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मरीजों की जेब पर झटका: गैस, बीपी और दिल की बीमारियों की दवाएं हुई महंगी; लगातार दवा खाने वालों का बिगड़ा बजट

Tue, 13 Oct 2026 08:54 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Tue, 13 Oct 2026 08:54 AM IST
सार

मरीजों की जेब पर महंगाई का झटका लगा है। गैस, बीपी और दिल की बीमारियों समेत कई दवाएं महंगी हो गई हैं। इससे लगातार दवा खाने वालों का बजट बिगड़ गया है। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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Medicines for gas, blood pressure, and heart ailments have become costlier
दवाइयां महंगी हुईं। - फोटो : संवाद

विस्तार

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) की दरें घटने के बाद सस्ती हुई एलोपैथिक दवाएं फिर महंगी हो गई हैं। कंपनियों ने कच्चे माल व भाड़े की दरें बढ़ने का हवाला देकर गैस, ब्लड प्रेशर, बुखार से लेकर दिल की बीमारियों में प्रयोग होने वाली दवाओं के दाम बढ़ा दिए हैं। दामों में 13 रुपये से लेकर 23 रुपये तक की वृद्धि हुई है। 

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इससे नियमित दवा लेने वाले मरीजों की जेब पर सीधा असर पड़ा है और उनका मासिक बजट बिगड़ने लगा है। इसका सबसे ज्यादा असर लंबे समय चलने वाली बीमारियों के इलाज वाले मरीजों पर पड़ा है। हृदय रोग, गैस और दूसरी पेट संबंधी समस्याओं के मरीजों को रोजाना दवा लेनी पड़ती है। ऐसे में कीमतें बढ़ने से इलाज का खर्च बढ़ गया है। 
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बुखार जैसी सामान्य बीमारियों की दवाएं महंगी होने से आम मरीजों को भी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। राजधानी लखनऊ में दवा कारोबारियों के मुताबिक, कंपनियां नई दरों पर आपूर्ति कर रही हैं, इसलिए पुराने स्टॉक पर भी नया रेट लग रहा है। कंपनी और पैक के हिसाब से दाम अलग-अलग बढ़े हैं।

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अन्य दवाओं में भी बढ़ोतरी का आशंका

चिकित्सकों का कहना है कि एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (एपीआई) का अधिकांश हिस्सा चीन से आयात होता है। वैश्विक संघर्षों के कारण मालवाहक जहाजों (कंटेनरों) की भारी कमी हुई है। इससे चीन समेत अन्य देशों से आने वाले एपीआई की लागत करीब 30 से 60 फीसदी तक बढ़ गई है। कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की दवाओं में इस्तेमाल होने वाले प्लेटिनम व ग्लिसरीन जैसे साल्वेंट्स की वैश्विक कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं। 


पिछले तीन महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट और माल ढुलाई का खर्च 12 से 18 फीसदी तक बढ़ने से दवा कंपनियों की लागत बढ़ गई है। जानकारों के अनुसार अगर कच्चे माल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले महीनों में अन्य दवाओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।


लखनऊ केमिस्ट एसोसिएशन के हरीश चंद्र शाह ने कहा कि ब्रांडेड कंपनियां अपने रेट बढ़ा रही है। जबकि जेनरिक दवाओं की बढ़ोत्तरी में कोई इजाफा नहीं हुआ है। इसका असर मरीजों की जेब पर पड़ेगा। खासकर उन मरीजों पर बोझ बढ़ेगा जिनकी नियमित रूप से दवा चलती है।

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