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पुराने कांट्रैक्ट पर चल रहे एसजीपीजीआई के मेडिकल स्टोर

Mon, 08 Jul 2019 01:36 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2019 01:36 AM IST
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medical stores of pgi are running on old contract
पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट पर चल रहे पीजीआई के मेडिकल स्टोर
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लखनऊ। एसजीपीजीआई में हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) के जरिए चल रहे मेडिकल स्टोर नियम के विरुद्ध हैं। इनके रेट कॉन्ट्रैक्ट की समय सीमा छह जून को खत्म हो चुकी है, फिर इनका संचालन हो रहा है। ऐसे में मरीजों को महंगी दर पर दवाएं मिल रही हैं। एसजीपीजीआई के रेट कॉन्ट्रैक्ट पर ही केजीएमयू के एचआरएफ स्टोर भी चल रहे हैं। दोनों संस्थानों के प्रति प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
एसजीपीजीआई में ओपीडी के मरीजों को भी डॉक्टर वही दवाएं लिखते हैं, जो एचआरएफ की सूची में हैं। इसमें 2,624 दवाएं हैं। कुछ के रेट कॉन्ट्रैक्ट 2015 के हैं, जबकि 69 दवाओं का रेट कॉन्ट्रैक्ट छह जून 2016 को किया गया था। इसकी समय सीमा एक साल थी। विपरीत परिस्थितियों में इसे दो साल और बढ़ाने का विकल्प था। यदि छह जून 2016 वाले कॉन्ट्रैक्ट को देखें तो भी छह जून 2019 को इसकी समय सीमा खत्म हो गई है। फिर भी यहां के मेडिकल स्टोर पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट पर चल रहे हैं। ऐसे में संबंधित कंपनी की दवाओं के जरिए मरीजों को महंगी दवाएं दी जा रही हैं। जबकि निजी मेडिकल स्टोर पर यही दवाएं सस्ती हैं। सूत्रों का कहना है कि तीन साल के अंदर तमाम नई दवा कंपनियां आई हैं। कई दवाएं और सर्जिकल आइटम सस्ते भी हुए हैं। कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा में भी कम हुए हैं। ऐसी स्थिति में नया रेट कांट्रैक्ट होने पर नई कंपनियों के आने से चिकित्सा संस्थान को कम मूल्य पर दवाएं मिल सकती हैं।
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वजह कहीं मोटा कमीशन तो नहीं
सूत्रों का कहना है कि चिकित्सा संस्थान में एचआरएफ से जुड़े लोग रेट कॉन्ट्रैक्ट का पुनर्निधारण नहीं करना चाहते, ताकि दवा खरीद में चल रहा खेल चलता रहे। सूत्रों का यह भी दावा है कि समयसीमा खत्म होने के बाद भी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए उनकी दवाएं एचआरएफ स्टोर के जरिए मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसमें मोटे कमीशन का खेल है।
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नियम तो ये है
सूचना के अधिकार के तहत स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के अपर निदेशक भंडारण की ओर से दी गई जानकारी में स्पष्ट किया गया है कि किसी राजकीय चिकित्सालय या चिकित्सा संस्थान में दवाओं की आपूर्ति के लिए कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ एक साल का होता है। किसी संस्थान में तीन वर्ष से अधिक पुराने रेट कॉन्ट्रैक्ट पर दवाओं की आपूर्ति नहीं हो सकती है।
प्रमुख दवाओं व सर्जिकल आइटम के मूल्य
नाम एचआरएफ निजी स्टोर
1- ग्लूकोमीटर (शुगर मापने के लिए ) 1700 रुपये 800 रुपये
2- मेरोप्लान एक एमजी (एंटी बायोटिक ) 376 रुपये 360 रुपये
3. सर्जिकल ग्लब्स (ऑपरेशन के दौरान प्रयोग होता है) 16 रुपये 13 रुपये
4- ट्रिपल लूमान (डायलिसिस के दौरान प्रयोग होता है) 3000 रुपये 2500 रुपये
जल्द पूरी होगी प्रक्रिया
रेट कॉन्ट्रैक्ट से पहले सभी विभागाध्यक्षों से दवाओं की लिस्ट ली जाती है। यह प्रक्रिया चल रही है। इधर, गर्मी की छुट्टी पर कई विभागाध्यक्ष अवकाश पर थे। इस वजह से देरी हुई। जल्द प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। समयसीमा खत्म होने के बारे में जानकारी नहीं है। इसका पता कराते हैं।
- प्रो. राकेश कपूर, निदेशक- एसजीपीजीआई
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पीजीआई के रेट कॉन्ट्रैक्ट पर चल रहा केजीएमयू
केजीएमयू में सोसायटी के मेडिकल स्टोर बंद कर एचआरएफ के छह मेडिकल स्टोर खोले गए हैं। इनका संचालन एसजीपीजीआई के रेट कॉन्ट्रैक्ट पर ही हो रहा है। केजीएमयू लगातार खुद का रेट कॉन्ट्रैक्ट बनाने का दावा करता रहा, लेकिन अभी तक प्रक्रिया पूरी न हो सकी। केजीएमयू के मेडिकल स्टोर भी नियम विरुद्ध चल रहे हैं।

इसी माह टेंडर की उम्मीद
अभी एसजीपीजीआई के रेट कॉन्ट्रैक्ट पर स्टोर चल रहे हैं। एचआरएफ कमेटी काम में लगी है। इसी माह टेंडर प्रक्रिया की उम्मीद है। ज्यादातर विभागों की दवाओं की सूची तैयार हो चुकी है। वहां का रेट कॉन्ट्रैक्ट कितने साल का है, यह जानकारी नहीं है।
- प्रो. एसएन शंखवार, सीएमएस- केजीएमयू
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