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Lucknow News: कभी अंग्रेज उड़ाते थे प्लेन, आज हवाई पट्टी वीरान
Thu, 09 Jan 2025 01:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 09 Jan 2025 01:03 AM IST
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इकछनिया गांव में जर्जर अंग्रेजों के जमाने का बना घंटाघर।
- फोटो : संवाद
रायबरेली। जिस इकछनिया हवाई पट्टी पर कभी अंग्रेज प्लेन उड़ाते थे, वह आज वीरान पड़ी है। महिलाएं पट्टी पर कंडे पाथ रही हैं तो किसानों ने उसे खलिहान बना दिया है। यहां तक मिट्टी ढोने के लिए डंपर दौड़ रहे हैं। अब इस हवाई पट्टी को विकसित करने की कवायद शुरू की गई है। ऐसे में इकछनिया व आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की उम्मीद जगी है कि जल्द इस हवाई पट्टी को विकसित किया जाएगा और उनके गांवों की तस्वीर बदलेगी।
अंग्रेजों की हुकूमत में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जिले के सदर तहसील क्षेत्र के इकछनिया गांव में हवाई अड्डा बना था। बताते हैं कि 1939 में युद्ध की जरूरतों को देखते हुए यह हवाई अड्डा बना था। राष्ट्रीय हवाई अड्डा विकास योजना 2027 के तहत इकछनिया हवाई पट्टी को विकास के लिए चिह्नित किया गया है। इस कार्य की जिम्मेदारी कानपुर हवाई अड्डे को सौंपी गई है।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, कानपुर हवाई अड्डा के निदेशक संजय कुमार की ओर से मांगी गई सूचना को जिला प्रशासन की तरफ से भेजा गया है। इसमें हवाई पट्टी की कितनी जमीन है, उसके आसपास कौन-कौन से गांव हैं, कोई जमीन का विवाद तो नहीं हैं समेत अन्य सूचनाएं मांगी थी। गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए मिट्टी ढोने का कार्य डंपर के जरिए इसी पट्टी से किया जा रहा है। यह हवाई पट्टी करीब 500 बीघे में है।
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बेटों संग जब पूर्व प्रधानमंत्री ने भरी थी उड़ान
ग्रामीण बताते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। उनके साथ राजीव गांधी व संजय गांधी भी थे। वर्ष 1937 में हवाई पट्टी बनाने का कार्य शुरू कराया गया था। 1942 में यह हवाई पट्टी बनकर तैयार हुई थी। ग्रामीण बताते हैं कि एक समय हवाई पट्टी पर प्लेन उड़़ाए जाते थे। आज हवाई पट्टी वीरान है। उनके गांव की चहल-पहल भी गायब है। हवाई पट्टी विकसित होने की जानकारी मिली है। इस खबर से राहत है कि हवाई पट्टी को विकसित किए जाने के बारे में सरकार ने सोचा तो सही।
देखभाल के अभाव में जर्जर हो गया घंटाघर
इकछनिया गांव के रहने वाले पूर्व प्रधान संजय कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि जहाज की उड़ानों को नियंत्रित करने के लिए अंग्रेजों ने गांव में एयर ट्रैफिक कंट्रोल (लाइट हाउस) बनवाया था। जहाजों को सिग्नल देने के लिए हवाई अड्डे के किनारे-किनारे बोतल लाइट की व्यवस्था की गई थी। गांव में बना लाइट हाउस (घंटाघर) देखभाल के अभाव में जर्जर हो गया है। रामकुमार बताते हैं कि अंग्रेजों की तरफ से बनाई गई हवाई पट्टी देखरेख के अभाव मेंं वीरान है। इसे जल्द से जल्द विकसित किया जाना चाहिए।
हवाई पट्टी के आसपास पड़ने वाले गांव
इकछनिया, कंचौैदा, सरायं मो. शरीफ, नवाबगंज, ओनी कमान, सान्हूं कुआं, भांव, जमालपुर नानकारी, ओनी कोपा गांव पड़ते हैं। कहा जा रहा है कि छह माह में सारी प्रक्रिया करने के बाद एयरपोर्ट का कार्य शुरू कराने की तैयारी है। हवाई पट्टी की जमीन के अलावा अन्य जमीन की जरूरत भी बताई जा रही है। इसके लिए जल्द ही किसानों की जमीन अधिगृहीत का कार्य भी शुरू होगा। एसडीएम सदर प्रफुल्ल शर्मा के मुताबिक हवाई पट्टी से संबंधित जो भी सूचना मांगी गई थी, उसे भेज दिया गया है। हवाई पट्टी विकसित करने का कार्य कब शुरू होगा, इसकी जानकारी नहीं है।
