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जहां बहता था खून, अब बहेंगी दूध की नदियां!
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 29 Nov 2014 09:29 AM IST
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प्रदेश में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर पांच करोड़ से अधिक की लागत से खुलने वाले आधुनिक स्लॉटर हाउस वाले शहरों में अनिवार्य रूप से डेयरियां खोली जाएंगी।
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ताकि इन शहरों में दूध की जरूरतें भी पूरी हो जाएं और पशुओं की संख्या अधिक कम न हो जाए।
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने इस संबंध में मंडलायुक्त, जिलाधिकारियों के साथ निकायों को निर्देश भेज दिया है।
मुख्य सचिव ने कहा है कि स्लॉटर हाउस स्थापना के लिए जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, फायर सर्विसेज, एयरपोर्ट अथॉरिटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से लेना होगा।
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जमीन की व्यवस्था और योजना का संचालन का काम निकाय करेंगे। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराई जाएगी।
इसमें प्लांट, मशीनरी और भवन निर्माण लागत को भी शामिल किया जाएगा। डीपीआर में ही प्रतिदिन कटने वाले पशुओं की संख्या का भी जिक्र होगा।
पीपीपी मोड पर बनने वाले स्लॉटर हाउस प्राइवेट पार्टनर को न्यूनतम पांच साल और अधिकतम 20 साल के लिए दिए जाएंगे। निकाय इसका प्रत्येक पांच साल पर नवीनीकरण करेंगे।
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स्लॉटर हाउस संचालन के लिए राज्य स्तर पर गठित समिति से अनुमति के बाद निकाय लाइसेंस जारी कर सकेंगे।