प्रमोशन में आरक्षण के समर्थकों ने रविवार को मार्च निकाला तो विरोधियों ने चेतावनी दौड़ लगाकर ताकत दिखाई। आरक्षण विरोधियों की अगुवाई रिटायर्ड एयर मार्शल आरके दीक्षित ने किया। उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि फैसला वापस न लिया गया तो आंदोलन तेज होगा। वहीं आरक्षण समर्थकों ने अवधेश वर्मा के नेतृत्व में मार्च निकालकर केंद्र व राज्य सरकार की आलोचना की।
प्रमोशन में आरक्षण पर समर्थक और विरोधी आमने-सामने, सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी
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आरक्षण विरोधी : धोखा दे रही भाजपा
कर्मचारी, अधिकारी और शिक्षकों के आरक्षण विरोधी संगठन सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के तत्वावधान में 1090 चौराहे से राजीव चौक तक दौड़ लगाकर सरकार को पदोन्नति में आरक्षण का आदेश वापस लेने की चेतावनी दी। कहा कि ‘ज्येष्ठता व श्रेष्ठता का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।’ समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने बताया कि 17 जून 1995 को पहली बार संविधान संशोधन कर प्रमोशन में आरक्षण दिया गया था, इसीलिए सभी राज्यों की राजधानियों में दौड़ लगाकर काला दिवस मनाया गया। चेतावनी दौड़ के माध्यम से सरकार को अपने फैसले से बाज आने की चेतावनी दी गई।
वक्ताओं ने कहा कि सांसदों और विधायकों को ज्ञापन देकर मांग की जाएगी कि वे या तो केंद्र सरकार से प्रमोशन में आरक्षण का आदेश वापस कराएं अन्यथा त्याग पत्र दें। भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र में पदोन्नति में आरक्षण देने का वादा नहीं किया था। अब सरकार ऐसा करके जनता से विश्वासघात कर रही है। चेतावनी दौड़ में एए फारूकी, एचएन पांडेय, राजीव सिंह और एसएस निरंजन समेत बड़ी संख्या में अधिकारी व कर्मचारी शामिल हुए।
आरक्षण समर्थक : 24 घंटे में बहाल हो आरक्षण अधिनियम की धारा
आरक्षण समर्थकों के संगठन आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर सुबह गोमतीनगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक से पैदल मार्च निकाला। मार्च को रिटायर्ड जस्टिस खेमकरन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मार्च का नेतृत्व अवधेश वर्मा ने किया। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर सरकार एससी/एसटी कर्मियों को आरक्षण का लाभ देना चाहती है तो वह नियमों में संशोधन करे। संशोधन के बिना यूपी में एससी/एसटी कर्मियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
सरकार एससी/एसटी कर्मियों की हितैषी है तो 24 घंटे में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 3(7) को बहाल कराए। चेतावनी दी कि भाजपा सरकार ने इस मुद्दे पर उचित कदम न उठाए तो आंदोलन और तेज होगा। लखनऊ में जल्द ही रैली करके भी सरकार को नियमों में संशोधन के लिए आगाह किया जाएगा। इसकी तिथि की घोषणा शीघ्र की जायेगी। संघर्ष समिति ने पिछड़े वर्गों के लिए प्रदेश में वर्ष 1978 में लागू व्यवस्था को फिर बहाल कराने की मांग की। मार्च में केबी राम, डॉ. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन और अनिल कुमार समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।