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मेट्रोमैन ने दी जानकारी, बोले- अब सीएम के शहर में भी दौड़ेगी मिनी मेट्रो
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 20 Dec 2017 06:27 PM IST
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मेट्रोमैन ई.श्रीधरन
यूपी के 20 लाख से कम आबादी वाले गोरखपुर और आगरा जैसे शहरों में लखनऊ की तर्ज पर मेट्रो नहीं चलाई जा सकती। प्रदेश सरकार को इन शहरों की जरूरत को देखते हुए लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम (मिनी मेट्रो) का प्रस्ताव दिया जा रहा है।
प्रदेश में मेट्रो प्रोजेक्ट के मुख्य सलाहकार व मेट्रोमैन डॉ. ई श्रीधरन ने यह जानकारी दी। वह मंगलवार को लखनऊ मेट्रो की समीक्षा करने के लिए राजधानी में थे। मेट्रो भवन में श्रीधरन ने बताया कि गोरखपुर में मेट्रो के लिए सर्वे चल रहा है।
हम वहां लखनऊ या दिल्ली की तरह मेट्रो चलाने के बजाय लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम की संभावना देख रहे हैं। गोरखपुर के लिए प्रदेश सरकार को ऐसा ही प्रस्ताव दिया जाएगा। सहमति बनने पर इसके लिए डीपीआर बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
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मिनी मेट्रो छोटे शहरों की जरूरत पूरा करने के लिए पर्याप्त है क्योंकि यहां यात्रियों की संख्या कम मिलती है। यह प्रोजेक्ट जहां मौजूदा सिस्टम से किफायती होगा, वहीं इसे तेजी से पूरा भी किया जा सकता है। ऐसी ट्रेन में मेट्रो की तुलना में कोच छोटे होंगे। इनकी गति भी कम रहती है। इनकी लागत भी कम आएगी।
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प्रदेश में मेट्रो प्रोजेक्ट के मुख्य सलाहकार व मेट्रोमैन डॉ. ई श्रीधरन ने यह जानकारी दी। वह मंगलवार को लखनऊ मेट्रो की समीक्षा करने के लिए राजधानी में थे। मेट्रो भवन में श्रीधरन ने बताया कि गोरखपुर में मेट्रो के लिए सर्वे चल रहा है।
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हम वहां लखनऊ या दिल्ली की तरह मेट्रो चलाने के बजाय लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम की संभावना देख रहे हैं। गोरखपुर के लिए प्रदेश सरकार को ऐसा ही प्रस्ताव दिया जाएगा। सहमति बनने पर इसके लिए डीपीआर बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
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मिनी मेट्रो छोटे शहरों की जरूरत पूरा करने के लिए पर्याप्त है क्योंकि यहां यात्रियों की संख्या कम मिलती है। यह प्रोजेक्ट जहां मौजूदा सिस्टम से किफायती होगा, वहीं इसे तेजी से पूरा भी किया जा सकता है। ऐसी ट्रेन में मेट्रो की तुलना में कोच छोटे होंगे। इनकी गति भी कम रहती है। इनकी लागत भी कम आएगी।
वाराणसी, मेरठ व इलाहाबाद में डीपीआर काम तेज
मेट्रोमैन ई.श्रीधरन
- फोटो : डेमो
उन्होंने बताया कि कानपुर और आगरा में मेट्रो के लिए डीपीआर बन चुकी है। यह नई मेट्रो नीति के मुताबिक बनी है। इसमें सभी विकल्प दिए जा रहे हैं। निजी क्षेत्र के हाथों में संचालन देने की संभावना को भी देखा जा रहा है।
प्रदेश सरकार को यह डीपीआर देकर पूछा जाएगा कि क्या जमीन अधिग्रहण जैसी कवायद शुरू कर दी जाए जिससे प्रोजेक्ट जल्द पूरा हो सके। कानपुर का मेट्रो प्रोजेक्ट लखनऊ की तरह ही रहेगा। आगरा में लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम लाया जा सकता है।
श्रीधरन ने बताया कि वाराणसी, मेरठ और इलाहाबाद में भी डीपीआर बनाने का काम तेज किया गया है। वाराणसी की डीपीआर में प्रदेश सरकार ने कुछ सुझाव शामिल कराए हैं। इसे शामिल करने के बाद प्रदेश सरकार के अनुमोदन के साथ केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
प्रदेश सरकार को यह डीपीआर देकर पूछा जाएगा कि क्या जमीन अधिग्रहण जैसी कवायद शुरू कर दी जाए जिससे प्रोजेक्ट जल्द पूरा हो सके। कानपुर का मेट्रो प्रोजेक्ट लखनऊ की तरह ही रहेगा। आगरा में लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम लाया जा सकता है।
श्रीधरन ने बताया कि वाराणसी, मेरठ और इलाहाबाद में भी डीपीआर बनाने का काम तेज किया गया है। वाराणसी की डीपीआर में प्रदेश सरकार ने कुछ सुझाव शामिल कराए हैं। इसे शामिल करने के बाद प्रदेश सरकार के अनुमोदन के साथ केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।