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फर्जी दस्तावेज से बेचे एलडीए के प्लॉट, ऐसे तैयार करते थे रजिस्ट्री का क्लोन
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 09 Nov 2017 07:33 PM IST
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प्लॉट बेचने वाले गिरोह की गिरफ्तारी के बारे में बताते एसएसपी
- फोटो : amarujala
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एलडीए की पॉश कॉलोनियों में खाली प्लॉट के फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों को ठगने वाले गिरोह को राजधानी पुलिस ने दबोच लिया। गिरोह में शामिल वकील ने अपने रिश्तेदार और इलाहाबाद में तैनात एएसपी की पत्नी सहित कई लोगों से करोड़ों ठगे लिए। गोमतीनगर पुलिस बुधवार को गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया।
जालसाजों में वकील व दो महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस अब गिरोह के मददगार एलडीए के कर्मचारियों की तलाश में जुट गई है। एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि इन जालसाजों ने गोमतीनगर के पॉश इलाके विपुलखंड में आठ जमीनों के कागजात बनाए और चार को बेचने में सफल हुए।
जालसाजों ने जमीन के बदले करीब चार से पांच करोड़ रुपये ऐंठ लिया। इस संबंध में दो पीड़ितों ने गोमतीनगर थाने में केस दर्ज कराया। पुलिस ने पड़ताल शुरू की तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इस गिरोह का मास्टर माइंड कीर्ति द्विवेदी व विपुल खंड निवासी मनोज सिंह है।
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कीर्ति अलीगंज सेक्टर एम का रहने वाला है। इसके साथ विकासखंड निवासी वकील राघवेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ अंकुर, इलाहाबाद के सर्कुलर रोड गंगानगर निवासी जियालाल उर्फ मिट्ठू, लक्ष्मी उर्फ स्नेह और राजापुर निवासी शशि उर्फ प्रतिमा चंद्रा को पुलिस ने मंगलवार रात को गिरफ्तार कर लिया।
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जालसाजों में वकील व दो महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस अब गिरोह के मददगार एलडीए के कर्मचारियों की तलाश में जुट गई है। एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि इन जालसाजों ने गोमतीनगर के पॉश इलाके विपुलखंड में आठ जमीनों के कागजात बनाए और चार को बेचने में सफल हुए।
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जालसाजों ने जमीन के बदले करीब चार से पांच करोड़ रुपये ऐंठ लिया। इस संबंध में दो पीड़ितों ने गोमतीनगर थाने में केस दर्ज कराया। पुलिस ने पड़ताल शुरू की तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इस गिरोह का मास्टर माइंड कीर्ति द्विवेदी व विपुल खंड निवासी मनोज सिंह है।
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कीर्ति अलीगंज सेक्टर एम का रहने वाला है। इसके साथ विकासखंड निवासी वकील राघवेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ अंकुर, इलाहाबाद के सर्कुलर रोड गंगानगर निवासी जियालाल उर्फ मिट्ठू, लक्ष्मी उर्फ स्नेह और राजापुर निवासी शशि उर्फ प्रतिमा चंद्रा को पुलिस ने मंगलवार रात को गिरफ्तार कर लिया।
एलडीए कर्मचारी उपलब्ध कराते थे असली कागज
डेमो
- फोटो : demo pic
गिरोह का सदस्य जियालाल फैजाबाद के रौनाही थाना से एक साल पहले जेल भी जा चुका है। इस गिरोह के खिलाफ फैजाबाद और लखनऊ में तीन केस दर्ज हैं। गिरोह के अन्य सदस्य वीरेन्द्र कुमार यादव, आफताब, संजय और दीपा की तलाश की जा रही है। एसएसपी ने बताया कि पकड़े गए जालसाज एलडीए कर्मचारियोें की मिलीभगत से राजधानी की वीआईपी कॉलोनियों में खाली पड़े जमीनों की रजिस्ट्री के मूल कागजात निकलवाते थे और उनका क्लोन तैयार कर वापस जमा करा देते।
इस मदद के लिए एलडीए कर्मचारियों को दो से चार लाख रुपये दिए जाते थे। सीओ गोमतीनगर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि जालसाज जमीन का सौदा तय होने के बाद एडवांस रकम लेते। इसके बाद एलडीए से रजिस्ट्री की मूल कॉपी लेकर उसका क्लोन गाजियाबाद और नोएडा में बैठे गिरोह के अन्य सदस्यों से बनवाते थे।
यह आफताब के जिम्मे होता था। जमीन के कागजात पर दर्ज प्लॉट मालिक के परिवार और रिश्तेदारों के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने के बाद रजिस्ट्री की तारीख तय की जाती। क्लोन पेपर में असली की तरह सिल्वर लाइन भी होती थी। एएसपी उत्तरी अनुराग वत्स ने बताया कि गोमतीनगर थानाक्षेत्र में वीरेन्द्र कुमार सिंह ने अपने साले के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया।
वीरेन्द्र के मुताबिक आरोपी ने उनसे विपुलखंड स्थित प्लॉट नंबर 4/159 खरीदने को कहा। जमीन पसंद आने पर वीरेन्द्र ने अपने रिश्ते में साले राघवेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ अंकुर केमाध्यम से सौदा तय किया। जमीन केलिए उन्होंने कई किस्तों में 87 लाख रुपये दिए। यह रकम प्रतिमा चंद्रा के नाम पर दिया।
