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Lucknow News: विकास कार्यों पर 300 करोड़ की बढ़ोतरी के साथ नगर निगम का 46 अरब का बजट पास
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नगर निगम में बहस करते पार्षद।
लखनऊ। नगर निगम विकास कार्यों और जनसुविधाओं पर इस बार पिछले साल से 300 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च करेगा। रविवार को नगर निगम सदन ने एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पास कर दिया। इसमें 46 अरब रुपये आय-व्यय का प्रावधान किया गया है, जो बीते साल से तीन अरब रुपये अधिक है। बजट में खुले नालों को ढंकने, पुलिया मरम्मत, सड़क निर्माण, वेंडिंग जोन और यातायात सुधार पर विशेष जोर दिया गया है। सदन में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के पुनरीक्षित बजट को भी बिना चर्चा के ही पास कर दिया गया, जिसको लेकर विपक्ष ने हंगामा भी किया।
नए वित्तीय वर्ष के बजट को नगर निगम कार्यकारिणी 22 फरवरी को ही पास कर चुकी थी। रविवार को इसे बिना चर्चा सदन से भी पास कर दिया गया। नए बजट में जनता पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है और न ही पुरानी दरों में कोई बढ़ोतरी की गई है, मगर आमदनी बढ़ाने के लिए कई मदों में लक्ष्य बढ़ाया गया है। नए बजट में गृहकर वसूली का लक्ष्य 750 करोड़ रुपये किया गया है। बीते साल यह 683 करोड़ रुपये था। विभिन्न तरह के प्रतिष्ठानों से लाइसेंस शुल्क वसूली भी नए बजट में पांच से बढ़ाकर आठ करोड़ की गई है। नो पार्किंग से गाड़ी उठाने के मद में भी आय को बीते साल की तुलना में एक करोड़ से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ किया गया है। व्यय मद में नए बजट में गोवंश के रखरखाव के लिए बीते साल के 15 करोड़ से बढ़ाकर इस वर्ष 23 करोड़ रुपये किया गया है। इसी तरह विकास कार्यों और कर्मचारियों के वेतन भत्तों में पिछले साल की तुलना में अधिक बढ़ोतरी की गई है।
पहली बार एक साथ पास हुए दो बजट, पार्षद ने उठाए सवाल
नगर निगम के वरिष्ठ भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान भी विरोध जताया। कहा कि नगर निगम के करीब 100 वर्ष के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ, जब दो बजट एक साथ सदन में पास किए गए हैं। यह जनता के साथ अन्याय है। जब बजट पर चर्चा ही नहीं होगी तो फिर पार्षदों का कोई मतलब ही नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से चालू वित्तीय वर्ष समाप्त होने मात्र 10 दिन पहले पुनरीक्षित बजट को सदन में बिना चर्चा पास किया गया, वह अधिनियम का उल्लंघन है। इससे पता चलता है कि नगर निगम वित्तीय मामलों की गड़बड़ियों को छुपा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी मनमर्जी के कारण वह सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए।
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इसके लिए इतना कोटा
- महापौर कोटा 25 करोड़ रुपये। वह अपने सुझाव पर पूरे शहर में किसी भी वार्ड में काम करा सकेंगी
- नगर आयुक्त कोटा 10 करोड़ रुपये। यह भी अपने हिसाब से किसी भी वार्ड में काम करा सकेंगे
- पार्षद कोटा 2.10 करोड़ रुपये। यह अपने वार्ड में काम करा सकेंगे और जरूरत पड़ने पर दूसरे वार्ड में भी
कोटे से कराए जा सकेंगे ये कार्य
सड़क, नाली, फुटपाथ, पार्क, स्ट्रीट लाइट और पेयजल।
इस काम पर इतना होगा खर्च (रुपये में)
सीएम ग्रिड योजना में सड़क निर्माण - 300 करोड़
भवन निर्माण - 34 करोड़
भवन मरम्मत - 5 करोड़
यातायात सुधार- 3 करोड़
रोड कटिंग मरम्मत- 15 करोड़
क्राॅसिंग, पुलिया, नाला मरम्मत- 30 करोड़
सरकारी जमीन की सुरक्षा- 10 करोड़
मॉडल वेंडिंग जोन बनाने- 15 करोड़
नई स्ट्रीट लाइट लगाने- 7 करोड़
कल्याण मंडप रखरखाव - 4.40 करोड़
श्मशान घाट, क्रबिस्तान सुधार- 6 करोड़
डीजल पेट्रोल खर्च - 32.50 करोड़
नए शौचालय व कूड़ा घर निर्माण- 2 करोड़
शौचालय मरम्मत- 3 करोड़
एलडीए से हैंडओवर कालोनियों पर- 55 करोड़
न्यायालय, विधानसभा व विधान परिषद की समितियों के निर्देश पर कार्य - 20 करोड़
यहां से होगी इतनी आय (रुपये में)
गृहकर- 750 करोड़
कुत्तों-बिल्ली पर कर- 60 लाख
प्रेक्षागृहों पर कर-02 करोड़
