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Tiger of Siachen: नहीं रहे एपी... द टाइगर ऑफ सियाचिन, 13 दिन तक बर्फीली पोस्ट पर संभाला था मोर्चा

Tue, 03 Jan 2023 03:49 PM IST
लखनऊ ब्यूरो सुधांशु सक्सेना, अमर उजाला, लखनऊ
सुधांशु सक्सेना, अमर उजाला, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Tue, 03 Jan 2023 03:49 PM IST
सार

सियाचिन की पहाड़ियों में तिरंगा फहराने वाले कर्नल अशोक कुमार पांडेय का निधन हो गया। उन्हें टाइगर ऑफ सियाचिन के नाम से जाना जाता था।

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Army man Ashok Pratap Singh passes away.
पंचतत्व में विलीन हुए एपी- द टाइगर ऑफ सियाचिन। (फाइल फोटो)

विस्तार

सियाचिन की बर्फीली पहाड़ियों में सैन्य ऑपरेशन के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले कर्नल अशोक प्रताप सिंह नहीं रहे। बीते 31 दिसंबर को 73 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। सोमवार को उन्हें अंतिम विदाई दी गई। गोमतीनगर स्थित सृजन विहार में परिवार संग रहने वाले कर्नल सिंह 31 दिसंबर 2005 में सेवानिवृत्त हुए थे।

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कर्नल के बचपन के मित्र व सहपाठी कर्नल समर विजय सिंह ने बताया कि भारत-पाक नियंत्रण रेखा से सटे सियाचिन पर 1980 के दशक में सैन्य चौकियों को कब्जा करने का ऑपरेशन चला तो कर्नल अशोक प्रताप सिंह ने गजब का साहस दिखाया। बर्फीली सियाचिन पोस्ट पर वे मुट्ठी भर जवानों के साथ दुश्मन से लोहा लेते रहे। 13 दिन तक ऊंचाई पर डटे रहे और जब तक भारतीय सेना की टुकड़ी पोस्ट पर नहीं पहुंच गई, कब्जा बनाए रखा।
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इस ऑपरेशन के बाद उनके एक पैर की तीन अंगुलियां काटनी पड़ी थीं। राष्ट्रपति ने उन्हें विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया। इसके बाद सैन्य अधिकारी और साथी उन्हें एपी- द टाइगर ऑफ सियाचिन के नाम से बुलाने लगे। इस बहादुरी के लिए सियाचिन में उनके नाम पर एक पोस्ट भी स्थापित की गई है। कर्नल अशोक प्रताप सिंह की अंतिम विदाई के दौरान सैनिक स्कूल के सहपाठी, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सदस्य सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

1972 में हुआ ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में चयन
कर्नल समर विजय सिंह ने बताया कि कर्नल अशोक प्रताप सिंह मूलरूप से प्रतापगढ़ के थे। कक्षा सात में वे लखनऊ स्थित सैनिक स्कूल में पढ़ने आए और कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज में भी पढ़ाई की। 1972 में उनका चयन ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में हुआ। 1973 में वे भारतीय सेना की 10 गढ़वाल राइफल में बतौर सेकेंड लेफ्टिनेंट कमीशन हुए। उनके परिवार में पत्नी सविता सिंह, पुत्र रुद्राक्ष सिंह व दो पुत्रियां हैं। कर्नल अशोक प्रताप सिंह को पर्वतारोहण का शौक था। कंचनजंघा व माउंट कॉमेट पर तिरंगा लहराने के लिए उन्हें सेना मेडल से भी नवाजा गया था।

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