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Lucknow News: फर्जी आईएएस का पीए ईमेल कर दिलाता था प्रोटोकॉल
Mon, 08 Sep 2025 02:38 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Mon, 08 Sep 2025 02:38 AM IST
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आरोपी साैरभ त्रिपाठी।
लखनऊ। फर्जी आईएएस सौरभ त्रिपाठी ने न सिर्फ अपने नाम से बल्कि अपने पीए गौरव के नाम से भी एनआईसी की मेल आईडी बना रखी थी। आरोपी अपने पीए को मोटा वेतन देता था। गौरव आरोपी सौरभ के फर्जी ईमेल भेजकर प्रोटोकॉल दिलाने का काम करता था।
वजीरगंज पुलिस सौरभ की गाड़ी के साथ पकड़े गए उसके चालक को अब सरकारी गवाह बनाने की बात कह रही है। चालक ने पूछताछ में बताया था कि सौरभ ने उसे 17 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन पर रखा था। वह सौरभ के काले कारनामों के बारे में कुछ नहीं जानता है। आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया था कि वह उसकी गाड़ी पर लगे फर्जी सचिवालय पास की मदद से आसानी से सचिवालय और अन्य सरकारी संस्थानों में प्रवेश हासिल कर लेता था। इतना ही नहीं आरोपी के फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर टोल भी नहीं देता था।
आय का स्रोत पता नहीं कर सकी पुलिस
फर्जी आईएएस सौरभ त्रिपाठी के खिलाफ अब तक ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई कि उसने किसी से कोई काम के एवज में रुपये लिए थे। हैरानी वाली बात यह है कि पुलिस भी पता नहीं लगा सकी है कि सौरभ ने फर्जी आईएएस बनकर अब तक कितने लोगों को चूना लगाया था। उसकी आय का स्रोत क्या है। नोएडा से लेकर लखनऊ तक आरोपी ने अपना ठिकाना बना रखा था। हाईफाई लाइफ स्टाइल से जिंदगी गुजार रहे सौरभ के पास रुपये कहां से आ रहे थे। पुलिस दावा कर रही है कि सौरभ के बैंक खातों की डिटेल चेक की जा रही है।
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तीन बार दी सिविल परीक्षा, असफल होने पर बन गया फर्जी आईएएस
पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी सौरभ कि पिता पीएचडी होल्डर हैं। वहीं सौरभ का बचपन से आईएएस बनने का सपने था, जिसे साकार करने के लिए उसने तीन बार दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर सिविल सेवा परीक्षा दी थी। लेकिन तीनों बार वह असफल हो गया। फिर दिल्ली में ही रहकर उसने आधा दर्जन से अधिक आईएएस अफसरों से नजदीकियां बना लीं।
कई राजनेताओं के साथ हो गया उठना9बैठना
सौरभ की बात करने का तरीका और हाव-भाव ऐसे थे कि कई बड़े अफसरों से मेलजोल बढ़ने पर भी उसकी वास्तविकता कभी सामने नहीं आई। उसका कई बड़े नेताओं के साथ भी उठना-बैठना था। इनके साथ उसने फोटो भी खिंचवाई थीं। तस्वीरें उसने अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट भी की थीं।
ये गाड़ियां हुई थीं बरामद
यूपी16 डीपी 2828 : यह एसयूवी नोएडा निवासी युवक के नाम पर रजिस्टर्ड है।
यूपी32 पीएक्स 9928 : यह एसयूवी लखनऊ के रहने वाले व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड है।
बीआर01 एफजी 0028 : यह एसयूवी पटना निवासी युवक के नाम पर रजिस्टर्ड है।
यूपी32 क्यूटी 5060 : यह लखनऊ निवासी व्यक्ति के नाम पर है।
यूपी32 पीके 2800 : यह ट्रैवल एजेंसी के नाम पर रजिस्टर्ड है।
यूपी32 पीएच 0065 : यह लखनऊ में रहने वाली महिला के नाम पर पंजीकृत है।
पुलिस गाड़ी के मालिकों से भी संपर्क कर रही है कि उनकी गाड़ी सौरभ के पास कैसे पहुंची।
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वजीरगंज पुलिस सौरभ की गाड़ी के साथ पकड़े गए उसके चालक को अब सरकारी गवाह बनाने की बात कह रही है। चालक ने पूछताछ में बताया था कि सौरभ ने उसे 17 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन पर रखा था। वह सौरभ के काले कारनामों के बारे में कुछ नहीं जानता है। आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया था कि वह उसकी गाड़ी पर लगे फर्जी सचिवालय पास की मदद से आसानी से सचिवालय और अन्य सरकारी संस्थानों में प्रवेश हासिल कर लेता था। इतना ही नहीं आरोपी के फर्जी आईडी कार्ड दिखाकर टोल भी नहीं देता था।
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आय का स्रोत पता नहीं कर सकी पुलिस
फर्जी आईएएस सौरभ त्रिपाठी के खिलाफ अब तक ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई कि उसने किसी से कोई काम के एवज में रुपये लिए थे। हैरानी वाली बात यह है कि पुलिस भी पता नहीं लगा सकी है कि सौरभ ने फर्जी आईएएस बनकर अब तक कितने लोगों को चूना लगाया था। उसकी आय का स्रोत क्या है। नोएडा से लेकर लखनऊ तक आरोपी ने अपना ठिकाना बना रखा था। हाईफाई लाइफ स्टाइल से जिंदगी गुजार रहे सौरभ के पास रुपये कहां से आ रहे थे। पुलिस दावा कर रही है कि सौरभ के बैंक खातों की डिटेल चेक की जा रही है।
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तीन बार दी सिविल परीक्षा, असफल होने पर बन गया फर्जी आईएएस
पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी सौरभ कि पिता पीएचडी होल्डर हैं। वहीं सौरभ का बचपन से आईएएस बनने का सपने था, जिसे साकार करने के लिए उसने तीन बार दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहकर सिविल सेवा परीक्षा दी थी। लेकिन तीनों बार वह असफल हो गया। फिर दिल्ली में ही रहकर उसने आधा दर्जन से अधिक आईएएस अफसरों से नजदीकियां बना लीं।
कई राजनेताओं के साथ हो गया उठना9बैठना
सौरभ की बात करने का तरीका और हाव-भाव ऐसे थे कि कई बड़े अफसरों से मेलजोल बढ़ने पर भी उसकी वास्तविकता कभी सामने नहीं आई। उसका कई बड़े नेताओं के साथ भी उठना-बैठना था। इनके साथ उसने फोटो भी खिंचवाई थीं। तस्वीरें उसने अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट भी की थीं।
ये गाड़ियां हुई थीं बरामद
यूपी16 डीपी 2828 : यह एसयूवी नोएडा निवासी युवक के नाम पर रजिस्टर्ड है।
यूपी32 पीएक्स 9928 : यह एसयूवी लखनऊ के रहने वाले व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड है।
बीआर01 एफजी 0028 : यह एसयूवी पटना निवासी युवक के नाम पर रजिस्टर्ड है।
यूपी32 क्यूटी 5060 : यह लखनऊ निवासी व्यक्ति के नाम पर है।
यूपी32 पीके 2800 : यह ट्रैवल एजेंसी के नाम पर रजिस्टर्ड है।
यूपी32 पीएच 0065 : यह लखनऊ में रहने वाली महिला के नाम पर पंजीकृत है।
पुलिस गाड़ी के मालिकों से भी संपर्क कर रही है कि उनकी गाड़ी सौरभ के पास कैसे पहुंची।