लीज रेंट- 1.50 करोड़
विज्ञापन शुल्क- 16 करोड़
फ्लैटों की बिक्री-130 करोड़
पार्किंग ठेका- 15 करोड़
यूजर चार्ज- 100 करोड़
अवस्थापना- 180 करोड़
रोड कटिंग- 15 करोड़
कालोनी हैंडओवर से- 50 करोड़
राज्य वित्त आयोग से- 900 करोड़
16वां वित्त आयोग से-250 करोड़
नगरीय विकास निधि- 300 करोड़
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नए वित्तीय वर्ष के बजट को नगर निगम कार्यकारिणी 22 फरवरी को ही पास कर चुकी थी। रविवार को इसे बिना चर्चा सदन से भी पास कर दिया गया। नए बजट में जनता पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है और न ही पुरानी दरों में कोई बढ़ोतरी की गई है, मगर आमदनी बढ़ाने के लिए कई मदों में लक्ष्य बढ़ाया गया है। नए बजट में गृहकर वसूली का लक्ष्य 750 करोड़ रुपये किया गया है। बीते साल यह 683 करोड़ रुपये था। विभिन्न तरह के प्रतिष्ठानों से लाइसेंस शुल्क वसूली भी नए बजट में पांच से बढ़ाकर आठ करोड़ की गई है। नो पार्किंग से गाड़ी उठाने के मद में भी आय को बीते साल की तुलना में एक करोड़ से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ किया गया है। व्यय मद में नए बजट में गोवंश के रखरखाव के लिए बीते साल के 15 करोड़ से बढ़ाकर इस वर्ष 23 करोड़ रुपये किया गया है। इसी तरह विकास कार्यों और कर्मचारियों के वेतन भत्तों में पिछले साल की तुलना में अधिक बढ़ोतरी की गई है।
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पहली बार एक साथ पास हुए दो बजट, पार्षद ने उठाए सवाल
नगर निगम के वरिष्ठ भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान भी विरोध जताया। कहा कि नगर निगम के करीब 100 वर्ष के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ, जब दो बजट एक साथ सदन में पास किए गए हैं। यह जनता के साथ अन्याय है। जब बजट पर चर्चा ही नहीं होगी तो फिर पार्षदों का कोई मतलब ही नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से चालू वित्तीय वर्ष समाप्त होने मात्र 10 दिन पहले पुनरीक्षित बजट को सदन में बिना चर्चा पास किया गया, वह अधिनियम का उल्लंघन है। इससे पता चलता है कि नगर निगम वित्तीय मामलों की गड़बड़ियों को छुपा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी मनमर्जी के कारण वह सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए।
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इसके लिए इतना कोटा
- महापौर कोटा 25 करोड़ रुपये। वह अपने सुझाव पर पूरे शहर में किसी भी वार्ड में काम करा सकेंगी
- नगर आयुक्त कोटा 10 करोड़ रुपये। यह भी अपने हिसाब से किसी भी वार्ड में काम करा सकेंगे
- पार्षद कोटा 2.10 करोड़ रुपये। यह अपने वार्ड में काम करा सकेंगे और जरूरत पड़ने पर दूसरे वार्ड में भी
कोटे से कराए जा सकेंगे ये कार्य
सड़क, नाली, फुटपाथ, पार्क, स्ट्रीट लाइट और पेयजल।
इस काम पर इतना होगा खर्च (रुपये में)
सीएम ग्रिड योजना में सड़क निर्माण - 300 करोड़
भवन निर्माण - 34 करोड़
भवन मरम्मत - 5 करोड़
यातायात सुधार- 3 करोड़
रोड कटिंग मरम्मत- 15 करोड़
क्राॅसिंग, पुलिया, नाला मरम्मत- 30 करोड़
सरकारी जमीन की सुरक्षा- 10 करोड़
मॉडल वेंडिंग जोन बनाने- 15 करोड़
नई स्ट्रीट लाइट लगाने- 7 करोड़
कल्याण मंडप रखरखाव - 4.40 करोड़
श्मशान घाट, क्रबिस्तान सुधार- 6 करोड़
डीजल पेट्रोल खर्च - 32.50 करोड़
नए शौचालय व कूड़ा घर निर्माण- 2 करोड़
शौचालय मरम्मत- 3 करोड़
एलडीए से हैंडओवर कालोनियों पर- 55 करोड़
न्यायालय, विधानसभा व विधान परिषद की समितियों के निर्देश पर कार्य - 20 करोड़
यहां से होगी इतनी आय (रुपये में)
गृहकर- 750 करोड़
कुत्तों-बिल्ली पर कर- 60 लाख
प्रेक्षागृहों पर कर-02 करोड़
लीज रेंट- 1.50 करोड़
विज्ञापन शुल्क- 16 करोड़
फ्लैटों की बिक्री-130 करोड़
पार्किंग ठेका- 15 करोड़
यूजर चार्ज- 100 करोड़
अवस्थापना- 180 करोड़
रोड कटिंग- 15 करोड़
कालोनी हैंडओवर से- 50 करोड़
राज्य वित्त आयोग से- 900 करोड़
16वां वित्त आयोग से-250 करोड़
नगरीय विकास निधि- 300 करोड़

नगर निगम में बहस करते पार्षद।

नगर निगम में बहस करते पार्षद।

नगर निगम में बहस करते पार्षद।

नगर निगम में बहस करते पार्षद।