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अपने ही न लगा दें ख्वाब को पलीता
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 02 Feb 2014 04:40 PM IST
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कार्यकर्ता हों या नेता, सभी के बीच ‘नेताजी’ दिल्ली की सत्ता का ख्वाब दिखा रहे हैं। अपने लिए एकजुट होने की नसीहत दे रहे हैं, लेकिन लगता है इसका असर हो नहीं रहा है।
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जिला-दर-जिला नेताओं के मतभेद हैं कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहे। संगठन के लोग मंत्रियों पर बरस रहे हैं तो कई प्रत्याशी, मंत्री और संगठन दोनों से तालमेल न होने का रोना रो रहे हैं।
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नेताओं के अंतर्विरोधों से जूझते समाजवादियों में अपने मुखिया के सामने ही आरोप-प्रत्यारोप ही स्थिति बन रही है।
दर्जा प्राप्त मंत्रियों की बैठक में तो पश्चिमी यूपी के कैबिनेट मंत्री को उनके ही नेता ने निशाने पर ले लिया। बैठक के बाद कई लोगों की रिएक्शन काफी तीखे थे।
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कह रहे थे, नेताजी जितना एकजुट होने को रहे हैं, नीचे वाले उतने ही बहक रहे हैं। कहीं वे नेताजी के ख्वाब को पलीता न लगा दें।