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Lucknow: बच्चों को देने के बजाय 11 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेंच दी किताबें, बीईओ की जांच में खुलासा

Wed, 31 Dec 2025 10:09 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 31 Dec 2025 10:09 PM IST
सार

बच्चों को वितरित करने के लिए आई किताबों को छह महीने से कमरे में बंद करके रखा गया था। सर्दियों की छुट्टी होने के कारण प्रधानाध्यापक को जैसे ही मौका मिला किताबें कबाड़ी वाले को बेच दी।

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Lucknow: Instead of giving books to children, the headmaster sold them at Rs 11 per kg, villagers caught him.
ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई की मांग की - फोटो : amar ujala

विस्तार

सरकारी स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता सुधरे इसलिए पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की बौद्धिक गुणवत्ता को परखने के लिए निशुल्क किताबों के साथ ही कार्य पुस्तिका भी दी जाती है। मोहनलालगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय नेवाजखेड़ा में कार्यपुस्तिकाएं बच्चों को देने की बजाय पिछले छह माह से कमरे में बंद थीं।

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प्रधानाध्यापक ने सर्दियों की छुट्टी का मौका मिलते ही 11 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 2200 रुपये की दो कुंतल किताबे बेंच दी थी। बुधवार को ये जानकारी जांच करने पहुंचे खंड शिक्षा अधिकारी सुशील कुमार को मिली।
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बीईओ के पहुंचते ही चारों तरफ से ग्रामीणों ने घेर लिया और प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई की मांग की। किसी तरह से बीईओ ने ग्रामीणों को समझाया। बुधवार के अंक में अमर उजाला में वीडियो फोटो सहित खबर छपने के बाद मामले का संज्ञान विभाग के उच्च अधिकारियों ने भी लिया है। वहीं जांच के दौरान बीईओ ने रसोईया कर्मचारियों के साथ शिक्षामित्र अशोक का भी बयान दर्ज किया।

शिक्षामित्र ने मंगलवार को प्रधानाध्यापक की बात को खारिज करते हुए खुद से विद्यालय खोलने की बात से इनकार कर दिया। शिक्षा मित्र ने प्रधानाध्यापक रविंद्र गुप्ता की लापरवाही बताया है। इससे पहले प्रधानाध्यापक ने शिक्षा मित्र की साजिश बताया था।

बता दें कि मंगलवार को कबाड़ी को किताबें बेंचे जाने का मामला प्रकाश में आया था। विद्यालय से ठेलिया लेकर जैसे ही कबाड़ी वाला निकला तो ग्रामीणों ने घेर लिया था। बोरियां खोले जाने पर नई किताबें निकली थी। इसका वीडियो भी ग्रामीणों ने ही बनाया था।

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