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Loksabha Chunav 2024 : बीजेपी में कट सकते हैं दिग्गजों के टिकट, वहां महिलाओं को प्रत्याशी बनाने की तैयारी

Sat, 30 Sep 2023 06:25 AM IST
रोहित मिश्र सचिन मुद्गल, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
सचिन मुद्गल, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 30 Sep 2023 06:25 AM IST
सार

लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा (एनडीए) ने 80 में 11 (13.75 प्रतिशत) सीटों पर महिलाओं को प्रत्याशी बनाया था। इनमें 10 भाजपा और एक अपना दल एस की प्रत्याशी थीं।

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Lok Sabha Election 2024: Tickets Of Many Big Leaders May Be Cut In BJP News in Hindi
बीजेपी चुनाव अभियान की शुरुआत कर चुकी है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

 लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी चयन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का असर देखने को मिलेगा। पार्टी ने कथनी और करनी को एक साबित करने के लिए 20 से 30 फीसदी तक महिलाओं को प्रत्याशी बनाने की तैयारी की है। ऐसे अधिनियम के असर से प्रदेश के कई मौजूदा दिग्गज सांसदों के टिकट कट जाएंगे। लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा (एनडीए) ने 80 में 11 (13.75 प्रतिशत) सीटों पर महिलाओं को प्रत्याशी बनाया था। इनमें 10 भाजपा और एक अपना दल एस की प्रत्याशी थीं। प्रदेश में एनडीए के 66 लोकसभा सदस्यों में से 57 पुरुष और 9 महिला सांसद हैं। इनमें भाजपा की आठ व अपना दल एस की एक प्रत्याशी ने चुनाव जीता था। इनमें अमेठी से भाजपा सांसद स्मृति ईरानी, फतेहपुर से भाजपा सांसद साध्वी निरंजन ज्योति और मिर्जापुर से अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल मोदी सरकार में मंत्री भी हैं। 

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू होने के बाद भाजपा में चर्चा तेज है कि लोकसभा चुनाव में महिला प्रत्याशियों की संख्या 20 से 25 तक हो सकती है। सपा की ओर से 20 फीसदी महिलाओं को टिकट देने की घोषणा के बाद भाजपा पर महिलाओं को ज्यादा टिकट देने का दबाव बनेगा। पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि प्रदेश में महिला प्रत्याशी बढ़ने से दस से पंद्रह मौजूदा दिग्गज सांसदों के टिकट कट सकते हैं।
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कमजोर सीटों पर भी महिला शक्ति का दांव
सूत्रों के मुताबिक जातीय समीकरण के हिसाब से कमजोर मानी जाने वाली सीटों पर भी भाजपा महिला प्रत्याशी को उतारकर नारी शक्ति का दांव चल सकती है।

पत्नी, बेटी को टिकट की बढ़ सकती है मांग
सूत्रों के मुताबिक महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के कारण जब पुरुष सांसदों के टिकट काटे जाएंगे तो वे अपनी सीट पर पत्नी या बेटी को टिकट देने का दबाव बनाएंगे। ऐसे में पार्टी नेतृत्व की कड़ी परीक्षा होगी कि वह परिवारवाद को बढ़ावा देते हैं या नए चेहरों को मौका देकर महिलाओं के बीच नया नेतृत्व खड़ा करने की कोशिश करते हैं।
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गठबंधन को भी मिल सकती है महिला प्रत्याशी
भाजपा सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में एनडीए के सहयोगी अपना दल (एस), सुभासपा और निषाद पार्टी को भी सीटें मिलेंगी। ऐसे में भाजपा सहयोगी दलों के कोटे वाली सीटों पर भी महिला प्रत्याशी उतारने का दबाव बना सकती है।


इन महिलाओं के सिर बंधा था जीत का ताज
वर्ष 2019 के चुनाव में एनडीए की सहयोगी अपना दल एस की अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से चुनाव जीती थीं। बदायूं से भाजपा की संघमित्रा मौर्या, मथुरा से हेमा मालिनी, फूलपुर से केसरी देवी पटेल, सुल्तानपुर से मेनका गांधी, फतेहपुर से साध्वी निरंजन ज्योति, धौरहरा से रेखा वर्मा, अमेठी से स्मृति ईरानी, प्रयागराज से डॉ. रीता बहुगुणा जोशी सांसद चुनी गई थी। वहीं रामपुर से भाजपा प्रत्याशी फिल्म अभिनेत्री जया प्रदा और लालगंज से नीलम सोनकर चुनाव हार गईं थीं।
 

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