में ब्राह्मणों की बड़ी भागीदारी वाला जयंत का सम्मेलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जयंत के मंच पर पहुंचने के दौरान 21 बटुक स्वस्तिवाचन करेंगे।
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रालोद की ब्राह्मण राजनीति में पूर्वांचल को विशेष महत्व दिया गया है। स्नातक राजनीति से जुड़े बीके शुक्ला का पार्टी से जुड़ना इसी रणनीति का हिस्सा है। शुक्ला स्नातक क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं और वित्तविहीन विद्यालय संघ के अध्यक्ष हैं। रालोद का पारंपरिक आधार पश्चिमी यूपी के जाट मतदाताओं के बीच रहा है। अब ब्राह्मणों के बीच सक्रियता बढ़ाकर पार्टी सामाजिक आधार का विस्तार करना चाहती है, जिसका लाभ मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मिल सकता है।

 

अखिलेश यादव के रालोद को लेकर दिए गए 'चवन्नी को रुपया बनाने' वाले बयान के बाद दोनों दलों की तल्खी और बढ़ गई है। तीन सितंबर को जयंत चौधरी सहारनपुर में गुर्जर सम्मेलन करेंगे। इससे पहले लखनऊ में ब्राह्मणों की भागीदारी वाला राष्ट्रीय सम्मेलन कर रालोद 2027 के लिए अपना नया सामाजिक समीकरण पेश करेगा। पार्टी जाटों के साथ ब्राह्मण और गुर्जर मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
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चवन्नी से रुपया वाले बयान के बाद बढ़ी तल्खी
अखिलेश के रालोद को लेकर दिए गए ‘चवन्नी को रुपया बनाने’ वाले बयान के बाद दोनों दलों की तल्खी और बढ़ गई है। तीन सितंबर को जयंत चौधरी सहारनपुर में गुर्जर सम्मेलन करेंगे। इससे पहले लखनऊ में ब्राह्मणों की भागीदारी वाला राष्ट्रीय सम्मेलन कर रालोद 2027 के लिए अपना नया सामाजिक समीकरण पेश करेगा।  

 

2027 में पिछली बार से अधिक विस सीटें जीतेंगे : मिश्रा
रालोद के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अनुपम मिश्रा के मुताबिक, 2027 में रालोद पहले से बेहतर तरीके से चुनाव लड़ेगी और पिछली बार से अधिक सीटें जीतेगी। 2022 में सपा गठबंधन के तहत रालोद ने 33 सीटों पर चुनाव लड़ा था और आठ सीटें जीती थीं। बाद में उपचुनाव में एक सीट जीतने के बाद विधानसभा में पार्टी की संख्या बढ़कर नौ हो गई।
 
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