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लखनऊ विश्वविद्यालय :दो शोधपत्र छपने के बाद ही बन सकेंगे पीएचडी गाइड, नए आर्डिनेंस में रखी गई शर्त

Sun, 14 Feb 2021 11:47 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Feb 2021 11:47 PM IST
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Publication of two journals must for being Phd guide in LU
लखनऊ विश्वविद्यालय और ‌सहयुक्त कॉलेज के शिक्षक कम से कम दो शोधपत्र प्रकाशित होने के बाद ही बन सके
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय और सहयुक्त कॉलेज के शिक्षकों को पीएचडी गाइड बनने के लिए शोधपत्र प्रकाशन की शर्त का पालन भी करना होगा। लविवि के नए ऑर्डिनेंस के अनुसार पीएचडी गाइड बनने के लिए प्रोफेसर को न्यूनतम पांच तथा एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर के कम से कम दो शोधपत्र प्रकाशित होने चाहिए। ये शोधपत्र विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मान्य जर्नल में ही प्रकाशित होने पर मान्य किए जाएंगे। लविवि में इस साल के दाखिले इसी ऑर्डिनेंस के तहत होने हैं।
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लविवि के नए पीएचडी ऑर्डिनेंस को राजभवन की मंजूरी भी मिल चुकी है। इसके अनुसार हर साल पीएचडी में दाखिले होंगे। लविवि दाखिले की तैयारी भी शुरू कर चुका है। नए ऑर्डिनेंस के अनुसार न्यूनतम दो शोधपत्र प्रकाशन के बाद पीएचडी गाइड बनने का मौका मिलेगा। हालांकि, किसी विषय में जर्नल की संख्या कम होने पर कुलपति द्वारा उसमें छूट देने का प्रावधान किया गया है, लेकिन उचित कारण बताते हुए इसका आदेश जारी करना होगा। ऑर्डिनेंस में यह व्यवस्था है कि नए रिसर्च गाइड को इसका पूरा ब्यौरा देना होगा। पहले से पीएचडी करा रहे शिक्षकों के मामले में माना जाएगा कि वे शर्त पूरी करते हैं।
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विभाग का इकलौता शिक्षक भी करा सकेगा पीएचडी
लविवि में पीएचडी के नए ऑर्डिनेंस पर मुहर लग चुकी है। एक बड़े बदलाव के तहत इस बार कॉलेज के शिक्षकों को पीएचडी गाइड बनने में सहूलियत मिली है। अब कॉलेज में इकलौता शिक्षक होने के बाद भी पीएचडी गाइड बन सकेंगे। हालांकि, कॉलेज के उस विभाग में परास्नातक की पढ़ाई होनी चाहिए। साथ ही शिक्षक को उसमें पढ़ाना भी चाहिए। अभी तक विभाग में न्यूनतम दो शिक्षक होना अनिवार्य था।
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महिला शोधार्थियों को 240 दिन का मातृत्व अवकाश
नए ऑर्डिनेंस के तहत महिला शोधार्थियों को मातृत्व अवकाश के रूप में 240 दिन की छुट्टी शोध जमा करने की अधिकतम अवधि के दौरान दी जाए। ऑर्डिनेंस में पीएचडी की न्यूनतम अवधि 3 साल और अधिकतम 6 साल निर्धारित है। कुलपति को इस अवधि में एक साल की छूट देने का अधिकार दिया गया है। इसी तरह मातृत्व अवकाश की स्थिति में महिला शोधार्थी को भी एक साल तक की छूट देने की व्यवस्था है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होगा वाइवा
नई व्यवस्था के अनुसार अगर परीक्षक किसी कारण से वाइवा लेने नहीं आ सका है तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से इसकी व्यवस्था की जा सकती है। इसके साथ ही यह व्यवस्था भी होगी कि शोधार्थी अपना शोध ईमेल से भेज सके।
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