{"_id":"61b97b0dcd2f244378215585","slug":"lucknow-bade-babu-s-jugaad-amazing-36-years-spent-in-fake-name-dm-recommends-suspension","type":"story","status":"publish","title_hn":"लखनऊ : बड़े बाबू के जुगाड़ का कमाल, फर्जी नाम से नौकरी के बिता दिए 36 साल, डीएम ने की निलंबन की सिफारिश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लखनऊ : बड़े बाबू के जुगाड़ का कमाल, फर्जी नाम से नौकरी के बिता दिए 36 साल, डीएम ने की निलंबन की सिफारिश
Wed, 15 Dec 2021 12:00 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 15 Dec 2021 12:00 PM IST
सार
विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक, 4 फरवरी 1985 को रवि प्रकाश मिश्र के नाम नियुक्ति पत्र जारी हुआ था। लेकिन तभी से मिश्र के स्थान पर रवि प्रकाश चतुर्वेदी काम कर रहा है।
विज्ञापन
धोखाधड़ी करने वाले 17 दुकानदारों पर नापतौल विभाग ने कार्रवाई की
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
समाज कल्याण विभाग के एक बड़े बाबू के जुगाड़ की खूब चर्चा है। वह 36 साल से गोरखपुर में दूसरे के नाम पर नौकरी कर रहा है। डीएम ने जांच के बाद उसके निलंबन की स्पष्ट संस्तुति की है, लेकिन विभाग कार्रवाई में हीलाहवाली कर रहा है।
विज्ञापन
विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक, 4 फरवरी 1985 को रवि प्रकाश मिश्र के नाम नियुक्ति पत्र जारी हुआ था। लेकिन तभी से मिश्र के स्थान पर रवि प्रकाश चतुर्वेदी काम कर रहा है। चतुर्वेदी इस साल 31 दिसंबर को रिटायर भी हो जाएगा। उच्चस्तरीय निर्देश पर गोरखपुर के डीएम विजय किरन आनंद की गोपनीय रिपोर्ट में इन सभी तथ्यो की पुष्टि की गई है। डीएम ने यह भी सिफारिश की है कि चतुर्वेदी को निलंबित कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाए।
विज्ञापन
समाज कल्याण निदेशालय के ही एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि चतुर्वेदी किसी दूसरे के नाम पर नौकरी कर रहा है, यह विभाग में सभी लोग वर्षों से जानते हैं। लेकिन उसके जुगाड़ से सारे नियम बौने साबित होते रहे हैं। इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि डीएम ने 6 दिसंबर को रिपोर्ट शासन को भेज दी थी, पर अब तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बताते हैं कि समाज कल्याण निदेशालय में बैठे कुछ अफसर भी उसे बचाने में शामिल हैं।
विज्ञापन
प्रधान सहायक के नियुक्ति प्राधिकारी संभवत: निदेशक होते हैं। मुझे अभी प्रकरण की जानकारी नहीं हैं।
- हिमांशु कुमार, प्रमुख सचिव, समाज कल्याण
इस मामले में कहीं से कोई स्पष्ट कार्रवाई की संस्तुति नहीं आई है। डीएम की रिपोर्ट के बारे में मुझे जानकारी नहीं है।
- राकेश कुमार, निदेशक, समाज कल्याण