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लखनऊः शहरी सीमा में बनेंगे प्रवासी श्रमिकों के लिए एक हजार सस्ते मकान
Sat, 13 Jun 2020 02:20 PM IST
ishwar ashish
ज्ञान सक्सेना, अमर उजाला, लखनऊ
ज्ञान सक्सेना, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 13 Jun 2020 02:20 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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कोरोना संक्रमण के कारण दूसरे प्रदेशों से आए प्रवासी श्रमिकों के लिए शहरी इलाके से सटी नगर निगम सीमा में एक हजार से अधिक सस्ते मकान बनेंगे। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने इसके लिए सदर, सरोजनीनगर व मोहनलालगंज तहसील की शहरी सीमा से सटी जमीन के साथ ही एलडीए से जुड़ी नजूल की दस हेक्टेयर जमीन को भवन निर्माण के लिए चिह्नित कर इसकी रिपोर्ट भी डीएम को भेज दी है।
प्रभारी व एडीएम प्रशासन अमर पाल सिंह ने बताया कि सर्वे के बाद नगर निगम इलाके में चिह्नित जमीन की रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। शासन दूसरे प्रदेशों से आए प्रवासी श्रमिकों के लिए एफोर्डबल हाउस बनवाने के लिए नगर निगम व एलडीए को बतौर निर्माणदायी संस्था देकर निर्माण कराएगा। योजना के पहले दौर मे एक हजार मकानों का निर्माण प्रस्तावित है। इन भवनों का निर्माण कार्य शुरू होने के बाद पात्रता की शर्तों के आधार पर वास्तविक लाभार्थियों को आवंटित किए जाने की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी भी नगर निगम ही संभालेगा।
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प्रभारी व एडीएम प्रशासन अमर पाल सिंह ने बताया कि सर्वे के बाद नगर निगम इलाके में चिह्नित जमीन की रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। शासन दूसरे प्रदेशों से आए प्रवासी श्रमिकों के लिए एफोर्डबल हाउस बनवाने के लिए नगर निगम व एलडीए को बतौर निर्माणदायी संस्था देकर निर्माण कराएगा। योजना के पहले दौर मे एक हजार मकानों का निर्माण प्रस्तावित है। इन भवनों का निर्माण कार्य शुरू होने के बाद पात्रता की शर्तों के आधार पर वास्तविक लाभार्थियों को आवंटित किए जाने की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी भी नगर निगम ही संभालेगा।
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खेती को भी मिलेगी परती भूमि
प्रवासी मजदूरों को शासन के निर्देशानुसार पात्रता के आधार पर खेती किसानी के लिए ग्रामीण इलाकों में परती जमीन देने की भी तैयारी है। जिले में कुल चिह्नित 12342 हेक्टेयर परती भूमि है। इसमें से साढ़े ग्यारह हजार से अधिक हेक्टेेेेयर परती भूमि ग्रामीण इलाकों में है। बाहर से आ रहे प्रवासी श्रमिक जिनके पास खेती योग्य कोई जमीन नहीं होगी, उन्हें राजस्व परिषद एक्ट के नियमों के तहत पात्रता के आधार पर परती जमीन का आवंटन होगा।
कहां कितनी परती जमीन
... शहरी इलाके में 420 हेक्टेयर
... ग्रामीण इलाके में 11922 हेक्टेयर
कहां कितनी परती जमीन
... शहरी इलाके में 420 हेक्टेयर
... ग्रामीण इलाके में 11922 हेक्टेयर
1200 रुपये किराए पर दिए जा सकते हैं
तहसीलवार परती भूमि (वर्ग फीट)
मोहनलालगंज 37878
सरोजनीनगर 31125
चिनहट 12719
काकोरी 21015
बीकेटी 35279
माल 24389
मलिहाबाद 22839
एलडीए के अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार ने यह जमीन उन आवासों के निर्माण के लिए मांगी है, जिनपर श्रमिकों के लिए आवास बनाए जा सकें। ये आवास 1200 रुपये के मासिक किराए पर रहने के लिए दिए जा सकते हैं। पीएम आवास की तरह करीब 27 वर्ग मीटर प्रति यूनिट में इनका निर्माण किया जाना है। करीब 6.50 लाख रुपये प्रति आवास निर्माण पर खर्च का अनुमान है। इसमें जमीन की कीमत शामिल नहीं होगी। अभी बिक्री करने के लिए कोई योजना नहीं है। अंतिम रूप से नीति अभी तय होना बाकी है। इसके लिए शासन से आदेश होना है। इसके बाद एलडीए और नगर निगम अपना काम शुरू करेंगे।
मोहनलालगंज 37878
सरोजनीनगर 31125
चिनहट 12719
काकोरी 21015
बीकेटी 35279
माल 24389
मलिहाबाद 22839
एलडीए के अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार ने यह जमीन उन आवासों के निर्माण के लिए मांगी है, जिनपर श्रमिकों के लिए आवास बनाए जा सकें। ये आवास 1200 रुपये के मासिक किराए पर रहने के लिए दिए जा सकते हैं। पीएम आवास की तरह करीब 27 वर्ग मीटर प्रति यूनिट में इनका निर्माण किया जाना है। करीब 6.50 लाख रुपये प्रति आवास निर्माण पर खर्च का अनुमान है। इसमें जमीन की कीमत शामिल नहीं होगी। अभी बिक्री करने के लिए कोई योजना नहीं है। अंतिम रूप से नीति अभी तय होना बाकी है। इसके लिए शासन से आदेश होना है। इसके बाद एलडीए और नगर निगम अपना काम शुरू करेंगे।