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Lucknow: इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द, बैंक पर लगा हमेशा के लिए ताला; जानें वजह

Sat, 14 Feb 2026 08:53 AM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Sat, 14 Feb 2026 08:53 AM IST
सार

भारतीय रिजर्व बैंक ने लखनऊ के इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। बैंक 13 फरवरी से सभी प्रकार के लेन-देन बंद करेगा। 98.75 प्रतिशत जमाकर्ताओं को जमा बीमा योजना के तहत अधिकतम पांच लाख रुपये तक राशि मिलेगी। बैंक को परिसमापन में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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Lucknow: Indian Mercantile Co-operative Bank's license cancelled, bank permanently locked; find out why
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक ने लखनऊ स्थित इंडियन मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक का शुक्रवार को बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। इसके साथ ही बैंक 13 फरवरी से कोई भी बैंकिंग कारोबार नहीं कर सकेगा। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंक की आय अर्जित करने की संभावनाएं अपर्याप्त हैं और वह बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 22(3) के विभिन्न प्रावधानों का अनुपालन करने में विफल रहा है। नियामक के अनुसार बैंक का संचालन जारी रहना जमाकर्ताओं के हितों के प्रतिकूल होता और व्यापक जनहित भी प्रभावित होता।

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लाइसेंस रद्द होने के बाद बैंक तत्काल प्रभाव से जमा स्वीकार करने, जमा राशि लौटाने सहित किसी भी प्रकार का बैंकिंग कार्य नहीं कर सकेगा। आरबीआई ने उत्तर प्रदेश के सहकारिता आयुक्त एवं निबंधक से बैंक को परिसमापन में भेजने और परिसमापक नियुक्त करने का अनुरोध किया है।

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जमाकर्ता को अधिकतम पांच लाख रुपये तक मिलेगी बीमा राशि

परिसमापन की स्थिति में प्रत्येक जमाकर्ता को डिपाजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी काॅर्पोरेशन (डीआईसीजीसी) से अधिकतम पांच लाख रुपये तक की जमा बीमा राशि प्राप्त करने का अधिकार होगा। बैंक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लगभग 98.75 प्रतिशत जमाकर्ताओं को उनकी पूरी जमा राशि बीमा सीमा के भीतर मिल जाएगी। 

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31 दिसंबर 2025 तक डीआईसीजीसी की ओर से संबंधित जमाकर्ताओं की सहमति के आधार पर कुल बीमित जमा में से 2.90 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में आरबीआई कमजोर वित्तीय स्थिति वाले सहकारी बैंकों पर कड़ी निगरानी रखे हुए है, ताकि जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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