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यूपी: मानवाधिकार आयोग में अफसरों-कर्मियों की तैनाती पर सवाल, जांच के आदेश, वित्तीय अनियमितता के भी आरोप

Fri, 18 Sep 2026 11:13 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Fri, 18 Sep 2026 11:13 AM IST
सार

मामले में उप सचिव अजीत कुमार सिन्हा ने आयोग के सचिव को शिकायत के बिंदुओं पर नियमानुसार कार्रवाई कर आख्या शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मामले में वित्तीय अनियमितता के भी आरोप लगे हैं।

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UP: Questions raised over the posting of officers and staff at the Human Rights Commission; probe ordered.
- फोटो : संवाद

विस्तार

उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अनुसंधान दल में अफसरों और कर्मचारियों की तैनाती को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। आयोग में नियुक्त रहे एक पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजी) और उनके अधीनस्थ अधिकारियों पर तैनाती व संबद्धता के नियमों की अनदेखी करने के साथ वित्तीय अनियमितता के भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायत का संज्ञान लेते हुए शासन के गृह (मानव अधिकार) अनुभाग-2 ने जांच के आदेश दिए हैं। शासन ने आयोग के सचिव को पत्र भेजकर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए आख्या मांगी है।

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लखनऊ निवासी शीतांशु पटेल आयोग के अनुसंधान दल में कार्यरत रहे हैं और वह इसी साल इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने शासन को दी शिकायत में कहा है कि मानवाधिकार आयोग और अन्य अल्पकालिक इकाइयों में प्रतिनियुक्ति व संबद्धता की सामान्य अवधि तीन वर्ष निर्धारित है। विशेष अर्हता होने पर विभागाध्यक्ष की अनुशंसा से इसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसके बावजूद आयोग में कई पुलिसकर्मियों को 11 से 13 साल तक संबद्ध रखा गया।
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कई जिलों से कर्मियों को आयोग में भेजने का दिया ब्योरा : शिकायत के साथ पुलिस मुख्यालय और शासन के विभिन्न आदेशों की प्रतियां भी लगाई गई हैं। इनमें 2008, 2013, 2015, 2019 और 2023 में बहराइच, प्रतापगढ़, अयोध्या और लखनऊ समेत अन्य स्थानों से उप निरीक्षकों व आरक्षियों के स्थानांतरण या संबद्धता से जुड़े आदेश शामिल हैं। शिकायत में संबंधित पुलिसकर्मियों की आयोग में तैनाती की अवधि का ब्योरा देकर जांच की मांग की गई है।

जांच आदेश के लंबे समय बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं : गृह (मानव अधिकार) अनुभाग-2 के उप सचिव अजीत कुमार सिन्हा ने आयोग के सचिव को शिकायत के बिंदुओं पर नियमानुसार कार्रवाई कर आख्या शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जांच में यह देखा जाना है कि लंबे समय तक संबद्धता किस आदेश और सक्षम अधिकारी की अनुमति से हुई। इसमें निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच के आदेश को लंबा समय बीतने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई और फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।

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