इस मदद के लिए एलडीए कर्मचारियों को दो से चार लाख रुपये दिए जाते थे। सीओ गोमतीनगर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि जालसाज जमीन का सौदा तय होने के बाद एडवांस रकम लेते। इसके बाद एलडीए से रजिस्ट्री की मूल कॉपी लेकर उसका क्लोन गाजियाबाद और नोएडा में बैठे गिरोह के अन्य सदस्यों से बनवाते थे।
यह आफताब के जिम्मे होता था। जमीन के कागजात पर दर्ज प्लॉट मालिक के परिवार और रिश्तेदारों के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने के बाद रजिस्ट्री की तारीख तय की जाती। क्लोन पेपर में असली की तरह सिल्वर लाइन भी होती थी। एएसपी उत्तरी अनुराग वत्स ने बताया कि गोमतीनगर थानाक्षेत्र में वीरेन्द्र कुमार सिंह ने अपने साले के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया।
वीरेन्द्र के मुताबिक आरोपी ने उनसे विपुलखंड स्थित प्लॉट नंबर 4/159 खरीदने को कहा। जमीन पसंद आने पर वीरेन्द्र ने अपने रिश्ते में साले राघवेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ अंकुर केमाध्यम से सौदा तय किया। जमीन केलिए उन्होंने कई किस्तों में 87 लाख रुपये दिए। यह रकम प्रतिमा चंद्रा के नाम पर दिया।
परत-दर-परत खुलीं परतें
डेमो
पुलिस के मुताबिक इस जमीन की मालकिन प्रतिमा चंद्रा एक नेशनल न्यूज चैनल के मालिक की रिश्तेदार हैं। जब जमीन की रजिस्ट्री कराने की बात शुरू हुई तो उनकेसामने इलाहाबाद के राजापुर निवासी शशि को प्रतिमा चंद्रा बनाकर पेश किया गया। शशि को देखते हुए उन्हें कुछ संदेह हुआ। कुछ जानकारी हासिल कर केस दर्ज कराया। पुलिस ने अंकुर से पूछताछ शुरू की तो फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं।
सीओ गोमतीनगर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि इस गिरोह की जड़ें एलडीए में भी हैं। प्राधिकरण के करीब 50 कर्मचारी इन जालसाजों के संपर्क में है। सभी की कॉल डिटेल निकाली जा चुकी है। उसी रिपोर्ट और जांच के आधार पर एलडीए के कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी। एलडीए के अधिकारियों से भी विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जाएगा। वहीं इसके अतिरिक्त नोएडा, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में इन जालसाजों की जड़ें हैं। जांच की जा रही है।
सीओ गोमतीनगर ने बताया कि जालसाजों को खाली जमीनों के बारे में एलडीए के कर्मचारी ही जानकारी देते थे। कर्मचारी ही यह बताते थे कि कौन सी जमीन खाली है। उसका मालिक कौन है। प्लॉट खरीदने के बाद कितनी बार जानकारी हासिल करने के लिए आए। कहां रहते हैं। क्या करते हैं।
इंस्पेक्टर गोमतीनगर आनंद प्रकाश शुक्ला ने बताया कि जालसाजों के शौक काफी महंगे थे। पकड़े जाने पर इसका खुलासा हुआ। जालसाजी से कमाई गई रकम से वह लग्जरी गाड़ियां, महंगे कपड़े, जूते और और घड़ियां खरीदते थे। पकड़े गए जालसाजों केपास 15 से 25 हजार रुपये तक के महंगे ब्रांड के जूते और इंटरनेशल ब्रांड की 15 लाख तक की घड़ियां भी हैं। इसके अलावा जालसाज अपने घरों में भी काफी महंगे लग्जरी सामानों का प्रयोग करते हैं।
गिरोह को पकड़ फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाली राजधानी पुलिस को बधाई। जालसाजों के मददगार एलडीए कर्मचारी हो सकते हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नहीं। दोषियों की तलाश कर कार्रवाई की जाएगी। -पीएन सिंह, वीसी, एलडीए
सीओ गोमतीनगर दीपक कुमार सिंह ने बताया कि इस गिरोह की जड़ें एलडीए में भी हैं। प्राधिकरण के करीब 50 कर्मचारी इन जालसाजों के संपर्क में है। सभी की कॉल डिटेल निकाली जा चुकी है। उसी रिपोर्ट और जांच के आधार पर एलडीए के कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी। एलडीए के अधिकारियों से भी विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जाएगा। वहीं इसके अतिरिक्त नोएडा, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में इन जालसाजों की जड़ें हैं। जांच की जा रही है।
सीओ गोमतीनगर ने बताया कि जालसाजों को खाली जमीनों के बारे में एलडीए के कर्मचारी ही जानकारी देते थे। कर्मचारी ही यह बताते थे कि कौन सी जमीन खाली है। उसका मालिक कौन है। प्लॉट खरीदने के बाद कितनी बार जानकारी हासिल करने के लिए आए। कहां रहते हैं। क्या करते हैं।
इंस्पेक्टर गोमतीनगर आनंद प्रकाश शुक्ला ने बताया कि जालसाजों के शौक काफी महंगे थे। पकड़े जाने पर इसका खुलासा हुआ। जालसाजी से कमाई गई रकम से वह लग्जरी गाड़ियां, महंगे कपड़े, जूते और और घड़ियां खरीदते थे। पकड़े गए जालसाजों केपास 15 से 25 हजार रुपये तक के महंगे ब्रांड के जूते और इंटरनेशल ब्रांड की 15 लाख तक की घड़ियां भी हैं। इसके अलावा जालसाज अपने घरों में भी काफी महंगे लग्जरी सामानों का प्रयोग करते हैं।
गिरोह को पकड़ फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाली राजधानी पुलिस को बधाई। जालसाजों के मददगार एलडीए कर्मचारी हो सकते हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नहीं। दोषियों की तलाश कर कार्रवाई की जाएगी। -पीएन सिंह, वीसी, एलडीए