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Raebareli: सोनिया के सामने दूसरे नंबर के लिए लड़े विरोधी दलों के सूरमा, प्रियंका की उम्मीदवारी पर लग रहे कयास

Fri, 19 Apr 2024 01:41 PM IST
ishwar ashish मनोज ओझा, अमर उजाला, रायबरेली
मनोज ओझा, अमर उजाला, रायबरेली Published by: ishwar ashish Updated Fri, 19 Apr 2024 01:41 PM IST
सार

रायबरेली लोकसभा सीट पर पांच चुनावों में भाजपा व सपा दो-दो बार और बसपा एक बार दूसरे नंबर पर रही। रायबरेली की जनता ने जब भी किसी दल का साथ दिया खुलकर दिया।

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Raebareli: Sonia Gandhi gets 80 percent votes on Raebareli seat.
सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

रायबरेली ने जब भी जिसका साथ दिया खुलकर दिया। गांधी परिवार को तो हमेशा जिले के वोटरों ने सिर आंखों पर बिठाया, लेकिन सोनिया गांधी को लेकर लहर 2004 से इस कदर दिखी कि गैर कांग्रेसी दलों को दूसरे नंबर के लिए जंग करनी पड़ी। पिछले पांच चुनावों में सोनिया के सामने भाजपा व सपा के दो-दो और बसपा के एक सूरमा की कांग्रेस से सीधी टक्कर हुई। भाजपा और बसपा के प्रत्याशियों को अपनी जमानत बचाने के लिए जंग करनी पड़ी, लेकिन ज्यादातर चुनावों में बसपा टॉप-3 धुरंधरों में शामिल रही। पांच चुनावों में मात्र दो बार ही भाजपा प्रत्याशी अपनी जमानत बचाने में सफल रहे।

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बसपा के धुरंधर ने वर्ष 2009 के चुनाव में जमानत बचाई लेकिन भाजपा के रास्ते में रोड़ा बनकर पछाड़ने का जरूर प्रयास किया। इसी का नतीजा रहा कि वर्ष 2019 के चुनाव में बसपा मैदान में नहीं आई तो भाजपा प्रत्याशी को वर्ष 2014 के चुनाव की तुलना में दूने से भी अधिक वोट मिल गए। 2014 में भाजपा के अजय अग्रवाल को 1,73,721 मत मिले थे, जबकि 2019 में भाजपा प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह को 3,67,740 मत मिले। 80 प्रत्याशियों में मात्र चार धुरंधर ही लाज बचा सके।
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2006 के चुनाव में कोई नहीं बचा पाया जमानत
लाभ के पद का आरोप लगने के बाद वर्ष 2014 के चुनाव के बाद सोनिया गांधी ने इस्तीफा दे दिया था। 2006 में उप चुनाव हुआ था। सोनिया के लिए यह ऐतिहासिक चुनाव रहा। गांधी परिवार के पक्ष में ऐसी लहर दौड़ी कि सोनिया छोड़ भाजपा के विनय कटियार और सपा के राजकुमार सहित सभी 14 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व अयोध्या से कई बार सांसद रहे विनय कटियार की जमानत 2006 के चुनाव में नहीं बची। उन्हें मात्र 19657 वोट ही मिल सके थे। इस चुनाव में सोनिया को 80 प्रतिशत से भी अधिक मत मिले थे।

जब भी भाजपा जीती कांग्रेस ढूंढे़ नहीं मिली
- वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के अशोक सिंह ने 163390 वोट पाकर संसद पहुंचे। इस चुनाव में कांग्रेस के विक्रम कौल 25457 वोटों पर सिमट गए। सपा के अशोक सिंह दूसरे और बसपा के बाबू लाल लोधी तीसरे स्थान पर रहे। 1998 में भाजपा के अशोक सिंह 237204 वोट पाकर दूसरी बार जीते। इस चुनाव में कांग्रेस की दीपा कौल को मात्र 49615 वोट मिले थे। सपा के सुरेंद्र सिंह दूसरे और बसपा के रमेश मौर्या तीसरे स्थान पर थे। दीपा कौल की जमानत जब्त हो गई थी। दोनों चुनावों में कांग्रेस चौथे स्थान पर ही रहा।

...इस बार सोनिया मैदान में नहीं
- 2006 के उप चुनाव में 80 प्रतिशत से अधिक वोट पाकर सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त करने वाली सोनिया गांधी 2024 के चुनाव में मैदान में नहीं होंगी, क्योंकि वे राज्यसभा में चली गई हैं। यदि प्रियंका वाड्रा रायबरेली संसदीय सीट पर मैदान में उतरती हैं तो उनके सामने मां सोनिया के 2006 के रिकॉर्ड को तोड़ने का बड़ा टास्क होगा। हालांकि, कांग्रेस के गिरे ग्राफ के सामने ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा। फिर भी यह चुनाव है, वोटर कोई भी गुल खिला सकते हैं।

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