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बेटियों ने इस सरकारी स्कूल में पढ़ने से किया इंकार, यहां पढ़ना मतलब जान जोखिम में डालना

Tue, 10 Jul 2018 04:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 10 Jul 2018 04:15 PM IST
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poor condition of government girls inter college in malihabaad
मलिहाबाद राजकीय बालिका इंटर कॉलेज - फोटो : amarujala
मलिहाबाद नगर पंचायत में क्षेत्र का इकलौता बालिका विद्यालय। 78 साल पुराना और बेहद जर्जर। बावजूद इसके यहां कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। यहां पढ़ना मतलब जान जोखिम में डालना है। यह तब है जबकि सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को लेकर बेहद गंभीर है।
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लेकिन यूपी की राजधानी में ही जिम्मेदार सरकार के अभियान को ठेंगा दिखा रहे हैं। आखिरकार यहां पढ़ रही छात्राओं ने खुद बीड़ा उठाया और उपजिलाधिकारी को मांगपत्र सौंपकर भवन बनवाने की अपील की। यही नहीं, छात्राओं ने मरम्मत न होने पर यहां पढ़ने से भी इन्कार कर दिया है।
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मंगलवार को छात्राएं सांकेतिक रूप से यहां कक्षाओं का बहिष्कार करेंगी। मलिहाबाद नगर पंचायत के मोहल्ला झंडावाला में राजकीय इंटर कॉलेज के भवन का निर्माण वर्ष 1940 में हुआ था। 78 वर्ष गुजर जाने के बाद भी इस जर्जर भवन में कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है।
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यहां की तकरीबन 50 छात्राओं ने उपजिलाधिकारी को जो पत्र भेजा है, उसमें कहा गया है कि भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। ऐसे भवन में बैठने पर हर समय डर बना रहता है जिससे पढ़ाई सुचारू रूप से नहीं हो पा रही है। बारिश के मौसम में तो परेशानी और भी बढ़ जाती है। 

कई बार की शिकायत, नहीं हुई सुनवाई 

poor condition of government girls inter college in malihabaad
मलिहाबाद राजकीय बालिका इंटर कॉलेज - फोटो : amarujala
इस जर्जर विद्यालय की हालत इतनी खराब है कि छत का प्लास्टर उखड़ कर आएदिन गिरता रहता है। भवन में चार कमरे व एक बरामदा है। वही परिसर में खाली पड़ी जगह पर कुछ अभिभावकों ने टिन सेड डलवा दिए हैं जिसमें कक्षा 6 से कक्षा 12 तक की क्लास लगती है। इन्हीं कमरों व बरामदों में बैठकर करीब पांच से छह सौ बालिकाएं शिक्षा ग्रहण करती हैं। 

विद्यालय भवन निर्माण के लिए विद्यालय प्रबंधन व छात्राओं ने कई बार प्रशासन से मांग की मगर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार हारकर छात्राओं ने खुद यह जिम्मेदारी अपने कांधे पर लेते हुए विरोध का मन बना लिया है। दस जुलाई से छात्राएं कक्षाओं का सांकेतिक बहिष्कार करेंगी।

छात्राओं की मांग को ध्यान में रखते हुए शासन से विद्यालय की मरम्मत के लिए अनुदान की मांग की जाएगी। शासन से अनुमति मिलने के बाद विद्यालय को दुरुस्त कराया जाएगा। - डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डीआईओएस 
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