छात्रा चीख रही थी और हैवान उसे टैंपों में घसीट रहे थे, सामने आया सच
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लखनऊ में आईआईएम रोड पर रेप की कोशिश के बाद बीए छात्रा की हत्या के मामले में पर चश्मदीद ने खौफनाक सच का खुलासा किया। अंकित ने बताया कि रात को जिस टैंपो में छात्रा जा रही थी, उसके ठीक पीछे टाटा मैजिक वाहन में वह भी घर लौट रहा था। वह टाटा मैजिक वाहन से उतरा तो देखा कि छात्रा की मां और छोटा भाई कुछ दूर पर खड़े थे। उसने मैजिक चालक को 100 रुपये का नोट दिया। चालक ने 10 रुपये लौटाए।
इसी बीच छात्रा की चीखें इलाके में गूंजने लगीं। अंकित ने देखा कि टैंपो में कोई युवती है जो बाहर निकलने की कोशिश कर रही है। उसने एक हाथ बाहर निकले देखा। टैंपो में बदमाश उसे भीतर खींच रहे थे।
चीखें सुनकर सड़क पर खड़ी महिला और उसका बेटा शोर मचाते हुए पैदल ही टैंपो के पीछे दौड़े तो अंकित को माजरा समझते देर न लगी। उसने मैजिक चालक से कहा कि छात्रा उसकी भतीजी लगती है और घर के पास ही रहती है। टैंपो का पीछा करो। तब तक छात्रा की मां और भाई भी मदद मांगने मैजिक के पास आ गए। उसने दोनों को वाहन में बैठाकर टैंपो का पीछा शुरू किया था।
मां के कानों में गूंज रही बेटी की चीखें
छात्रा की मां की हालत किसी की भी आंखें भिगो दे। रात का माहौल रह-रहकर उन्हें चौंका देता है। बेटी की ...मां बचाओ, मुझे बचा लो मां... चीखें उनके कानों में गूंज रही हैं। वह बार-बार चौंक उठती हैं। दोनों हाथ उठाकर बेटी-बेटी कहते हुए दौड़ने लगती हैं। बहनों का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
एक बार में नहीं दर्ज होगा मुकदमा, 10-12 बार आना पड़ेगा
वहीं, छात्रा की हत्या के मामले में कार्रवाई को लेकर राजधानी पुलिस ने एक बार फिर घोर लापरवाही बरती। परिवारीजनों ने शुक्रवार रात ही पुलिस कंट्रोलरूम को फोन कर सूचना दी लेकिन, यूपी 100 सेवा की पीआरवी पौन घंटे बाद मौके पर पहुंची। मड़ियांव पुलिस ने तो और भी हद कर दी।
शनिवार दोपहर सोशल मीडिया पर गंभीर रूप से घायल छात्रा की मौत का मैसेज वायरल होने के बाद इंस्पेक्टर राघवन सिंह अस्पताल पहुंचे। उधर, मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने छात्रा के मामा मड़ियांव कोतवाली पहुंचे तो मुंशी ने टरका दिया। उसने कहा कि एक बार में मुकदमा नहीं लिखा जाता। दौड़ना पड़ता है। 10-12 चक्कर लगाने पर लिखापढ़ी होती है।
छात्रा के साथ हुई संवेदनशील घटना पर तत्काल कार्रवाई करने के बजाए राजधानी पुलिस ने शर्मसार करने वाली हरकतें कीं। छात्रा के परिवारीजनों ने बताया कि रात को पुलिस को फोन कर सूचना दी गई थी, लेकिन कोई नहीं आया।
पीआरवी ने सही ढंग से नहीं निभाई अपनी ड्यूटी
पौन घंटे बाद जब पीआरवी मौके पर पहुंची, तब तक परिवारीजन व ग्रामीण गंभीर रूप से घायल छात्रा को लेकर अस्पताल जा चुके थे। पीआरवी ने भी अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभाई और खानापूरी करके चली गई। मड़ियांव पुलिस को तो वारदात के 14 घंटे बाद तक कुछ पता हीं नहीं था।
शनिवार दोपहर 12 बजे के आसपास छात्रा की मौत के मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल होने पर इंस्पेक्टर राघवन सिंह की नींद टूटी और आनन-फानन अस्पताल पहुंचकर उन्होंने परिवारीजनों से संपर्क किया। एसएसपी दीपक कुमार और अन्य अधिकारियों ने छात्रा के परिवारीजनों से बातचीत की और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
