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Lucknow News: केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में दवाओं का घोटाला
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केजीएमयू।
लखनऊ। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के तहत कैंसर मरीजों को मिलने वाली महंगी दवा और इंजेक्शन में बड़ा घोटाला होने की बात सामने आई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि छह माह में एक बार लगाए जाने वाला इंजेक्शन कागजों पर एक ही माह में चार से पांच बार लगाया गया। अधिकारियों ने दो करोड़ रुपये की दवाओं की घपलेबाजी की आशंका जाहिर की है।
केजीएमयू प्रशासन ने संबंधित दवाओं और इंजेक्शनों के बिलों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। कुलपति ने जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी मरीजों के रिकॉर्ड, दवा वितरण रजिस्टर, इंजेक्शन की खपत और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच करेगी।
यूरोलॉजी विभाग में प्रोस्टेट, किडनी, पेशाब की थैली के कैंसर पीड़ितों का इलाज होता है। गरीब कैंसर मरीजों को मुफ्त इलाज देने के लिए असाध्य योजना चलाई जा रही है। यूरोलॉजी विभाग में इसी योजना के पंजीकृत कैंसर मरीजों को बीमारी से बचाव व ताकत बढ़ाने के लिए दी जाने वाली महंगी दवाओं की फर्जी खपत दिखाकर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। मामला सामने आने के बाद केजीएमयू में हलचल मची है। विभाग में अक्तूबर-नवंबर 2025 में दवाओं की खपत जहां 10 लाख रुपये महीना थी, वहीं फरवरी 2026 में करीब 40 लाख रुपये की दवाएं खप गईं। मार्च में यह बजट 45 लाख रुपये से ज्यादा का आंकड़ा पार कर गया। महंगी दवाओं के तेजी से बढ़ते बजट पर अफसरों को शक हुआ। उन्होंने बिल और डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट शुरू किया, तो ढेरों गड़बड़ियां सामने आईं।
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एक इंजेक्शन की कीमत आठ से 10 हजार रुपये
हालात यह है कि कुछ मरीज को कागजों पर एक ही महीने में आयरन व प्रोटीन के चार से पांच इंजेक्शन लगा दिए गए, जबकि एक इंजेक्शन छह माह में एक बार लगाया जा सकता है। हर इंजेक्शन की कीमत आठ से 10 हजार रुपये है। मरीजों को भर्ती कर इंजेक्शन लगाने का नियम है। इस नियम का भी उल्लंघन किया गया।
संविदा कर्मचारी के भरोसे करोड़ों की दवाएं
यूरोलॉजी विभाग में नियमों को ताक पर रखकर अफसरों ने चहेते संविदा कर्मचारी को असाध्य योजना की दवाओं की जिम्मेदारी सौंप दी है। दवाओं का ऑर्डर देने से लेकर उसे रिसीव करने की तक जिम्मेदारी संविदा कर्मचारी की है, जबकि संस्थान प्रशासन ने नियमित नर्सिंग ऑफिसर को दवाओं का ऑर्डर देने के लिए अधिकृत किया है। वहीं, एचआरएफ से आने वाली दवा रिसीव करने की जिम्मेदारी दूसरे नर्सिंग ऑफिसर को देने का आदेश जारी कर रखा है। केजीएमयू के ज्यादातर विभाग में यही व्यवस्था लागू है, लेकिन यूरोलॉजी विभाग में नियमों की अनदेखी की गई है। इससे महंगी दवाओं को खपाने में बड़ा खेल सामने आ रहा है।
Iमामले की जांच शुरू कर दी गई है। कमेटी बना दी गई है। जो भी दोषी मिलेगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।I
I- प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयूI
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केजीएमयू प्रशासन ने संबंधित दवाओं और इंजेक्शनों के बिलों का भुगतान तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। कुलपति ने जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी मरीजों के रिकॉर्ड, दवा वितरण रजिस्टर, इंजेक्शन की खपत और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच करेगी।
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यूरोलॉजी विभाग में प्रोस्टेट, किडनी, पेशाब की थैली के कैंसर पीड़ितों का इलाज होता है। गरीब कैंसर मरीजों को मुफ्त इलाज देने के लिए असाध्य योजना चलाई जा रही है। यूरोलॉजी विभाग में इसी योजना के पंजीकृत कैंसर मरीजों को बीमारी से बचाव व ताकत बढ़ाने के लिए दी जाने वाली महंगी दवाओं की फर्जी खपत दिखाकर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। मामला सामने आने के बाद केजीएमयू में हलचल मची है। विभाग में अक्तूबर-नवंबर 2025 में दवाओं की खपत जहां 10 लाख रुपये महीना थी, वहीं फरवरी 2026 में करीब 40 लाख रुपये की दवाएं खप गईं। मार्च में यह बजट 45 लाख रुपये से ज्यादा का आंकड़ा पार कर गया। महंगी दवाओं के तेजी से बढ़ते बजट पर अफसरों को शक हुआ। उन्होंने बिल और डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट शुरू किया, तो ढेरों गड़बड़ियां सामने आईं।
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एक इंजेक्शन की कीमत आठ से 10 हजार रुपये
हालात यह है कि कुछ मरीज को कागजों पर एक ही महीने में आयरन व प्रोटीन के चार से पांच इंजेक्शन लगा दिए गए, जबकि एक इंजेक्शन छह माह में एक बार लगाया जा सकता है। हर इंजेक्शन की कीमत आठ से 10 हजार रुपये है। मरीजों को भर्ती कर इंजेक्शन लगाने का नियम है। इस नियम का भी उल्लंघन किया गया।
संविदा कर्मचारी के भरोसे करोड़ों की दवाएं
यूरोलॉजी विभाग में नियमों को ताक पर रखकर अफसरों ने चहेते संविदा कर्मचारी को असाध्य योजना की दवाओं की जिम्मेदारी सौंप दी है। दवाओं का ऑर्डर देने से लेकर उसे रिसीव करने की तक जिम्मेदारी संविदा कर्मचारी की है, जबकि संस्थान प्रशासन ने नियमित नर्सिंग ऑफिसर को दवाओं का ऑर्डर देने के लिए अधिकृत किया है। वहीं, एचआरएफ से आने वाली दवा रिसीव करने की जिम्मेदारी दूसरे नर्सिंग ऑफिसर को देने का आदेश जारी कर रखा है। केजीएमयू के ज्यादातर विभाग में यही व्यवस्था लागू है, लेकिन यूरोलॉजी विभाग में नियमों की अनदेखी की गई है। इससे महंगी दवाओं को खपाने में बड़ा खेल सामने आ रहा है।
Iमामले की जांच शुरू कर दी गई है। कमेटी बना दी गई है। जो भी दोषी मिलेगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।I
I- प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयूI