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Lucknow News: प्रो. हनुमान बने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति
Sun, 02 Mar 2025 10:00 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 02 Mar 2025 10:00 PM IST
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मिल्कीपुर। तहसील के बलारमऊ गांव निवासी प्रो. हनुमान प्रसाद शुक्ल ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति पद का कार्यभार ग्रहण किया है। प्रो. शुक्ल वर्तमान में हिंदी विश्वविद्यालय के तुलनात्मक साहित्य विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उच्च शिक्षा में अपनी बेहतर पहचान रखने वाले प्रो. शुक्ल हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति के आचार्य के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
तीन दशक से शोध, अकादमिक लेखन और शिक्षण में संलग्न हैं। अनेक पुस्तकों के लेखन-संपादन के साथ विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में शोध-पत्र प्रकाशित है। हाल ही में आई इनकी संपादित पुस्तक राष्ट्र, धर्म और संस्कृति काफी चर्चित हुई है। प्रो. शुक्ल का हिंदी विश्वविद्यालय में विभिन्न अकादमिक, प्रशासनिक एवं शैक्षिक दायित्वों के निर्वहन का लंबा अनुभव है। वर्तमान में भी अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभागाध्यक्ष, अनुवाद अध्ययन विभागाध्यक्ष, अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के अधिष्ठाता पद का दायित्व भी प्रो. शुक्ल संभाल रहे हैं।
प्रो.शुक्ल के अनुज पवन शुक्ल होकर कहते हैं कि बड़े भैया बचपन से ही शिक्षा के प्रति बहुत सजग रहें हैं और आज अपनी मेहनत, लगन, कर्मठता से एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय का नेतृत्व कर समस्त परिवारजनों एवं क्षेत्रवासियों को गौरवान्वित होने का अवसर दिया है।
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तीन दशक से शोध, अकादमिक लेखन और शिक्षण में संलग्न हैं। अनेक पुस्तकों के लेखन-संपादन के साथ विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में शोध-पत्र प्रकाशित है। हाल ही में आई इनकी संपादित पुस्तक राष्ट्र, धर्म और संस्कृति काफी चर्चित हुई है। प्रो. शुक्ल का हिंदी विश्वविद्यालय में विभिन्न अकादमिक, प्रशासनिक एवं शैक्षिक दायित्वों के निर्वहन का लंबा अनुभव है। वर्तमान में भी अंतरराष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभागाध्यक्ष, अनुवाद अध्ययन विभागाध्यक्ष, अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के अधिष्ठाता पद का दायित्व भी प्रो. शुक्ल संभाल रहे हैं।
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प्रो.शुक्ल के अनुज पवन शुक्ल होकर कहते हैं कि बड़े भैया बचपन से ही शिक्षा के प्रति बहुत सजग रहें हैं और आज अपनी मेहनत, लगन, कर्मठता से एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय का नेतृत्व कर समस्त परिवारजनों एवं क्षेत्रवासियों को गौरवान्वित होने का अवसर दिया है।
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