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Lucknow News: 22 दिन डिजिटल अरेस्ट रख 16.09 लाख ठगे

Tue, 06 Oct 2026 03:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Tue, 06 Oct 2026 03:06 AM IST
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Swindled 16.09 lakh after keeping victim under digital arrest for 22 days
एआई तस्वीर।
लखनऊ। साइबर जालसाजों ने गोमतीनगर के विजयखंड निवासी सिविल डिफेंस से सेवानिवृत्त अधिकारी विजय प्रकाश गुप्ता (89) को 22 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। खुद को एटीएस अधिकारी बताकर उन्हें पुलवामा से जुड़े मामले में फंसाने की धमकी दी और निर्दोष साबित करने के नाम पर 16.09 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। पीड़ित ने चार अक्तूबर को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई।
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विजय प्रकाश के मुताबिक, तीन सितंबर को सुबह करीब 10:19 बजे उनके पास व्हाट्सएप ऑडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को गोमतीनगर एक्सटेंशन स्थित एटीएस कार्यालय का अधिकारी बताया और उन्हें दफ्तर आने के लिए कहा। उन्होंने गोमतीनगर थाने में मिलने की बात कही लेकिन आरोपी ने इन्कार कर दिया। इसके बाद तीन अन्य लोगों से उनकी बात कराई गई, जिन्होंने खुद को एटीएस अधिकारी बताया।
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जालसाजों ने व्हाट्सएप पर उनके नाम वाला डेबिट कार्ड भेजा और दावा किया कि यह कार्ड आईसीआईसीआई बैंक का है। जालसाजों ने बताया कि यह कार्ड एक ओवरग्राउंड वर्कर के पास मिला था, जिसके घर पर पुलवामा मामले में छापा पड़ा था। इस कार्ड से 2.56 करोड़ रुपये का अवैध ट्रांजेक्शन हुआ है।
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व्हाट्सएप की डीपी पर लगा था एटीएस का लोगो
विजय ने बताया कि इसके बाद व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल पर उनसे पूछताछ की गई। डीपी पर एटीएस का लोगो था। ठगों ने खुद को सीनियर अधिकारी संदीप राव और प्रेम कुमार गौतम बताया। पूछताछ के दौरान उन्हें कमरे में बंद रहने का निर्देश दिया गया और किसी को जानकारी देने पर परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। साथ ही सहयोग करने पर एटीएस से निर्दोष होने का प्रमाणपत्र देने का झांसा दिया गया। आरोपियों ने उन्हें बताया कि मामले की जांच एनआईए और ईओडब्ल्यू भी कर रही है। डर के कारण वह उनके निर्देशों का पालन करते रहे।
तीन बार में ट्रांसफर कराई रकम
विजय के मुताबिक आरोपियों ने 15 सितंबर को उनसे सभी बैंक खातों की पासबुक की फोटो मंगाई। इसके बाद जांच के नाम पर 6.85 लाख रुपये ट्रांसफर कराए। दो दिन बाद उनकी एफडी तुड़वाकर 6.74 लाख रुपये भी अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए। 25 सितंबर को उनसे 2.50 लाख रुपये और ट्रांसफर कराने के बाद आरोपियों ने कॉल काट दी। इसके बाद निर्दोष होने का प्रमाणपत्र नहीं मिला तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ। करीब 22 दिन बाद कमरे से बाहर आने पर परिजनों ने उनसे पूछताछ की लेकिन डर और शर्मिंदगी के कारण उन्होंने घटना नहीं बताई।

जिंदगी भर की कमाई लुटने पर पुलिस से की शिकायत
विजय ने बताया कि जिंदगी भर की कमाई एक झटके में लुटने पर वह टूट गए। किसी को घटना के बारे में न बताने पर वह अंदर घुटने लगे। घुटन बढ़ने पर चार अक्तूबर को उन्होंने पुलिस से शिकायत की। इंस्पेक्टर आलोक राव ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल नंबरों को ट्रेस किया जा रहा है। रकम फ्रीज कराने के लिए संबंधित बैंकों से संपर्क किया गया है।
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