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Lucknow News: फर्जी कॉल सेंटर के संचालक को अहमदाबाद में खोज रही पुलिस
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लखनऊ। अलीगंज में कॉल सेंटर संचालित कर अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले गिरोह का संचालक प्रियांशु अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। उसके अहमदाबाद में छिपे होने की सूचना पर पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।
पुलिस के मुताबिक, प्रियांशु की गिरफ्तारी से गिरोह के सरगना और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने चार माह में अमेरिकी नागरिकों से करीब 100 करोड़ रुपये वसूले।
डीसीपी उत्तरी अमित कुमार आनंद ने बताया कि शनिवार को गिरफ्तार किए गए 16 आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पूछताछ में सामने आया कि कॉल सेंटर में एजेंट, वेरिफायर और क्लोजर नाम से तीन स्तरों पर टीमें काम करती थीं। आरोपी अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर पर फर्जी पॉप-अप और वार्निंग मैसेज दिखाकर वायरस या सुरक्षा खतरे का डर पैदा करते थे। पॉप-अप पर क्लिक करते ही कॉल सेंटर में कॉल पहुंचती थी, जिसे एजेंट संभालते थे। वे खुद को माइक्रोसॉफ्ट या किसी तकनीकी सहायता कंपनी का कर्मचारी बताकर समस्या दूर करने का झांसा देते थे।
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इसके बाद रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिये पीड़ित के कंप्यूटर का नियंत्रण हासिल कर लिया जाता था। फिर फर्जी सिक्योरिटी स्कैन दिखाकर कंप्यूटर में वायरस या अन्य खतरा होने की बात कही जाती थी। पीड़ितों को आपत्तिजनक वेबसाइट देखने या किसी अवैध गतिविधि में शामिल होने का आरोप लगाकर भी डराया जाता था।
इसके बाद आरोपी पीड़ितों से व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर लेते थे। खुद को सरकारी अधिकारी बताकर कार्रवाई का डर दिखाया जाता और रकम वसूली जाती थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि प्रियांशु के अधीन नेहाल और आशीष कॉल सेंटर के संचालन और प्रबंधन में अहम भूमिका निभाते थे। कर्मचारियों के रहने और खाने की व्यवस्था भी कॉल सेंटर की ओर से की जाती थी।
पुलिस अब प्रियांशु की तलाश के साथ गिरोह के पूरे नेटवर्क और ठगी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
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पुलिस के मुताबिक, प्रियांशु की गिरफ्तारी से गिरोह के सरगना और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने चार माह में अमेरिकी नागरिकों से करीब 100 करोड़ रुपये वसूले।
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डीसीपी उत्तरी अमित कुमार आनंद ने बताया कि शनिवार को गिरफ्तार किए गए 16 आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पूछताछ में सामने आया कि कॉल सेंटर में एजेंट, वेरिफायर और क्लोजर नाम से तीन स्तरों पर टीमें काम करती थीं। आरोपी अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर पर फर्जी पॉप-अप और वार्निंग मैसेज दिखाकर वायरस या सुरक्षा खतरे का डर पैदा करते थे। पॉप-अप पर क्लिक करते ही कॉल सेंटर में कॉल पहुंचती थी, जिसे एजेंट संभालते थे। वे खुद को माइक्रोसॉफ्ट या किसी तकनीकी सहायता कंपनी का कर्मचारी बताकर समस्या दूर करने का झांसा देते थे।
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इसके बाद रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिये पीड़ित के कंप्यूटर का नियंत्रण हासिल कर लिया जाता था। फिर फर्जी सिक्योरिटी स्कैन दिखाकर कंप्यूटर में वायरस या अन्य खतरा होने की बात कही जाती थी। पीड़ितों को आपत्तिजनक वेबसाइट देखने या किसी अवैध गतिविधि में शामिल होने का आरोप लगाकर भी डराया जाता था।
इसके बाद आरोपी पीड़ितों से व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर लेते थे। खुद को सरकारी अधिकारी बताकर कार्रवाई का डर दिखाया जाता और रकम वसूली जाती थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि प्रियांशु के अधीन नेहाल और आशीष कॉल सेंटर के संचालन और प्रबंधन में अहम भूमिका निभाते थे। कर्मचारियों के रहने और खाने की व्यवस्था भी कॉल सेंटर की ओर से की जाती थी।
पुलिस अब प्रियांशु की तलाश के साथ गिरोह के पूरे नेटवर्क और ठगी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।