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Lucknow News: रेखाओं और रंगों में संस्कृति को सहेज रही चंदन की कलाकृतियां
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लाल बारादरी भवन मेंकलाप्रेमी व विद्यार्थी जुटे।
लखनऊ। कैसरबाग स्थित राज्य ललित कला अकादमी के लाल बारादरी भवन में कलाकार चंदन सिंह की एकल कला प्रदर्शनी ''माटी में सोना हिराई गयो'' के दूसरे दिन मंगलवार को बड़ी संख्या में कलाप्रेमी व विद्यार्थी जुटे। प्रदर्शनी में लोकजीवन, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं। चंदन सिंह ने बीएचयू से बीएफए और एमएफए की शिक्षा हासिल किया है।
कलाकार चंदन सिंह ने अपनी कलाकृतियों में जलरंग, ड्रॉइंग पेन, इंक और मिश्रित माध्यम का इस्तेमाल किया है। मिश्रित माध्यम के इस्तेमाल से कलाकृतियों में अलग-अलग दृश्यात्मक प्रभाव पैदा हुए हैं। इन माध्यमों के जरिये कलाकार ने मिट्टी, लोकजीवन, ग्रामीण परिवेश और मानवीय संवेदनाओं को अपनी विशिष्ट शैली में व्यक्त किया है।
खो रही संस्कृति ने ''माटी में सोना हिराई गयो'' को दी प्रेरणा
चंदन ने बताया कि आधुनिकता की दौड़ में खोती जा रही संस्कृति ने ''माटी में सोना हिराई गयो'' को प्रेरणा दी। यह शीर्षक बुंदेलखंड के लोकप्रिय लोकगीत से लिया गया है। कहा कि आधुनिकता की दौड़ में संस्कृति की पहचान लगातार बदल रही है या कहें कि वह लुप्त भी होती जा रही है।उन्होंने अपनी रचनाओं में मिट्टी से जुड़े जीवन, ग्रामीण संस्कृति और मानवीय अनुभवों को उकेरा है।
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कलाकार चंदन सिंह ने अपनी कलाकृतियों में जलरंग, ड्रॉइंग पेन, इंक और मिश्रित माध्यम का इस्तेमाल किया है। मिश्रित माध्यम के इस्तेमाल से कलाकृतियों में अलग-अलग दृश्यात्मक प्रभाव पैदा हुए हैं। इन माध्यमों के जरिये कलाकार ने मिट्टी, लोकजीवन, ग्रामीण परिवेश और मानवीय संवेदनाओं को अपनी विशिष्ट शैली में व्यक्त किया है।
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खो रही संस्कृति ने ''माटी में सोना हिराई गयो'' को दी प्रेरणा
चंदन ने बताया कि आधुनिकता की दौड़ में खोती जा रही संस्कृति ने ''माटी में सोना हिराई गयो'' को प्रेरणा दी। यह शीर्षक बुंदेलखंड के लोकप्रिय लोकगीत से लिया गया है। कहा कि आधुनिकता की दौड़ में संस्कृति की पहचान लगातार बदल रही है या कहें कि वह लुप्त भी होती जा रही है।उन्होंने अपनी रचनाओं में मिट्टी से जुड़े जीवन, ग्रामीण संस्कृति और मानवीय अनुभवों को उकेरा है।

लाल बारादरी भवन मेंकलाप्रेमी व विद्यार्थी जुटे।

लाल बारादरी भवन मेंकलाप्रेमी व विद्यार्थी जुटे।
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