हालांकि, मड़ियांव कोतवाली की पुलिस का रवैया तब भी नहीं सुधरा। छात्रा के मामा केस दर्ज कराने कोतवाली पहुंचे तो ड्यूटी पर तैनात मुंशी ने उन्हें टरका दिया। पीड़ित का कहना है कि वह मुंशी का नाम नहीं देख सके लेकिन, सामने आने पर पहचान लेंगे।
एसएसपी का कहना है कि पुलिस को कब सूचना मिली और क्या रिस्पांस टाइम रहा? घटनास्थल पर कौन पुलिसकर्मी पहुंचा था? इस बारे में पड़ताल कराई जा रही है। परिवारीजन अगर पुलिसकर्मियों की लापरवाही और अभद्रता की शिकायत करेंगे तो जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दरिंदों से 15 मिनट तक जूझती रही छात्रा
आईएम रोड पर टैंपो सवार दरिंदों से अकेली छात्रा करीब 15 मिनट तक जूझती रही। अपनी इज्जत बचाने के लिए वह चीखी लेकिन दूर-दूर तक कोई भी ऐसा नहीं था जो उसकी मदद कर सके। दरिंदे छात्रा को नोंचते-खसोटते रहे।
अगर छात्रा की मां और भाई सड़क पर इंतजार न कर रहे होते तो शायद दरिंदे अपने इरादों में कामयाब हो जाते और रेप के बाद छात्रा की हत्या करके शव कहीं छिपा देते। वारदात दुबग्गा के टैंपो स्टैंड से आईआईएम रोड स्थित कैरियर डेंटल कॉलेज के बीच हुई। दोनों के बीच की दूरी करीब तीन किलोमीटर है।
पुलिस का मानना है कि स्टैंड से छात्रा के साथ अन्य सवारियां भी बैठी होंगी। रास्ते में सभी सवारियों के उतरने के बाद ही दरिंदों ने छात्रा को निशाना बनाया होगा। छात्रा की मां व भाई आईआईएम रोड पर पानी की टंकी के पास स्थित एक पार्क के सामने उसका इंतजार कर रहे थे। यहां से कुछ ही दूरी पर कैरियर डेंटल कॉलेज है।
परिवारीजनों की आशंका है कि करीब दो किलोमीटर सुनसान इलाके में छात्रा के साथ दरिंदों ने हैवानियत की। रात को यह रास्ता तय करने में लगभग 15 मिनट लगते हैं। परिवारीजनों का कहना है कि इस अवधि तक छात्रा दरिंदों से जूझती रही होगी। अगर उसकी मां और भाई सड़क पर खड़े न होते तो शव मिलना भी मुश्किल हो जाता।
आईआईएम रोड पर शाम ढलते ही कायम हो जाता है जंगलराज
आईआईएम रोड पर शाम ढलते ही जंगलराज कायम हो जाता है। यहां गश्त की व्यवस्था है न पिकेट का इंतजाम। दो साल के दौरान आईआईएम रोड पर जघन्य वारदातें हुईं। चार दिसंबर 2015 की रात कैरियर डेंटल कॉलेज के पास तालाब किनारे तीन बोरे में दो महिलाओं के शरीर के कटे हुए टुकड़े मिलने का राज अब भी अनसुलझा है। इससे एक दिन पहले ही सीतापुर में ट्रॉलीबैग में दो युवतियों के सिर मिले थे।
टैंपो में लावारिस हालत में गड्ढे में फंसा मिला
एसएसपी ने बताया कि जिस टैंपो में छात्रा के साथ घटना हुई, वह कुछ दूर पर लावारिस हालत में गड्ढे में पड़ा मिला। ऐसा लग रहा है कि भागते वक्त टैंपो बेकाबू होकर पलट गया और बदमाश पैदल ही भाग गए। छानबीन में पता चला कि टैंपो बीकेटी के सरैया गांव के राजू का है।
पुलिस टीम राजू के घर पहुंची तो पता चला कि कुछ दिन पहले उसकी मौत हो चुकी है। टैंपो उसकी बेटी क्रांति चलवाती है। दिन की शिफ्ट में इटौंजा का पप्पू और रात की शिफ्ट में बीकेटी का सोनू उर्फ गुड्डू टैंपो चलाता है। शुक्रवार रात सोनू ही टैंपो लेकर गया था। पुलिस सोनू के घर पहुंची, जहां उसका भाई सर्वेश मिल गया।
