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Health News: धान की जड़ों में खोजा सुरक्षा कवच, अब चावल के दानों तक नहीं पहुंचेगा आर्सेनिक
Tue, 12 May 2026 08:55 AM IST
Bhupendra Singh
विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ
विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Tue, 12 May 2026 08:55 AM IST
सार
एनबीआरआई के वैज्ञानिकों ने आर्सेनिक रोकने वाला एक खास प्रोटीन 'ओएसईएलपी' खोजा है। आर्सेनिक युक्त चावल से किडनी, लिवर और हृदय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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धान की फसल। (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने चावल को आर्सेनिक मुक्त बनाने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। इस खोज से जल्द ही आर्सेनिक-फ्री धान की किस्में विकसित की जा सकेंगी, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित होगा।
संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध से पता चला है कि चावल में मौजूद एक विशेष प्रोटीन ''ओएसईएलपी'' धान की जड़ों में प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करता है। यह मिट्टी में मौजूद हानिकारक आर्सेनिक को जड़ों में ही रोक देता है। उसे चावल के दानों तक पहुंचने से रोकता है। इससे चावल में आर्सेनिक की मात्रा कम होती है और यह मानव स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित बनता है।
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संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध से पता चला है कि चावल में मौजूद एक विशेष प्रोटीन ''ओएसईएलपी'' धान की जड़ों में प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करता है। यह मिट्टी में मौजूद हानिकारक आर्सेनिक को जड़ों में ही रोक देता है। उसे चावल के दानों तक पहुंचने से रोकता है। इससे चावल में आर्सेनिक की मात्रा कम होती है और यह मानव स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित बनता है।
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एनबीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. देबाशीष चक्रवर्ती की अगुवाई में हुए इस शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘प्लांट, सेल एंड एनवायरनमेंट’ ने प्रकाशित किया है। शोध में वैज्ञानिक खुशबू चावड़ा, डॉ. वसीम सिद्दीकी, डॉ. दीपाली श्रीवास्तव, डॉ. मधु तिवारी, डॉ. सोनिक अंतो और डॉ. सौमित कुमार बेहरा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ऐसे काम करता है यह खास प्रोटीन
डॉ. देबाशीष ने बताया कि ''ओएसईएलपी प्रोटीन'' जड़ों के बाहरी हिस्से यानी एपोप्लास्ट में आर्सेनिक को रोककर उसके पौधे के ऊपरी हिस्सों यानी पौधे के तने, पत्तियों और अंततः चावल के दानों तक पहुंचने की प्रक्रिया को रोक देता है। इससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है, जैविक क्षमता बढ़ती है और आर्सेनिक तनाव सहने की शक्ति विकसित होती है।
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सेहत के लिए खतरनाक है आर्सेनिक
आर्सेनिक युक्त चावल का लगातार सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह धीरे-धीरे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। इससे किडनी, लिवर और हृदय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का जोखिम भी बढ़ जाता है। बच्चों में मानसिक और शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है। गर्भवतियों और गर्भस्थ के लिए भी यह बेहद हानिकारक माना जाता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर कर देता है।एनबीआरआई निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी ने बताया कि यह खोज खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि के लिए बड़ा कदम है। इससे भविष्य में करोड़ों लोगों को सुरक्षित और स्वस्थ चावल उपलब्ध कराने का रास्ता खुलेगा और पर्यावरण अनुकूल खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।