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केजीएमयू के होल्डिंग एरिया में तड़प-तड़पकर गई मरीज की जान

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jun 2020 01:47 AM IST
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patient died painfully in holding area of kgmu
लखनऊ। केजीएमयू के होल्डिंग एरिया में इलाज न मिलने से युवक की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। उसे दो घंटे पहले सिविल अस्पताल से रेफर किया गया था। तीमारदारों का आरोप है कि दो घंटे तक वह होल्डिंग एरिया में ही पड़ा रहा। मगर किसी डॉक्टर ने उसे हाथ तक नहीं लगाया। बेटे की मौत के बाद पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। बाराबंकी निवासी ओमप्रकाश के बेटे अंशु (18) को बृहस्पतिवार सुबह अचानक पेट में दर्द उठा। तीमारदार उसे नजदीकी अस्पताल ले गए। वहां से उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया। तीमारदार पहले उसे सिविल अस्पताल की इमरजेंसी ले गए। वहां पर डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार देकर उसे केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। सुबह करीब 11 बजे तीमारदार मरीज को होल्डिंग एरिया में ले गए। वहां पर डॉक्टरों ने मरीज को भर्ती करने से मना कर दिया। मरीज को लोहिया संस्थान ले जाने की सलाह दी गई। इन सब में करीब दो घंटे बीत गए और मरीज ने स्ट्रेचर पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। पिता ओमप्रकाश का आरोप है कि किसी डॉक्टर ने उनके बेटे को हाथ तक नहीं लगाया। समय पर इलाज न मिलने से उसकी मौत हो गई। पिता ओमप्रकाश स्ट्रेचर पर मृत पड़े बेटे को जिंदा समझकर उसके मुंह में बार-बार पानी डाल रहे थे। काफी देर तक शरीर में कोई हरकत न होती देख तीमारदार दोबार मरीज को अंदर ले गए, मगर डॉक्टरों ने हाथ लगाने से इन्कार कर दिया। केजीएमयू के होल्डिंग एरिया में कोई मरीज 24 तो कोई 36 घंटे से भर्ती के इंतजार में जमीन या स्ट्रेचर पर पड़ा हुआ है। अयोध्या से आई महिला पुष्पा (50) के सिर में गंभीर चोट है। उनका सीटी स्कैन होना है। बताया कि बुधवार सुबह आई थीं। कोरोना जांच रिपोर्ट न आने से अभी तक जांच नहीं हो सकी। इसी तरह इटौंजा कुंवरावां से आए मरीज महेंद्र प्रताप (60) को लकवे का अटैक पड़ा था। मरीज 36 घंटे बीतने के बाद भी अभी होल्डिंग एरिया में स्ट्रेचर पर पड़ा हुआ है, क्योंकि अभी उसकी कोरोना जांच रिपोर्ट नहीं आई है। ऐसे में उसे संबंधित विभाग में शिफ्ट नहीं कराया जा सका।  केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने कहा कि होल्डिंग एरिया में आने वाले अति गंभीर मरीजों को प्राथमिकता से उपचार दिया जा रहा है। बाकी मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर उन्हें रिपोर्ट आने के लिए ठहराया जाता है। रिपोर्ट आने के बाद उन्हें संबंधित विभाग में भेज दिया जाता है।
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