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अंग्रेजों की हुकूमत में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जिले के सदर तहसील क्षेत्र के इकछनिया गांव में हवाई अड्डा बना था। बताते हैं कि 1939 में युद्ध की जरूरतों को देखते हुए यह हवाई अड्डा बना था। राष्ट्रीय हवाई अड्डा विकास योजना 2027 के तहत इकछनिया हवाई पट्टी को विकास के लिए चिह्नित किया गया है। इस कार्य की जिम्मेदारी कानपुर हवाई अड्डे को सौंपी गई है।
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भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, कानपुर हवाई अड्डा के निदेशक संजय कुमार की ओर से मांगी गई सूचना को जिला प्रशासन की तरफ से भेजा गया है। इसमें हवाई पट्टी की कितनी जमीन है, उसके आसपास कौन-कौन से गांव हैं, कोई जमीन का विवाद तो नहीं हैं समेत अन्य सूचनाएं मांगी थी। गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए मिट्टी ढोने का कार्य डंपर के जरिए इसी पट्टी से किया जा रहा है। यह हवाई पट्टी करीब 500 बीघे में है।
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बेटों संग जब पूर्व प्रधानमंत्री ने भरी थी उड़ान
ग्रामीण बताते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। उनके साथ राजीव गांधी व संजय गांधी भी थे। वर्ष 1937 में हवाई पट्टी बनाने का कार्य शुरू कराया गया था। 1942 में यह हवाई पट्टी बनकर तैयार हुई थी। ग्रामीण बताते हैं कि एक समय हवाई पट्टी पर प्लेन उड़़ाए जाते थे। आज हवाई पट्टी वीरान है। उनके गांव की चहल-पहल भी गायब है। हवाई पट्टी विकसित होने की जानकारी मिली है। इस खबर से राहत है कि हवाई पट्टी को विकसित किए जाने के बारे में सरकार ने सोचा तो सही।
देखभाल के अभाव में जर्जर हो गया घंटाघर
इकछनिया गांव के रहने वाले पूर्व प्रधान संजय कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि जहाज की उड़ानों को नियंत्रित करने के लिए अंग्रेजों ने गांव में एयर ट्रैफिक कंट्रोल (लाइट हाउस) बनवाया था। जहाजों को सिग्नल देने के लिए हवाई अड्डे के किनारे-किनारे बोतल लाइट की व्यवस्था की गई थी। गांव में बना लाइट हाउस (घंटाघर) देखभाल के अभाव में जर्जर हो गया है। रामकुमार बताते हैं कि अंग्रेजों की तरफ से बनाई गई हवाई पट्टी देखरेख के अभाव मेंं वीरान है। इसे जल्द से जल्द विकसित किया जाना चाहिए।
हवाई पट्टी के आसपास पड़ने वाले गांव
इकछनिया, कंचौैदा, सरायं मो. शरीफ, नवाबगंज, ओनी कमान, सान्हूं कुआं, भांव, जमालपुर नानकारी, ओनी कोपा गांव पड़ते हैं। कहा जा रहा है कि छह माह में सारी प्रक्रिया करने के बाद एयरपोर्ट का कार्य शुरू कराने की तैयारी है। हवाई पट्टी की जमीन के अलावा अन्य जमीन की जरूरत भी बताई जा रही है। इसके लिए जल्द ही किसानों की जमीन अधिगृहीत का कार्य भी शुरू होगा। एसडीएम सदर प्रफुल्ल शर्मा के मुताबिक हवाई पट्टी से संबंधित जो भी सूचना मांगी गई थी, उसे भेज दिया गया है। हवाई पट्टी विकसित करने का कार्य कब शुरू होगा, इसकी जानकारी नहीं है।

प्रताप सिंह भारद्वाज- फोटो : mathura

प्रताप सिंह भारद्वाज- फोटो : mathura

प्रताप सिंह भारद्वाज- फोटो : mathura

प्रताप सिंह भारद्वाज- फोटो : mathura