बदमाश ने कहा मोबाइल, पर्स लूटने के दौरान गिरी थी छात्रा
जघन्य वारदात में गिरफ्तार सर्वेश ने कुछ और ही कहानी बताई है। एएसपी ट्रांस गोमती हरेंद्र कुमार के मुताबिक, सर्वेश ने कुबूला कि छात्रा दुबग्गा स्टैंड से टैंपो में बैठी थी। साथ में दो महिला सवारी के अलावा सर्वेश और उसके घर के पास रहने वाला 14 वर्षीय किशोर भी था।
दोनों महिलाएं जॉगर्स पार्क के पास उतर गईं। इसके बाद टैंपो में छात्रा के अलावा चालक सोनू, उसका भाई सर्वेश और किशोर रह गए। सर्वेश का कहना है कि किशोर ने छात्रा का मोबाइल-पर्स छीनने की कोशिश की।
विरोध पर गुत्थमगुत्था हो गई। इस दौरान छात्रा अपनी मां को देख चीखने लगी। सोनू ने घबराकर टैंपो आगे बढ़ा दिया। इस बीच पीछे से आ रहे वाहन से लोग टैंपो का पीछा करने लगे तो सबके होश उड़ गए।
डेढ़ किलोमीटर आगे छीना-झपटी के दौरान छात्रा टैंपो से गिर गई। हालांकि, सर्वेश की कहानी परिस्थितियों से मेल नहीं खा रही। छात्रा के शरीर पर आई खरोंचे और उसके कपड़ों की हालत उसके साथ ही हुई दरिंदगी की गवाही दे रही हैं।
अपराध का अड्डा बने अवैध टैंपो स्टैंड
मड़ियांव में शुक्रवार रात युवती के साथ जो कुछ भी हुआ, उसके लिए अपराध का अड्डा बने अवैध टैंपो स्टैंड भी जिम्मेदार हैं।
राजधानी में खुलेआम पुलिस, स्टैंड ठेकेदार और चालक यूनियन की साठगांठ से आसपास के जिलों के डीजल टैंपो का खुलेआम संचालन हो रहा है।
यह हाल तब है जब आरटीओ दावा करते हैं कि राजधान में डीजल चालित टैंपों नहीं चल रहे और दूसरी ओर परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बीते दिनों दूसरे जिले के टैंपों का संचालन बंद करने आदेश दिया है।
मड़ियांव थाने के पास बने अवैध स्टैंड से सीतापुर (यूपी 34) के सबसे अधिक अवैध टैंपो रफ्तार भर रहे हैं। अवैध संचालन के साथ-साथ स्टैंड ठेकेदार और संचालकों की गुंडई भी चरम पर है। बीते दिनों एआरटीओ ने डीजल टैंपो को सीज किया तो उसकी घेराबंदी कर हमला कर दिया गया। एआरटीओ ने मड़ियांव थाने में केस दर्ज कराया पर पुलिस ने मामले को दबा दिया।
यातायात पुलिस व थाने की सरपरस्ती
मड़ियांव थाना के पास फ्लाईओवर के नीचे से सीतापुर रोड के बीकेटी, इटौंजा, सिधौली, टेढ़ी पुलिया, कैसरबाग वाया पक्का पुल खदरा होकर डीजल के अवैध टैंपो सुबह से शाम तक सवारियां ढो रहे हैं। इसकी खुली सरपरस्ती यातायात पुलिस और इलाकाई थाने की है।
मड़ियांव थाने के पास से सीतापुर और बाराबंकी जिले के अवैध टैंपो चल रहे। सीतापुर जिले के कुछ टैंपो नीबू पार्क के पास से नक्खास एवं मेडिकल कॉलेज और दुबग्गा तक सवारियां को ढोने में लगे हैं।
छठे मील से वाया आईआईएम रोड से दुबग्गा तक सीतापुर के टैंपो का अवैध संचालन पुलिस ने अभी छह महीने पहले ही शुरू कराया है। करीब 15 किमी की दूरी के लिए 100 से अधिक टैंपो का संचालन हो रहा।
फोर्स मिले तो करेंगे कार्रवाई
परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने गैर जिलों के डीजल से चलने वाले टैंपो को जब्त करने के निर्देश दिया, लेकिन चेकिंग दस्ते को इलाकाई पुलिस का फोर्स नहीं मिल सका जिसके कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है। परिवहन आयुक्त के. रवींद्र नायक ने बताया कि चेकिंग दस्ते को एसएसपी से बात करके पुलिस फोर्स मुहैया कराकर अवैध टैंपो का संचालन बंद कराया जाएगा।