फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   rajya sabha election will make a huge change in politics

सजती दिख रही यूपी की भावी सियासत की तस्वीर, कांग्रेस की मुसीबत, भाजपा और सपा...

Fri, 30 Oct 2020 11:20 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 30 Oct 2020 11:20 AM IST
विज्ञापन
rajya sabha election will make a huge change in politics
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

राज्यसभा चुनाव के घटनाक्रम ने प्रदेश में जिस तरह नए सियासी समीकरणों को जन्म दिया है, उससे प्रदेश की भावी सियासत की तस्वीर सजती दिखाई देने लगी है। वैसे तो राजनीति में कोई घटनाक्रम स्थायी नहीं होता है, लेकिन जिस तरह बसपा सुप्रीमो मायावती सपा पर आक्रामक हुई हैं और सपा की तरफ से बसपा में बगावत को हवा दी गई है उसको देखते हुए प्रदेश में 2022 का मुख्य सियासी मुकाबला भाजपा बनाम सपा के बीच होने के आसार बनने लगे हैं।

विज्ञापन


जिसमें ध्रुवीकरण की सुगबुगाहट भी सुनाई देने लगी है। यह सुगबुगाहट कांग्रेस, रालोद और अन्य भाजपा विरोधी दलों के लिए कड़ी तथा बड़ी चुनौती लेकर आई है। खासतौर से कांग्रेस के लिए जो बीते तीन-साढ़े तीन महीने से प्रदेश सरकार पर हमला बोलने की होड़ में आगे दिख रही थी।
विज्ञापन


ताजा घटनाक्रम से बदली परिस्थितियां किसी न किसी रूप में कांग्रेस को सपा के पाले में खड़े होने के लिए सियासी तौर पर मजबूर करती दिख रही हैं। ऐसा न करने पर उसे नए समीकरणों में अस्तित्व के लिए भी जूझना पड़ सकता है। साथ ही भाजपा विरोधी वोटों में बिखराव का आरोप सुनना पड़ सकता है। वैसे भी आज की स्थिति में तमाम दावों के बावजूद वह उत्तर प्रदेश में अभी अकेले अपने दम पर कोई  सियासी चमत्कार करने की स्थिति में नहीं दिखती।

विज्ञापन
विज्ञापन

मायावती व भाजपा का साथ

rajya sabha election will make a huge change in politics
बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala

मायावती ने भले ही बसपा के भाजपा को समर्थन का उल्लेख विधान परिषद चुनाव को लेकर किया हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे इतना ही नहीं मानते। उनका साफ मानना है कि सपा की चोट से तिलमिलाई मायावती अब किसी कीमत पर सपा को सबक सिखाना चाहती हैं।

 

सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ  सोसाइटी एंड पॉलिटिक्स कानपुर के निदेशक वरिष्ठ राजनीति शास्त्री डॉ. ए.के. वर्मा भी कहते हैं कि मायावती प्रदेश की राजनीतिक जमीनी हकीकत समझ चुकी हैं। उन्हें भलीभांति मालूम है कि अनुसूचित जातियों के बीच भाजपा गहरी पकड़ व पैठ बना चुकी है।
 

मायावती 2019 के लोकसभा चुनाव से यह सच भी समझ चुकी हैं कि सपा का मुख्य वोट यादव और उनके समर्थकों का जमीन पर एकजुट होना बहुत मुश्किल है। इसलिए भी उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान घटे घटनाक्रम के मद्देनजर भाजपा को लेकर अपनी नरमी सार्वजनिक कर दी है ताकि वह सपा से हिसाब-किताब बराबर कर सकें और अनुसूचित जाति की नेता का रुतबा भी बना रहे।

ये समीकरण भी हैं खास

rajya sabha election will make a huge change in politics
प्रतीकात्मक तस्वीर

राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पास नौ उम्मीदवार जिता लेने के ताकत होने के बावजूद सिर्फ आठ प्रत्याशी उतारना और फिर नामांकन पत्रों की जांच के दौरान घटे घटनाक्रम ने अब साफ कर दिया है कि इसकी डोर कहीं न कहीं 2022 के चुनाव के समीकरणों से जुड़ी है।

 

भाजपा की तरफ से सपा के समर्थन से मैदान में उतरे प्रकाश बजाज के नामांकन पत्र की वैधता पर आपत्ति उठाना और अब बसपा के विधायकों को सपा द्वारा तोड़े जाने के बाद मायावती का यह एलान कि वह विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी को हराने के लिए भाजपा का भी साथ दे सकती हैं, बताता है कि भगवा टोली की रणनीति सफल रही है।
 

गैर भाजपावाद का नारा लगाने वाला विपक्ष फिलहाल गैर सपावाद और गैर बसपावाद में उलझ गया है। जिसमें गैर सपावाद के पैरोकारों का भाजपा के पाले में खड़े होना मजबूरी हो गया है तो गैर बसपावाद के पैरोकारों के लिए सपा का साथ देना राजनीतिक मजबूरी बन गया है। 

इसलिए भी कांग्रेस के सामने कड़ी चुनौती

rajya sabha election will make a huge change in politics
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : file photo

मायावती की सपा से नाराजगी और भाजपा के साथ सहानुभूति प्रदेश में स्वत: ध्रुवीकरण की स्थितियों का निर्माण करेगी। यह किसी से छिपा नहीं है कि प्रदेश का मुसलमान भाजपा को हराने की प्राथमिकता के साथ वोट करता है। अभी तक उसके सामने प्रदेश में सपा के साथ बसपा भी विकल्प थी।

 

पर, यह बात प्रदेश का आम आदमी भी जानता है कि मायावती का सपा को हराने का एलान मुसलमानों को सपा के पक्ष में लामबंद करेगा। उधर, मायावती का सपा को रोकने का प्रयास अनुसूचित जातियों के बीच भाजपा की पकड़ व पहुंच बढ़ाएगा। साथ ही भगवा टोली के रणनीतिकारों को हिंदुत्व के ध्रुवीकरण में भी मदद पहुंचाएगा।
 

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि जिस समय कांग्रेस राज्यसभा चुनाव के दौरान घटे घटनाक्रम को लेकर बसपा पर निशाना साध रही थी उसी दौरान राजधानी से सटे उन्नाव से उसकी सांसद रही अन्नू टंडन ने पार्टी छोड़ने का एलान कर यह बता दिया है कि कांग्रेस में भी सब कुछ ठीक नहीं है।

उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर जिस तरह निशाना साधा है वह देश की इस सबसे पुरानी पार्टी के लिए कम से कम उत्तर प्रदेश में बड़ी चेतावनी है। वैसे भी कांग्रेस यदि सपा से अलग होकर लड़ती है तो वह भाजपा का ही लाभ करेगी जो शायद वह नहीं करना चाहेगी। ऐसी स्थिति में उसके सामने फिलहाल सपा के साथ खड़े होने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं दिखता। यही मजबूरी भाजपा विरोधी अन्य दलों की भी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed