लखनऊ: नौ साल बाद मेधावियों के गले में चमके पदक, सीएम बोले- जनता का विश्वास ही जज-वकील की पूंजी
Convocation ceremony: डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में 132 मेधावियों को पदक दिए गए। इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ और मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड मौजूद रहे।
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डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार नौ साल की लंबी खामोशी के बाद दीक्षांत समारोह के उल्लास से गूंज उठा। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली की मौजूदगी में मेधावियों को डिग्री और पदक प्रदान किए गए। विवि के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने सभी का स्वागत किया और मेधावियों को शुभकामनाएं दीं।
नौ साल पहले साधारण विद्यार्थी के रूप में यहां से पढ़ाई पूरी कर निकले विद्यार्थी शनिवार को डिग्री लेने के लिए विशिष्ट रूप में वापस आए। इनमें से कई विद्यार्थी न्यायायाधीश के रूप में चयनित होकर काम कर रहे हैं तो कई वकील, शिक्षक, प्रशासनिक सेवक और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले रहे। विश्वविद्यालय का पिछला दीक्षांत समारोह वर्ष 2015 में हुआ था। इसके बाद किसी न किसी कारण से दीक्षांत समारोह का आयोजन टलता रहा। इसी साल विवि की कमान संभालने वाले कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने दीक्षांत समारोह के आयोजन का प्रयास किया। शनिवार को विवि का तीसरा दीक्षांत समारोह हुआ। समारोह में कुल 132 पदक प्रदान किए गए। इनमें से 18 मेधावियों को मुख्य समारोह में मंच से पदक प्रदान किए गए। बाकी मेधावियों को मुख्य समारोह के बाद पदक दिए गए। इसके साथ ही बीए एलएलबी के 1448, एलएलएम के 200, डिप्लोमा के 182 और पीएचडी के 68 विद्यार्थियों को डिग्री भी प्रदान की गईं।
जनता का विश्वास ही जज और वकील की असली पूंजी : योगी
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जज और वकील दोनों के लिए जनता का विश्वास सबसे अहम है। इसलिए डिग्री प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को इसका ध्यान रखते हुए काम करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन की पहली शर्त ही विधि का शासन है। न्याय सही समय पर समयबद्ध तरीके से हो, इसके लिए योग्य विधि विशेषज्ञ की जरूरत होती है। आम जनमानस बड़े विश्वास के साथ न्यायपालिका के पास आता है। यहां तक कि घरेलू विवाद में भी वह वकील द्वारा कही गई बात पर ज्यादा भरोसा करता है। उसके कहने पर बताए गए स्थान पर अपने हस्ताक्षर कर देता है। इसलिए यह विश्वास बना रहना चाहिए। बदलती परिस्थितियों और परिवेश में लोगों की जरूरतें, तौर-तरीके, तकनीक की राह सकारात्मक होनी चाहिए। वहीं नकारात्मक राह न तो व्यक्तिगत हित में होगी और न ही समाज के हित में। उन्होंने कहा कि एक पुरानी कहावत है कि परिवार के हित व्यक्ति को छोड़ना पड़े तो उसमें परहेज नहीं करना चाहिए। इसी तरह गांव के हित के लिए परिवार, समाज के हित के लिए गांव और राष्ट्र के लिए गांव को छोड़ना पड़े तो परहेज नहीं करना चाहिए। इसलिए राष्ट्र हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए अपने काम से समाज और राष्ट्र को लाभान्वित करने की अपील की।
हिंदी और क्षेत्रीय भाषा में हो कानून की पढ़ाई
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कानून की पढ़ाई हिंदी और क्षेत्रीय भाषा में होनी जरूरी है। डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का दीक्षांत भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि विधि छात्रों को भी क्षेत्रीय भाषाओं का ज्ञान होना जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में रहकर अगर कानून के विद्यार्थी खसरा और खतौनी नहीं जान पाएंगे तो भला आम लोगों की समस्याओं का समाधान कैसे करेंगे। अगर दो किसानों के बीच कोई विवाद या फिर फौजदारी का मुकदमा होता है, ऐसी स्थिति में देशी हथियार और उनकी स्थानीय भाषा में हुई कहासुनी को लेकर अंग्रेजी में बहस करना काफी कठिन काम होगा। देश की विडंबना यह है कि यहां न्यायालय में बहस अंग्रेजी में होती है। जज और वकील यह भाषा समझते हैं, लेकिन जिनके लिए बहस हो रही है उनमें से ज्यादातर इसे समझ नहीं पाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए वर्ष 1950 से लेकर अब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए सभी 37 हजार निर्णयों का हिंदी में अनुवाद कराया गया है। विधि की पढ़ाई हिंदी और स्थानीय भाषा में कराने के लिए सभी विश्वविद्यालयों को आपस में मिलकर मॉड्यूल तैयार करने चाहिए। इससे पढ़ाई में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को अपने यहां हिंदी में एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई शुरू करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालयों में चलने वाले लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से लोगों को कानूनी मदद देने के साथ ही विद्यार्थियों को क्षेत्रीय समझ विकसित करने को कहा।
मुख्य समारोह में पदक पाने वाले मेधावी
अभिषेक दीक्षित- एलएलएम 2017
अनुराग- एलएलएम 2018
प्रियंवदा प्रियदर्शनी- एलएलएम 2019
गुलफ्शा- एलएलएम 2020
साइमा सुल्तान- एलएलएम 2021
सौरभ तिवारी- एलएलएम 2022
शिवेश राज जायसवाल-एलएलएम 2023
अक्षत अग्रवाल- एलएलएम 2024
दीपाली यादव- बीएएलएलबी 2016,
मांडवी मेहरोत्रा- बीएएलएलबी 2017
सुरभि कार्वा- बीएएलएलबी 2018
सिद्धांत शंकर पांडेय- बीएएलएलबी 2019
अदिति बांगर- बीएएलएलबी 2020
दीक्षा गुप्ता- बीएएलएलबी 2021
कृतिका- बीएएलएलबी 2022
वनज विद्यान- बीएएलएलबी, 2023
रूपल जायसवाल- बीएएलएलबी 2024